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Shubham Rai 'shubh'
bahut hi kashmakash hai yaar jeevan men
bahut hi kashmakash hai yaar jeevan men | बहुत ही कश्मकश है यार जीवन में
- Shubham Rai 'shubh'
बहुत
ही
कश्मकश
है
यार
जीवन
में
अभी
हूँ
मैं
बहुत
लाचार
जीवन
में
नहीं
होता
ख़ुशी
इतवार
को
भी
अब
नया
मिलता
रहा
किरदार
जीवन
में
मशक्कत
बाद
भी
मिलता
नहीं
शर्बत
घुला
है
बस
अभागा
खार
जीवन
में
अभी
भी
रह
गया
है
ख़्वाब
आँखों
में
कभी
होगा
न
पूरा
सार
जीवन
में
- Shubham Rai 'shubh'
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मेरी
बेचैनी
का
आलम
मेरी
बेचैनी
से
पूछो
मेरे
चहरे
से
पूछोगे
कहेगा
ठीक
है
सब
कुछ
Aqib khan
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उस
की
बेचैनी
बढ़ाना
चाहती
हूँ
सुनिए
कह
कर
चुप
लगाना
चाहती
हूँ
Pooja Bhatia
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शब-ए-इंतिज़ार
की
कश्मकश
में
न
पूछ
कैसे
सहर
हुई
कभी
इक
चराग़
जला
दिया
कभी
इक
चराग़
बुझा
दिया
Majrooh Sultanpuri
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कोई
दीवाना
कहता
है
कोई
पागल
समझता
है
मगर
धरती
की
बेचैनी
को
बस
बादल
समझता
है
Kumar Vishwas
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पलक
का
बाल
गिरे
कब
मैं
कब
तुझे
माँगूँ
मैं
कशमकश
में
ये
पलकें
न
नोच
लूँ
अपनी
Vishnu virat
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भोले
बन
कर
हाल
न
पूछ
बहते
हैं
अश्क
तो
बहने
दो
जिस
से
बढ़े
बेचैनी
दिल
की
ऐसी
तसल्ली
रहने
दो
Arzoo Lakhnavi
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तेरी
अंँगड़ाई
के
आलम
का
ख़याल
आया
जब
ज़ेहन-ए-वीरांँ
में
खनकने
लगे
कंगन
कितने
Shashank Shekhar Pathak
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जाने
कैसी
कश्मकश
है
क्या
करूँँ
जी
में
आता
है
कि
दुनिया
फूँक
दूँ
Ajeetendra Aazi Tamaam
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सब
हो
ये
वक़्त-ए-रुख़्सत
न
हो
हो
मुलाक़ात
आफ़त
न
हो
तुम
तसव्वुर
में
आती
रहो
दिल
लगे
तुम
सेे
नफ़रत
न
हो
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Shubham Rai 'shubh'
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सुनाते
नहीं
थे
सुनाना
पड़ा
है
उसे
दर्द
मुझको
दिखाना
पड़ा
है
मुहब्बत
सफ़र
है
मुसाफ़िर
हैं
हम
भी
सो
दिल
को
ठिकाना
बनाना
पड़ा
है
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Shubham Rai 'shubh'
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इक
कहानी
के
लेखक
रहे
उम्र
भर
इक
कहानी
में
मुझको
भी
मारा
गया
दर्द
भी
बाँटते
हम
किसी
से
मगर
बीच
अपनों
के
सिर
को
उतारा
गया
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Shubham Rai 'shubh'
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तुम
नए
नेता
बने
हो
या
गली
तुम
भूल
आए
हो
फेंकने
को
कौन
सा
जुमला
नया
इस
बार
लाए
हो
Shubham Rai 'shubh'
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हाथ
पकड़
कर
वो
जब
मुझको
अपने
पास
बुलाती
है
मन
पीछे
हो
जाता
है
धड़कन
मेरी
बढ़
जाती
है
कुछ
भी
बोलो
वो
हर
बात
पे
नख़रे
ख़ूब
दिखाती
है
इक
इक
ग़लती
को
मेरे
दिन
रात
मुझे
गिनवाती
है
दूर
रहूँ
जो
मैं
तो
मुझको
करके
फोन
बुलाती
है
पास
रहूँ
तो
नैनन
से
वो
मुझको
ख़ूब
सताती
है
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Shubham Rai 'shubh'
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