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Shubham Rai 'shubh'
ghadi dekhkar vaqt bekar karta raha umr bhar
ghadi dekhkar vaqt bekar karta raha umr bhar | घड़ी देखकर वक़्त बेकार करता रहा उम्र भर
- Shubham Rai 'shubh'
घड़ी
देखकर
वक़्त
बेकार
करता
रहा
उम्र
भर
कि
इक
बे-वफ़ा
से
ही
इज़हार
करता
रहा
उम्र
भर
- Shubham Rai 'shubh'
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किसे
है
वक़्त
मोहब्बत
में
दर-ब-दर
भटके
मैं
उसके
शहर
गया
था
किसी
ज़रूरत
से
Riyaz Tariq
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वक़्त
किस
तेज़ी
से
गुज़रा
रोज़-मर्रा
में
'मुनीर'
आज
कल
होता
गया
और
दिन
हवा
होते
गए
Muneer Niyazi
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मुझ
में
थोड़ी
सी
जगह
भी
नहीं
नफ़रत
के
लिए
मैं
तो
हर
वक़्त
मोहब्बत
से
भरा
रहता
हूँ
Mirza Athar Zia
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कोई
चादर
वफ़ा
नहीं
करती
वक़्त
जब
खींच-तान
करता
है
Unknown
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मैं
रोज़
रात
यही
सोच
कर
तो
सोता
हूँ
कि
कल
से
वक़्त
निकालूँगा
ज़िन्दगी
के
लिए
Swapnil Tiwari
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ज़रा
सा
वक़्त
जो
बदला
तो
हम
पे
हँसने
लगे
हमारे
काँधे
पे
सर
रख
के
रोने
वाले
लोग
Kashif Sayyed
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सोचा
था
हमने
आज
सँवारेंगे
वक़्त
को
अब
हाथ
में
है
ज़ुल्फ़,
तो
फिर
ज़ुल्फ़
ही
सही
Prakhar Kanha
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सदा
ऐश
दौराँ
दिखाता
नहीं
गया
वक़्त
फिर
हाथ
आता
नहीं
Meer Hasan
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जैसे
तुमने
वक़्त
को
हाथ
में
रोका
हो
सच
तो
ये
है
तुम
आँखों
का
धोख़ा
हो
Tehzeeb Hafi
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कुछ
कहने
का
वक़्त
नहीं
ये
कुछ
न
कहो
ख़ामोश
रहो
ऐ
लोगों
ख़ामोश
रहो
हाँ
ऐ
लोगों
ख़ामोश
रहो
Ibn E Insha
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बर्बाद
होना
तो
मुकद्दर
में
नहीं
धोखा
मिला
भी
तज्रबा
के
वास्ते
Shubham Rai 'shubh'
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उस
झरोखे
से
मुझको
इशारा
हुआ
करता
था
जब
मैं
लड़का
बहुत
सीधा-सादा
हुआ
करता
था
एक
लड़की
थी
जो
मुस्कुराते
हुए
दिखती
थी
जब
भी
कक्षा
में
चर्चा
हमारा
हुआ
करता
था
दोस्तों
में
बहुत
मिलता
था
मान
सम्मान
पर
टीचरों
की
नज़र
में
नकारा
हुआ
करता
था
अच्छे
अच्छे
उतर
आए
हैं
अपनी
औक़ात
पर
जिनसे
अपना
कभी
भाई
चारा
हुआ
करता
था
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Shubham Rai 'shubh'
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बे-वफ़ा
से
क्या
वफ़ा
करे
कोई
दिल
लगा
के
जब
दग़ा
करे
कोई
नर्क
से
हरगिज़
नहीं
हसद
होगा
दोस्त
ही
जब
डसा
करे
कोई
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Shubham Rai 'shubh'
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बहुत
ही
कश्मकश
है
यार
जीवन
में
अभी
हूँ
मैं
बहुत
लाचार
जीवन
में
नहीं
होता
ख़ुशी
इतवार
को
भी
अब
नया
मिलता
रहा
किरदार
जीवन
में
मशक्कत
बाद
भी
मिलता
नहीं
शर्बत
घुला
है
बस
अभागा
खार
जीवन
में
अभी
भी
रह
गया
है
ख़्वाब
आँखों
में
कभी
होगा
न
पूरा
सार
जीवन
में
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Shubham Rai 'shubh'
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रुत्बा
नहीं
रहता
बिछड़
कर
आशियाने
से,
दीपक
कहाँ
रौशन
हुआ,
अरमाँ
जलाने
से
Shubham Rai 'shubh'
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