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Shubham Rai 'shubh'
dil lagao abki tum hijrat karenge ham
dil lagao abki tum hijrat karenge ham | दिल लगाओ अबकी तुम, हिजरत करेंगे हम
- Shubham Rai 'shubh'
दिल
लगाओ
अबकी
तुम,
हिजरत
करेंगे
हम
फिर
बताना
दर्द
मीठा
है
कि
कड़वा
है
- Shubham Rai 'shubh'
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हमारे
दरमियाँ
जो
प्यार
से
पहले
की
यारी
थी
बिछड़
कर
अब
ये
लगता
है
वो
यारी
ज़्यादा
प्यारी
थी
बिछड़ना
उसकी
मर्ज़ी
थी,
उसे
उतरन
न
कहना
तुम
वो
अब
उतनी
ही
उसकी
है
वो
तब
जितनी
तुम्हारी
थी
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Alankrat Srivastava
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हिज्र
की
रातें
इतनी
भारी
होती
हैं
जैसे
छाती
पर
ऐरावत
बैठा
हो
Tanoj Dadhich
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मेहरबाँ
हम
पे
हर
इक
रात
हुआ
करती
थी
आँख
लगते
ही
मुलाक़ात
हुआ
करती
थी
हिज्र
की
रात
है
और
आँख
में
आँसू
भी
नहीं
ऐसे
मौसम
में
तो
बरसात
हुआ
करती
थी
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Ismail Raaz
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उस
हिज्र
पे
तोहमत
कि
जिसे
वस्ल
की
ज़िद
हो
उस
दर्द
पे
ला'नत
की
जो
अशआ'र
में
आ
जाए
Vipul Kumar
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सरकार
कहने
लग
गया
वो
सीधे
नाम
से
जो
हम-क़लाम
कम
था
मेरे
पहले
नाम
से
मुझ
सेे
बिछड़
के
अपना
कोई
नाम
रख
लियो
सब
लोग
जानते
हैं
तुझे
मेरे
नाम
से
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Rishabh Sharma
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तुम
सेे
बिछड़
के
हम
को
यही
लग
रहा
है
अब
जैसे
मिटा
दिया
है
ख़ुदा
ने
लिखा
हुआ
Siddharth Saaz
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अब
यही
सोचते
रहते
हैं
बिछड़
कर
तुझ
से
शायद
ऐसे
नहीं
होता
अगर
ऐसा
करते
Asim Wasti
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दिल
को
तेरी
चाहत
पे
भरोसा
भी
बहुत
है
और
तुझ
से
बिछड़
जाने
का
डर
भी
नहीं
जाता
Ahmad Faraz
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नाप
रहा
था
एक
उदासी
की
गहराई
हाथ
पकड़कर
वापस
लायी
है
तन्हाई
वस्ल
दिनों
को
काफ़ी
छोटा
कर
देता
है
हिज्र
बढ़ा
देता
है
रातों
की
लम्बाई
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Tanoj Dadhich
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बचा
के
आँख
बिछड़
जाएँ
उस
से
चुपके
से
अभी
तो
अपनी
तरफ़
ध्यान
भी
ज़ियादा
नहीं
Vipul Kumar
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डरावनी
है
जो
तुझ
को
तिरी
क़ज़ा
ही
न
हो
न
भाग
इतना
कि
अंजाम
का
पता
ही
न
हो
दिखावे
की
होड़
में
क्या
मिले
नहीं
आप
से
दिखा
रहे
जैसे
कुछ
भी
अता
पता
ही
न
हो
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Shubham Rai 'shubh'
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पुकारो
न
तुम
आने
वाला
नहीं
हूँ
किसी
को
दिशा
मैं
दिखाता
नहीं
हूँ
ख़ुदा
पर
भरोसा
बहुत
है
मगर
बस
मुक़द्दर
भरोसे
भी
बैठा
नहीं
हूँ
चलेगी
क़लम
चाहे
सर
हो
क़लम
पर
कभी
झूठ
के
दर
पे
ठहरा
नहीं
हूँ
सताने
लगे
जब
ज़माने
के
सच्चे
उसी
दिन
समझना
अकेला
नहीं
हूँ
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Shubham Rai 'shubh'
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मिले
बे-सहारा
इनायत
करेंगे
कि
जब
तक
जिएँगे
मोहब्बत
करेंगे
नज़र
चाहे
जैसी
लगी
हो
तुम्हारे
नज़र
की
नज़र
से
शिकायत
करेंगे
ग़लत
राह
मुझ
को
बताया
था
जिसने
उसी
शख़्स
को
हम
हिदायत
करेंगे
कि
लहजा
हमारा
अगर
ठीक
होगा
सभी
के
दिलों
में
हुकूमत
करेंगे
दग़ाबाज़
नज़दीक
बैठें
हमारे
कि
कब
तक
हमीं
ये
शराफ़त
करेंगे
गिरेबान
अपना
निहारा
करो
तुम
कि
कब
तक
किसी
से
अदावत
करेंगे
लिए
जो
मोहब्बत
चली
आ
रही
तुम
बुरा
जो
हुआ
तो
बग़ावत
करेंगे
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Shubham Rai 'shubh'
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इसी
साल
जैसा
नया
साल
होगा
मगर
हाल
अपना
तो
बेहाल
होगा
कमाता
बहुत
है
मेरा
दोस्त
लेक़िन
जो
पूछोगे
तुम
तो
बुरा
हाल
होगा
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Shubham Rai 'shubh'
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डाली
है
कल
नज़रें
उसने
उस
ज़मीं
पर
जिसपे
उसका
मालिकाना
हक़
नहीं
है
Shubham Rai 'shubh'
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