chale hain hind ke sainik zafar ko | चले हैं हिंद के सैनिक ज़फ़र को

  - Ajeetendra Aazi Tamaam
चलेहैंहिंदकेसैनिकज़फ़रको
कटालेंगेझुकाएँगेसरको
किसूखेटुंडपरलगतेनहींफल
गिरादोकाटदोअबइसशजरको
नहींउस्तादकोईउनकेजैसा
जोसमझाएसुख़नकेहरभँवरको
ग़ज़लहैमुंतज़िरइस्लाहकोइक
मिलोगरतुमतोयेकहना"समर"को
दोरोटीऔरबसकपड़ामकानइक
नहींकाफ़ीदीवानेगुज़रको
तुझेलड़नाहैप्रतिपलज़िंदगीसे
मिलानज़रेंडरादेअपनेडरको
जुदाहोकरवोदेखोइकसफ़रसे
चलाहैदिलमिराफिरइकसफ़रको
मोहब्बतकेमरीजोंपरमिरीजाँ
तरसआएहरइकदीवारदरको
दवाएँफेलहोतीजारहीहैं
सभीमिलकरदु'आभेजोअसरको
मैंअपनीज़िंदगीमेंऐसाउलझा
लगीदीमकमेरेदस्त-ए-हुनरको
तुम्हेंगरसुर्ख़र-रूहोनाहैयारो
जलादोफूँकदोदिलकेनगरको
  - Ajeetendra Aazi Tamaam
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