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Shubham Rai 'shubh'
dosti se dushmani tak
dosti se dushmani tak | दोस्ती से दुश्मनी तक
- Shubham Rai 'shubh'
दोस्ती
से
दुश्मनी
तक
यानी
ख़ूबी
से
कमी
तक
भाव
अच्छा
चाहता
है
जानवर
से
आदमी
तक
- Shubham Rai 'shubh'
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जुदा
किसी
से
किसी
का
ग़रज़
हबीब
न
हो
ये
दाग़
वो
है
कि
दुश्मन
को
भी
नसीब
न
हो
Nazeer Akbarabadi
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शिकस्ता
नाव
समझ
कर
डुबोने
वाले
लोग
न
पा
सके
मुझे
साहिल
पे
खोने
वाले
लोग
ज़रा
सा
वक़्त
जो
बदला
तो
हम
पे
हँसने
लगे
हमारे
काँधे
पे
सर
रख
के
रोने
वाले
लोग
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Kashif Sayyed
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चार
दिन
झूठी
बाहों
के
आराम
से
मेरी
बिखरी
हुई
ज़िंदगी
ठीक
है
दोस्ती
चाहे
जितनी
बुरी
हो
मगर
प्यार
के
नाम
पर
दुश्मनी
ठीक
है
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SHIV SAFAR
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मेरी
ही
जान
के
दुश्मन
हैं
नसीहत
वाले
मुझ
को
समझाते
हैं
उन
को
नहीं
समझाते
हैं
Lala Madhav Ram Jauhar
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आप
बच्चों
का
दिल
नहीं
तोड़ें
भाई
ये
दुश्मनी
हमारी
है
Vishnu virat
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ये
भी
इक
तरकीब
है
दुश्मन
से
लड़ने
की
गले
लगा
लो
जिस
पर
वार
नहीं
कर
सकते
Shariq Kaifi
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उम्र
भर
कौन
निभाता
है
त'अल्लुक़
इतना
ऐ
मेरी
जान
के
दुश्मन
तुझे
अल्लाह
रक्खे
Ahmad Faraz
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याद
आई
जब
मुझे
'फ़रहत'
से
छोटी
थी
बहन
मेरे
दुश्मन
की
बहन
ने
मुझ
को
राखी
बाँध
दी
Ehsan Saqib
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ज़रा
मौसम
तो
बदला
है
मगर
पेड़ों
की
शाख़ों
पर
नए
पत्तों
के
आने
में
अभी
कुछ
दिन
लगेंगे
बहुत
से
ज़र्द
चेहरों
पर
ग़ुबार-ए-ग़म
है
कम
बे-शक
पर
उन
को
मुस्कुराने
में
अभी
कुछ
दिन
लगेंगे
Javed Akhtar
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इन
दिनों
दोस्त
मेरे
सारे
ही
रूठे
हुए
हैं
मेरे
दुश्मन
यही
मौक़ा
है
हरा
दे
मुझ
को
Afzal Ali Afzal
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मुश्किल
घड़ी
में
साथ
मिलना
चाहिए
हो
बैर
फिर
भी
हाथ
मिलना
चाहिए
Shubham Rai 'shubh'
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पैरों
में
लर्जिश
हार
का
संदेशा
है
हिम्मत
सफ़लता
की
अकेली
साथी
है
Shubham Rai 'shubh'
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दिल
लगाओ
अबकी
तुम,
हिजरत
करेंगे
हम
फिर
बताना
दर्द
मीठा
है
कि
कड़वा
है
Shubham Rai 'shubh'
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रुत्बा
नहीं
रहता
बिछड़
कर
आशियाने
से,
दीपक
कहाँ
रौशन
हुआ,
अरमाँ
जलाने
से
Shubham Rai 'shubh'
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क़बीले
के
अपने
वफ़ादार
तुम
हो
हो
जनता
की
हामी
या
इनकार
तुम
हो
हक़ीक़त
क़लम
से
निकलती
नहीं
है
ख़रीदा
हुआ
जैसे
अख़बार
तुम
हो
दिखाओगे
तुम
तो
धमक
रंगदारी
है
नेता
सभी
गुंडे
सरकार
तुम
हो
दिखाकर
के
सपने
जो
काटी
हैं
ज़ेबें
गरीबों
के
कैसे
मददगार
तुम
हो
ग़नीमत
है
हम
बोल
देते
हैं
वर्ना
भगत
सब
तुम्हारे
निराकार
तुम
हो
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Shubham Rai 'shubh'
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