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Shubham Rai 'shubh'
awaaz ik apne ravish par aa gaya
awaaz ik apne ravish par aa gaya | आवाज़ इक अपने रविश पर आ गया
- Shubham Rai 'shubh'
आवाज़
इक
अपने
रविश
पर
आ
गया
सरकार
को
भी
यार
चक्कर
आ
गया
बिकने
लगी
ईमानदारी
शख़्स
की
हिस्से
मिरे
आँसू
तिरे
ज़र
आ
गया
- Shubham Rai 'shubh'
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के
'हैलो'
सुनते
ही
कट
कर
दिया
है
उसने
मेरा
फ़ोन
ख़ुदा
का
शुक्र
है
आवाज़
तो
पहचानता
है
वो
Zubair Ali Tabish
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मिरी
ख़ामोशियों
की
झील
में
फिर
किसी
आवाज़
का
पत्थर
गिरा
है
Aadil Raza Mansoori
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एक
आवाज़
कि
जो
मुझको
बचा
लेती
है
ज़िन्दगी
आख़री
लम्हों
में
मना
लेती
है
जिस
पे
मरती
हो
उसे
मुड़
के
नहीं
देखती
वो
और
जिसे
मारना
हो
यार
बना
लेती
है
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Ali Zaryoun
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तेरी
आवाज़
मेरा
रिज़्क
हुआ
करती
थी
तू
मुझे
भूख
से
मारेगा
ये
सोचा
नहीं
था
Rafi Raza
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जब
उसने
पलट
कर
नहीं
देखा
तो
ये
जाना
आवाज़
लगाने
में
भी
नुक़सान
बहुत
है
Imtiyaz Khan
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वैसे
तो
उसका
नाम
नहीं
हाफ़िज़े
में
अब
मुमकिन
है
रूबरू
जो
कभी
हो,
पुकार
दूँ
Bhaskar Shukla
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रोक
सकता
हमें
ज़िंदान-ए-बला
क्या
'मजरूह'
हम
तो
आवाज़
हैं
दीवार
से
छन
जाते
हैं
Majrooh Sultanpuri
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पहले
कहता
है
जुनूँ
उसका
गिरेबान
पकड़
फिर
मेरा
दिल
मुझे
कहता
है
इधर
कान
पकड़
ऐसी
वहशत
भी
न
हो
घर
के
दरो
बाम
कहें
कोई
आवाज़
ही
ले
आ
कोई
मेहमान
पकड़
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Azbar Safeer
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अपना
हर
तिनका
समेटे
किस
जगह
पर
जा
छुपे
हम
तिरी
आवाज़
की
चिड़ियों
से
घबराते
हुए
Swapnil Tiwari
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मेरी
ख़ामोशियों
में
लर्ज़ां
है
मेरे
नालों
की
गुम-शुदा
आवाज़
Faiz Ahmad Faiz
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ज़िंदगी
गुज़र
रही
है
धीरे
धीरे
एक
वक़्त
है
हमारा
जो
ठहरा
है
Shubham Rai 'shubh'
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दर्द
ले
आप
के
पास
से
आ
गए
हाँ
मुलाक़ात
कर
ख़ास
से
आ
गए
और
बोतल
उठाया
गला
तर
करूँँ
जाम
के
बाद
रख
प्यास
भी
आ
गए
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Shubham Rai 'shubh'
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दिल
लगाओ
अबकी
तुम,
हिजरत
करेंगे
हम
फिर
बताना
दर्द
मीठा
है
कि
कड़वा
है
Shubham Rai 'shubh'
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नसीब
लिखने
वालें
ने
क्या
कमाल
लिखा
है
ज़मीर
पे
मेरे
धब्बा
उसे
रुमाल
लिखा
है
मुरीद
हूँ
मैं
शिक्षा
का
मज़ीद
ज्ञान
नहीं
है
जवाब
मुश्किल
हो
ऐसा
उसे
सवाल
लिखा
है
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Shubham Rai 'shubh'
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साथ
क्या
हम
चले
कुछ
क़दम
दोस्त
लगने
लगे
सारे
ग़म
बात
चलने
लगी
आपकी
हँसते
हँसते
लगे
रोने
हम
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Shubham Rai 'shubh'
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