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Shubham Rai 'shubh'
us jharokhe se mujhko ishaara hua karta tha
us jharokhe se mujhko ishaara hua karta tha | उस झरोखे से मुझको इशारा हुआ करता था
- Shubham Rai 'shubh'
उस
झरोखे
से
मुझको
इशारा
हुआ
करता
था
जब
मैं
लड़का
बहुत
सीधा-सादा
हुआ
करता
था
एक
लड़की
थी
जो
मुस्कुराते
हुए
दिखती
थी
जब
भी
कक्षा
में
चर्चा
हमारा
हुआ
करता
था
दोस्तों
में
बहुत
मिलता
था
मान
सम्मान
पर
टीचरों
की
नज़र
में
नकारा
हुआ
करता
था
अच्छे
अच्छे
उतर
आए
हैं
अपनी
औक़ात
पर
जिनसे
अपना
कभी
भाई
चारा
हुआ
करता
था
- Shubham Rai 'shubh'
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इतना
धीरे-धीरे
रिश्ता
ख़त्म
हुआ
बहुत
दिनों
तक
लगा
नहीं
हम
बिछड़े
हैं
Ajmal Siddiqui
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अजीब
दर्द
का
रिश्ता
था
सब
के
सब
रोए
शजर
गिरा
तो
परिंदे
तमाम
शब
रोए
Tariq Naeem
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मिरी
तरफ़
से
तो
टूटा
नहीं
कोई
रिश्ता
किसी
ने
तोड़
दिया
ए'तिबार
टूट
गया
Akhtar Nazmi
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जीत
भी
लूँ
गर
लड़ाई
तुम
से
मैं
तो
क्या
मिलेगा
हाथ
में
दोनों
के
बस
इक
टूटा
सा
रिश्ता
मिलेगा
कर
के
लाखों
कोशिशें
गर
जो
बचा
भी
लूँ
मैं
रिश्ता
तो
नहीं
फिर
मन
हमारा
पहले
के
जैसा
मिलेगा
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Ankit Maurya
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निभाया
जिस
सेे
भी
रिश्ता
तो
फिर
हद
में
रहे
हैं
हम
किसी
के
मखमली
तकिए
के
ऊपर
सर
नहीं
रक्खा
Nirbhay Nishchhal
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मेरे
दर्द
की
वो
दवा
है
मगर
मेरा
उस
सेे
कोई
भी
रिश्ता
नहीं
मुसलसल
मिलाता
है
मुझ
सेे
नज़र
मैं
कैसे
कहूँ
वो
फ़रिश्ता
नहीं
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S M Afzal Imam
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लो
आज
हमने
तोड़
दिया
रिश्ता-ए-उम्मीद
लो
अब
कभी
गिला
न
करेंगे
किसी
से
हम
Sahir Ludhianvi
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खाक
हो
जाएँगे
हम
खाक
में
मिल
कर
तेरी
तुझ
सेे
रिश्ता
न
कभी
अरज़े
वतन
टूटेगा
Hashim Raza Jalalpuri
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प्यार
का
रिश्ता
ऐसा
रिश्ता
शबनम
भी
चिंगारी
भी
यानी
उन
सेे
रोज़
ही
झगड़ा
और
उन्हीं
से
यारी
भी
Ateeq Allahabadi
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नया
इक
रिश्ता
पैदा
क्यूँँ
करें
हम
?
बिछड़ना
है
तो
झगड़ा
क्यूँँ
करें
हम?
Jaun Elia
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छुपने
वाले
तू
मुलाक़ात
क्यूँँ
नहीं
करता
इश्क़
है
उस
सेे
तो
फिर
बात
क्यूँँ
नहीं
करता
Shubham Rai 'shubh'
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किसी
हद
से
गुज़रना
चाहता
हूँ
तुम्हें
छू
कर
बिखरना
चाहता
हूँ
किसी
दिन
पर्दे
से
मुझको
निहारो
मैं
अब
सजना
सँवरना
चाहता
हूँ
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Shubham Rai 'shubh'
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मुँह
फेर
कर
के
जा
रहे
कुछ
बात
है
क्या
जानी
बहुत
शरमा
रहे
कुछ
बात
है
क्या
जो
लोग
तुम
सेे
दूर
रहते
थे
कभी
अब
वो
दोस्ती
समझा
रहे
कुछ
बात
है
क्या
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Shubham Rai 'shubh'
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ऐसे
कुछ
मस्ताने
निकले
फ़िक्री
को
झुठलाने
निकले
मन-मौजी
हो
भौंरा
देखो
फूलों
को
बहलाने
निकले
दिल
की
मिट्टी
खोदा
जब
तो
वापस
ज़ख़्म
पुराने
निकले
पहले
आग
लगायी
सबने
फिर
सब
आग
बुझाने
निकले
ख़ूब
बनाया
रिश्ता
हमने
वक़्त
पे
सब
बेगाने
निकले
क्या
पाया
क्या
खोया
सोचा
कितने
लोग
सयाने
निकले
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Shubham Rai 'shubh'
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सवाल
क्या
है
जवाब
क्या
है
खुले
न
आँखें
तो
ख़्वाब
क्या
है
ज़बाँ
सही
है
अगर
तुम्हारी
तू
ही
बता
फिर
ख़राब
क्या
है
मिटेंगे
हम
तो
मिटोगे
तुम
भी
या
पूछ
राह-ए-सवाब
क्या
है
सफ़र
में
जिनके
भरे
हों
काँटें
जा
पूछ
उन
सेे
गुलाब
क्या
है
मिले
जो
इज़्ज़त
बिना
ख़रीदे
तो
इस
सेे
ज़्यादा
निसाब
क्या
है
रहे
सलामत
जो
दोस्ताना
बड़ा
जहाँ
में
ख़िताब
क्या
है
रहे
ये
जीवन
जो
निष्कलंकित
तो
इस
सेे
बढ़िया
किताब
क्या
है
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