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Ajeetendra Aazi Tamaam
tu aasmaañ ka haseen chaand aur main deewaana
tu aasmaañ ka haseen chaand aur main deewaana | तू आसमाँ का हसीं चाँद और मैं दीवाना
- Ajeetendra Aazi Tamaam
तू
आसमाँ
का
हसीं
चाँद
और
मैं
दीवाना
मुझे
तो
सिर्फ़
तेरा
इंतज़ार
करना
है
- Ajeetendra Aazi Tamaam
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सभी
के
दीप
सुंदर
हैं
हमारे
क्या
तुम्हारे
क्या
उजाला
हर
तरफ़
है
इस
किनारे
उस
किनारे
क्या
Hafeez Banarasi
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दो
तुंद
हवाओं
पर
बुनियाद
है
तूफ़ाँ
की
या
तुम
न
हसीं
होते
या
में
न
जवाँ
होता
Arzoo Lakhnavi
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तेरा
चेहरा
सुब्ह
का
तारा
लगता
है
सुब्ह
का
तारा
कितना
प्यारा
लगता
है
तुम
से
मिल
कर
इमली
मीठी
लगती
है
तुम
से
बिछड़
कर
शहद
भी
खारा
लगता
है
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Kaif Bhopali
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मुक़र्रर
दिन
नहीं
तो
लम्हा-ए-इमकान
में
आओ
अगर
तुम
मिल
नहीं
सकती
तो
मेरे
ध्यान
में
आओ
बला
की
ख़ूब-सूरत
लग
रही
हो
आज
तो
जानाँ
मुझे
इक
बात
कहनी
थी
तुम्हारे
कान
में..
आओ
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Darpan
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दुख
की
दीमक
अगर
नहीं
लगती
ज़िन्दगी
किस
क़द्र
हसीं
लगती
वस्ल
को
लॉटरी
समझता
हूँ
लॉटरी
रोज़
तो
नहीं
लगती
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Azbar Safeer
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इतनी
जल्दी
न
गिरा
अपने
हसीं
रुख़
पे
नक़ाब
तू
मुझे
ठीक
से
हैरान
तो
हो
लेने
दे
Rajesh Reddy
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उसको
अपने
पास
बिठा
लेने
से
ही
धड़कन
तेज़
और
साँसें
भारी
होती
है
'शाद'
तू
सब
कुछ
बढ़ा
चढ़ा
के
कहता
है
कौन
सी
लड़की
इतनी
प्यारी
होती
है?
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Shaad Imran
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मुझको
ग़ैरों
की
बाँहों
से
भी
प्यारी
हैं
तेरी
यादों
में
जो
रातें
गुज़ारी
हैं
Harsh saxena
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जहाँ
देखो
वहाँ
मौजूद
मेरा
कृष्ण
प्यारा
है
उसी
का
सब
है
जल्वा
जो
जहाँ
में
आश्कारा
है
Bhartendu Harishchandra
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इतना
प्यारा
है
वो
चेहरा
कि
नज़र
पड़ते
ही
लोग
हाथों
की
लकीरों
की
तरफ़
देखते
हैं
Nadir Ariz
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किसने
देखा
है
तेरी
आँखों
में
कौन
कहता
है
जाम
ख़ाली
है
Ajeetendra Aazi Tamaam
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रोज़
हों
गर
हों
ख़ुशी
के
लम्हे
एक
दिन
होने
से
क्या
होते
हैं
Ajeetendra Aazi Tamaam
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ये
कह
कर
रूह
ने
छोड़ा
बदन
इक
किसी
का
बोझ
कोई
क्यूँ
उठाये
Ajeetendra Aazi Tamaam
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चले
हैं
हिंद
के
सैनिक
ज़फ़र
को
कटा
लेंगे
झुकाएँगे
न
सर
को
कि
सूखे
टुंड
पर
लगते
नहीं
फल
गिरा
दो
काट
दो
अब
इस
शजर
को
नहीं
उस्ताद
कोई
उनके
जैसा
जो
समझाए
सुख़न
के
हर
भँवर
को
ग़ज़ल
है
मुंतज़िर
इस्लाह
को
इक
मिलो
गर
तुम
तो
ये
कहना
"समर"
को
दो
रोटी
और
बस
कपड़ा
मकान
इक
नहीं
काफ़ी
ओ
दीवाने
गुज़र
को
तुझे
लड़ना
है
प्रतिपल
ज़िंदगी
से
मिला
नज़रें
डरा
दे
अपने
डर
को
जुदा
होकर
वो
देखो
इक
सफ़र
से
चला
है
दिल
मिरा
फिर
इक
सफ़र
को
मोहब्बत
के
मरीजों
पर
मिरी
जाँ
तरस
आए
हर
इक
दीवार
दर
को
दवाएँ
फेल
होती
जा
रही
हैं
सभी
मिलकर
दु'आ
भेजो
असर
को
मैं
अपनी
ज़िंदगी
में
ऐसा
उलझा
लगी
दीमक
मेरे
दस्त-ए-हुनर
को
तुम्हें
गर
सुर्ख़र-रू
होना
है
यारो
जला
दो
फूँक
दो
दिल
के
नगर
को
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Ajeetendra Aazi Tamaam
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हमने
देखा
है
बिछड़ते
हुए
परछाईं
को
साथ
चलने
का
ज़रा
सोच
के
वा'दा
करना
Ajeetendra Aazi Tamaam
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