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Shubham Rai 'shubh'
ik safar men tanhaa chhodaa ja chuka hai
ik safar men tanhaa chhodaa ja chuka hai | इक सफ़र में तन्हा छोड़ा जा चुका है
- Shubham Rai 'shubh'
इक
सफ़र
में
तन्हा
छोड़ा
जा
चुका
है
ज़ख़्म
देकर
नाता
तोड़ा
जा
चुका
है
इंतिज़ार-ए-इश्क़
करके
क्या
मिलेगा
प्यार
से
जब
राह
छोड़ा
जा
चुका
है
- Shubham Rai 'shubh'
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नई
नस्लें
समझ
पाएँ
मुहब्बत
के
मआनी
हमें
इस
वास्ते
भी
शा'इरी
करनी
पड़ेगी
Dipendra Singh 'Raaz'
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लो
आज
हमने
तोड़
दिया
रिश्ता-ए-उम्मीद
लो
अब
कभी
गिला
न
करेंगे
किसी
से
हम
Sahir Ludhianvi
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उस
ख़ूब-रू
से
रब्त
ज़रा
कम
हुआ
मेरा
ये
देख
कर
उदासी
मेरे
संग
लग
गई
Siddharth Saaz
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रिश्तों
को
जब
धूप
दिखाई
जाती
है
सिगरेट
से
सिगरेट
सुलगाई
जाती
है
Ankit Gautam
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कौन
सी
दीवार
है
मौजूद
इस
रिश्ते
में
'साज़'
क्यूँँ
नहीं
रो
सकते
हम
अपने
पिता
के
सामने
Siddharth Saaz
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कितनी
मुश्किल
के
बाद
टूटा
है
एक
रिश्ता
कभी
जो
था
ही
नहीं
Shahbaz Rizvi
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घर
में
झीने
रिश्ते
मैंने
लाखों
बार
उधड़ते
देखे
चुपके
चुपके
कर
देती
है
जाने
कब
तुरपाई
अम्मा
Aalok Shrivastav
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अंदर
की
दुनिया
से
रब्त
बढ़ाओ
'आनिस'
बाहर
खुलने
वाली
खिड़की
बंद
पड़ी
है
Aanis Moin
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पैसा
कमाने
आते
हैं
सब
राजनीति
में
आता
नहीं
है
कोई
भी
खोने
के
वास्ते
छम्मो
का
मुजरा
सुनते
हैं
नेता
जो
रात
भर
संसद
भवन
में
आते
हैं
सोने
के
वास्ते
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Paplu Lucknawi
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प्यार
का
रिश्ता
ऐसा
रिश्ता
शबनम
भी
चिंगारी
भी
यानी
उन
सेे
रोज़
ही
झगड़ा
और
उन्हीं
से
यारी
भी
Ateeq Allahabadi
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आवाज़
इक
अपने
रविश
पर
आ
गया
सरकार
को
भी
यार
चक्कर
आ
गया
बिकने
लगी
ईमानदारी
शख़्स
की
हिस्से
मिरे
आँसू
तिरे
ज़र
आ
गया
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Shubham Rai 'shubh'
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बुरा
हो
वक़्त
तो
इंसान
भी
ख़ामोश
हो
जाता
सही
से
ज़िंदगी
का
अर्थ
तो
तकलीफ़
समझाता
Shubham Rai 'shubh'
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क़बीले
के
अपने
वफ़ादार
तुम
हो
हो
जनता
की
हामी
या
इनकार
तुम
हो
हक़ीक़त
क़लम
से
निकलती
नहीं
है
ख़रीदा
हुआ
जैसे
अख़बार
तुम
हो
दिखाओगे
तुम
तो
धमक
रंगदारी
है
नेता
सभी
गुंडे
सरकार
तुम
हो
दिखाकर
के
सपने
जो
काटी
हैं
ज़ेबें
गरीबों
के
कैसे
मददगार
तुम
हो
ग़नीमत
है
हम
बोल
देते
हैं
वर्ना
भगत
सब
तुम्हारे
निराकार
तुम
हो
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Shubham Rai 'shubh'
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दिल
लगाओ
अबकी
तुम,
हिजरत
करेंगे
हम
फिर
बताना
दर्द
मीठा
है
कि
कड़वा
है
Shubham Rai 'shubh'
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घड़ी
देखकर
वक़्त
बेकार
करता
रहा
उम्र
भर
कि
इक
बे-वफ़ा
से
ही
इज़हार
करता
रहा
उम्र
भर
Shubham Rai 'shubh'
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