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Ajeetendra Aazi Tamaam
jaane kaisi kashmakash hai kya karoon
jaane kaisi kashmakash hai kya karoon | जाने कैसी कश्मकश है क्या करूँँ
- Ajeetendra Aazi Tamaam
जाने
कैसी
कश्मकश
है
क्या
करूँँ
जी
में
आता
है
कि
दुनिया
फूँक
दूँ
- Ajeetendra Aazi Tamaam
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ये
नदी
वर्ना
तो
कब
की
पार
थी
मेरे
रस्ते
में
अना
दीवार
थी
आप
को
क्या
इल्म
है
इस
बात
का
ज़िंदगी
मुश्किल
नहीं
दुश्वार
थी
थीं
कमानें
दुश्मनों
के
हाथ
में
और
मेरे
हाथ
में
तलवार
थी
जल
गए
इक
रोज़
सूरज
से
चराग़
रौशनी
को
रौशनी
दरकार
थी
आज
दुनिया
के
लबों
पर
मुहर
है
कल
तलक
हाँ
साहब-ए-गुफ़्तार
थी
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ARahman Ansari
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इस
दौर
के
मर्दों
की
जो
की
शक्ल-शुमारी
साबित
हुआ
दुनिया
में
ख़्वातीन
बहुत
हैं
Sarfaraz Shahid
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परतव
से
जिस
के
आलम-ए-इम्काँ
बहार
है
वो
नौ-बहार-ए-नाज़
अभी
रहगुज़र
में
है
Ali Sardar Jafri
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चलो
ऐ
हिंद
के
सैनिक
कि
लहराएँ
तिरंगा
हम
जिसे
दुनिया
नमन
करती
है
उस
पर्वत
की
चोटी
पर
ATUL SINGH
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हम
क्या
करें
अगर
न
तिरी
आरज़ू
करें
दुनिया
में
और
भी
कोई
तेरे
सिवा
है
क्या
Hasrat Mohani
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पत्थर
के
इस
जहाँ
में
थी
रोने
लगी
सभा
जब
आदमी
ने
आदमी
को
आदमी
कहा
SHIV SAFAR
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जहाँ
जो
था
वहीं
रहना
था
उस
को
मगर
ये
लोग
हिजरत
कर
रहे
हैं
Liaqat Jafri
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एक
हमें
आवारा
कहना
कोई
बड़ा
इल्ज़ाम
नहीं
दुनिया
वाले
दिल
वालों
को
और
बहुत
कुछ
कहते
हैं
Habib Jalib
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कल
जहाँ
दीवार
थी
है
आज
इक
दर
देखिए
क्या
समाई
थी
भला
दीवाने
के
सर
देखिए
Javed Akhtar
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जहाँ
इंसानियत
वहशत
के
हाथों
ज़ब्ह
होती
हो
जहाँ
तज़लील
है
जीना
वहाँ
बेहतर
है
मर
जाना
Gulzar Dehlvi
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न
करना
कभी
ख़र्च
बेकार
में
बहुत
क़ीमती
है
ये
जान
आदमी
Ajeetendra Aazi Tamaam
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बचपन
से
ख़ुद
पे
दाँव
लगाते
रहे
हैं
हम
सीखी
है
खेल
खेल
में
हमने
शनावरी
Ajeetendra Aazi Tamaam
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भले
हों
ख़ून
के
रिश्ते
या
दुनिया
के
फ़रिश्ते
हों
ग़म-ए-ग़ुर्बत
के
मारों
को
सहारा
कौन
देता
है
Ajeetendra Aazi Tamaam
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तू
आसमाँ
का
हसीं
चाँद
और
मैं
दीवाना
मुझे
तो
सिर्फ़
तेरा
इंतज़ार
करना
है
Ajeetendra Aazi Tamaam
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बनाए
चुनके
जितने
पासबाँ
सब
घरों
को
रोज़
लूटे
जा
रहे
हैं
बहुत
मजबूर
हैं
मालिक
घरों
के
लहू
के
घूँट
पीते
जा
रहे
हैं
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Ajeetendra Aazi Tamaam
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