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Ajeetendra Aazi Tamaam
hasratein KHvaab aur pareshaani
hasratein KHvaab aur pareshaani | हसरतें ख़्वाब और परेशानी
- Ajeetendra Aazi Tamaam
हसरतें
ख़्वाब
और
परेशानी
ये
सभी
ज़िंदगी
के
पहलू
हैं
- Ajeetendra Aazi Tamaam
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मैं
रोज़
रात
यही
सोच
कर
तो
सोता
हूँ
कि
कल
से
वक़्त
निकालूँगा
ज़िन्दगी
के
लिए
Swapnil Tiwari
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बहुत
हसीन
सही
सोहबतें
गुलों
की
मगर
वो
ज़िंदगी
है
जो
काँटों
के
दरमियाँ
गुज़रे
Jigar Moradabadi
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नहीं
आबो
हवा
में
ताज़गी
अब
दवा
की
सीसियों
में
ज़िन्दगी
है
Umesh Maurya
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ज़िंदगी
में
आई
वो
जैसे
मेरी
तक़दीर
हो
और
उसी
तक़दीर
से
फिर
चोट
खाना
याद
है
Rohit tewatia 'Ishq'
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बहन
ने
बाँध
कर
राखी
बचा
ली
ज़िंदगी
वर्ना
ज़रा
सा
वक़्त
बाक़ी
था
हमारी
नब्ज़
थमने
में
Harsh saxena
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लाई
है
किस
मक़ाम
पे
ये
ज़िंदगी
मुझे
महसूस
हो
रही
है
ख़ुद
अपनी
कमी
मुझे
Ali Ahmad Jalili
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ज़िंदगी
तुझ
से
भी
क्या
ख़ूब
त'अल्लुक़
है
मिरा
जैसे
सूखे
हुए
पत्ते
से
हवा
का
रिश्ता
Khalish Akbarabadi
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तुम
भी
साबित
हुए
कमज़ोर
मुनव्वर
राना
ज़िन्दगी
माँगी
भी
तुमने
तो
दवा
से
माँगी
Munawwar Rana
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तूने
देखी
है
वो
पेशानी
वो
रुख़्सार
वो
होंठ
ज़िंदगी
जिनके
तसव्वुर
में
लुटा
दी
हमने
तुझपे
उठी
हैं
वो
खोई
हुई
साहिर
आँखें
तुझको
मालूम
है
क्यूँ
उम्र
गंवा
दी
हमने
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Faiz Ahmad Faiz
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मुझे
ख़बर
नहीं
ग़म
क्या
है
और
ख़ुशी
क्या
है
ये
ज़िंदगी
की
है
सूरत
तो
ज़िंदगी
क्या
है
Ahsan Marahravi
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है
बस
इतनी
सी
इल्तिजा
मौला
तीरगी
से
रिहा
ये
जीवन
कर
आज
त्यौहार
रौशनी
का
है
घर
में
सब
के
चराग़
रौशन
कर
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Ajeetendra Aazi Tamaam
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वफ़ा
करना
हमें
खलता
रहा
है
मुहब्बत
में
ये
दिल
जलता
रहा
है
ग़मों
की
आँधियाँ
सहते
रहे
हैं
ज़फ़ा
का
सिलसिला
चलता
रहा
है
ख़ता
करना
हमें
मंज़ूर
कब
था
ख़ता-वारों
को
ये
खलता
रहा
है
निकल
आए
हर
इक
जंजाल
से
हम
ज़माना
हाथ
को
मलता
रहा
है
हुई
जिस
पर
बुज़ुर्गों
की
इनायत
हक़ीक़ी
राह
पर
चलता
रहा
है
घटा
कर
साँसें
देता
है
नया
दिन
समय
हर
शख़्स
को
छलता
रहा
है
तराशो
ज़ेहन
को
दिन
रात
अपने
बदन
का
हुस्न
तो
ढलता
रहा
है
उसे
पाने
की
कोशिश
में
लगे
हैं
जिगर
में
ख़्वाब
जो
पलता
रहा
है
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Ajeetendra Aazi Tamaam
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वो
जो
दर्द
ए
दिल
का
सुकून
था
वो
ही
चारा-गर
न
मिला
हमें
न
तो
ग़म
है
अब
न
मलाल
है
न
ख़फ़ा
है
दिल
न
गिला
हमें
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Ajeetendra Aazi Tamaam
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इक
भी
ख़त
का
नहीं
जबाब
आया
एक
तरफ़ा
है
इश्क़
क्या
मेरा
Ajeetendra Aazi Tamaam
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हमको
हुआ
है
इश्क़
कई
मर्तबा
हुआ
बस
एक
शख़्स
से
हुआ
जितनी
दफ़ा
हुआ
Ajeetendra Aazi Tamaam
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