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Shubham Rai 'shubh'
barbaad hona to muqaddar men nahin
barbaad hona to muqaddar men nahin | बर्बाद होना तो मुकद्दर में नहीं
- Shubham Rai 'shubh'
बर्बाद
होना
तो
मुकद्दर
में
नहीं
धोखा
मिला
भी
तज्रबा
के
वास्ते
- Shubham Rai 'shubh'
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सितारे
कुछ
बताते
हैं
नतीजा
कुछ
निकलता
है
बड़ी
हैरत
में
हैं
मेरा
मुक़द्दर
देखने
वाले
Madan Mohan Danish
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अलमास
धरे
रह
जाते
हैं
बिकता
है
तो
पत्थर
बिकता
है
अजनास
नहीं
इस
दुनिया
में
इंसाँ
का
मुक़द्दर
बिकता
है
'खालिद
सज्जाद'
सुनार
हूँ
मैं
इस
ग़म
को
ख़ूब
समझता
हूँ
जब
बेटा
छुप
कर
रोता
है
तब
माँ
का
ज़ेवर
बिकता
है
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Khalid Sajjad
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ख़ुदी
को
कर
बुलंद
इतना
कि
हर
तक़दीर
से
पहले
ख़ुदा
बंदे
से
ख़ुद
पूछे
बता
तेरी
रज़ा
क्या
है
Allama Iqbal
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कभी
पत्थर
मुक़द्दर
लिख
नहीं
सकता
मगर
समझो
जिसे
पत्थर
में
ढूँढो
हो
तुम्हारे
पास
ही
तो
है
Tanha
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इतने
कहाँ
नसीब
कि
इस
सेे
प्यास
बुझाएँ
खेल
करें
दरिया
हम
जैसों
को
अपने
पास
बिठा
ले
काफ़ी
है
Vashu Pandey
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हर
घड़ी
ख़ुद
से
उलझना
है
मुक़द्दर
मेरा
मैं
ही
कश्ती
हूँ
मुझी
में
है
समुंदर
मेरा
Nida Fazli
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किताब-ए-मुक़द्दर
में
रांझा
दिवाना
मगर
हीर
बेहद
सयानी
लिखी
थी
Amaan Pathan
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सितारे
और
क़िस्मत
देख
कर
घर
से
निकलते
हैं
जो
बुज़दिल
हैं
मुहूरत
देखकर
घर
से
निकलते
हैं
हमें
लेकिन
सफ़र
की
मुश्किलों
से
डर
नहीं
लगता
कि
हम
बच्चों
की
सूरत
देखकर
घर
से
निकलते
हैं
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Abrar Kashif
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मिलने
की
तरह
मुझ
सेे
वो
पल
भर
नहीं
मिलता
दिल
उस
से
मिला
जिस
सेे
मुक़द्दर
नहीं
मिलता
Naseer Turabi
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पलटा
दे
तक़दीर
हमारी
आकर
माथा
चूम
हमारा
Siddharth Saaz
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छुप
के
दीदार
बहुत
करता
है
मुझको
बेज़ार
बहुत
करता
है
प्यार
वो
रात-गए
करता
है
दिन
में
तकरार
बहुत
करता
है
काम
करता
है
सभी
मेरा
पर
पहले
इनकार
बहुत
करता
है
मेरे
झुमके
के
लिए
वो
घर
को
ख़ास-बाज़ार
बहुत
करता
है
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Shubham Rai 'shubh'
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जिसका
था
इंतिज़ार
वो
गाड़ी
निकल
गई
पानी
समझ
के
जो
पिया
ताड़ी
निकल
गई
महबूब
को
मियाँ
कल
अनाड़ी
जो
समझा
था
मुझ
सेे
बिछड़ते
ही
वो
खिलाड़ी
निकल
गई
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Shubham Rai 'shubh'
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सुनाते
नहीं
थे
सुनाना
पड़ा
है
उसे
दर्द
मुझको
दिखाना
पड़ा
है
मुहब्बत
सफ़र
है
मुसाफ़िर
हैं
हम
भी
सो
दिल
को
ठिकाना
बनाना
पड़ा
है
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Shubham Rai 'shubh'
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मिले
बे-सहारा
इनायत
करेंगे
कि
जब
तक
जिएँगे
मोहब्बत
करेंगे
नज़र
चाहे
जैसी
लगी
हो
तुम्हारे
नज़र
की
नज़र
से
शिकायत
करेंगे
ग़लत
राह
मुझ
को
बताया
था
जिसने
उसी
शख़्स
को
हम
हिदायत
करेंगे
कि
लहजा
हमारा
अगर
ठीक
होगा
सभी
के
दिलों
में
हुकूमत
करेंगे
दग़ाबाज़
नज़दीक
बैठें
हमारे
कि
कब
तक
हमीं
ये
शराफ़त
करेंगे
गिरेबान
अपना
निहारा
करो
तुम
कि
कब
तक
किसी
से
अदावत
करेंगे
लिए
जो
मोहब्बत
चली
आ
रही
तुम
बुरा
जो
हुआ
तो
बग़ावत
करेंगे
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Shubham Rai 'shubh'
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सिर
झुकाऊँगा
सबको
भरोसा
न
था
देखकर
मैं
तुझे
ख़ुद-ब-ख़ुद
झुक
गया
Shubham Rai 'shubh'
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