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Shubham Rai 'shubh'
mushkil ghadi men saath milnaa chahiye
mushkil ghadi men saath milnaa chahiye | मुश्किल घड़ी में साथ मिलना चाहिए
- Shubham Rai 'shubh'
मुश्किल
घड़ी
में
साथ
मिलना
चाहिए
हो
बैर
फिर
भी
हाथ
मिलना
चाहिए
- Shubham Rai 'shubh'
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दूर
रहें
तो
याद
बहुत
आती
सब
की
साथ
रहें
तो
घर
में
झगड़े
होते
हैं
Tanoj Dadhich
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टेंशन
से
मरेगा
न
कोरोने
से
मरेगा
इक
शख़्स
तेरे
साथ
न
होने
से
मरेगा
Idris Babar
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अब
साथ
नहीं
है
भी
तो
शिकवा
नहीं
'अख़्तर'
एहसान
भी
मुझ
पर
मिरे
भाई
के
बहुत
थे
Majeed Akhtar
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सिर्फ़
तस्वीर
रह
गई
बाक़ी
जिस
में
हम
एक
साथ
बैठे
हैं
Ataul Hasan
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सफ़र
हालाँकि
तेरे
साथ
अच्छा
चल
रहा
है
बराबर
से
मगर
एक
और
रास्ता
चल
रहा
है
Shariq Kaifi
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गर
डूबना
ही
अपना
मुक़द्दर
है
तो
सुनो
डूबेंगे
हम
ज़रूर
मगर
नाख़ुदा
के
साथ
Kaifi Azmi
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जता
दिया
कि
मोहब्बत
में
ग़म
भी
होते
हैं
दिया
गुलाब
तो
काँटे
भी
थे
गुलाब
के
साथ
Rehman Faris
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बंदा
किसी
के
साथ,
ख़ुदा
हो
किसी
के
साथ
जाने
पराए
शहर
में
क्या
हो
किसी
के
साथ
Mueed Mirza
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दर्द-ए-मुहब्बत
दर्द-ए-जुदाई
दोनों
को
इक
साथ
मिला
तू
भी
तन्हा
मैं
भी
तन्हा
आ
इस
बात
पे
हाथ
मिला
Abrar Kashif
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सँभलता
हूँ
तो
ये
लगता
है
जैसे
तुम्हारे
साथ
धोखा
कर
रहा
हूँ
Shariq Kaifi
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ख़ुद
से
हो
बे-ख़बर
दर
दर
भटकते
हैं
ऐसे
फ़कीर
हम
जो
घर
भटकते
हैं
ख़ुद
से
मिला
करो
कोई
बहाने
से
ख़ुद-आगही
के
कारण
डर
भटकते
हैं
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Shubham Rai 'shubh'
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क़बीले
के
अपने
वफ़ादार
तुम
हो
हो
जनता
की
हामी
या
इनकार
तुम
हो
हक़ीक़त
क़लम
से
निकलती
नहीं
है
ख़रीदा
हुआ
जैसे
अख़बार
तुम
हो
दिखाओगे
तुम
तो
धमक
रंगदारी
है
नेता
सभी
गुंडे
सरकार
तुम
हो
दिखाकर
के
सपने
जो
काटी
हैं
ज़ेबें
गरीबों
के
कैसे
मददगार
तुम
हो
ग़नीमत
है
हम
बोल
देते
हैं
वर्ना
भगत
सब
तुम्हारे
निराकार
तुम
हो
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Shubham Rai 'shubh'
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कहानी
अपनी
जो
इक
मसख़रा
सुनाने
लगा
कि
बैठे
लोगों
के
आँखों
में
आँसू
आने
लगा
Shubham Rai 'shubh'
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आँखों
में
तू
सैलाब
आने
दे
आज
उस
प्रेयसी
को
भी
भुलाने
दे
आज
सब
सेे
तबीअत
से
मिलूँगा
ऐ
दोस्त
थोड़ी
ख़ुशी
उनको
मनाने
दे
आज
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Shubham Rai 'shubh'
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हिज्र
के
दर्द
की
अब
वो
बात
करता
कहाँ
है
दर्द
बे-रोज़गारी
का
झेल
जो
भी
रहा
है
Shubham Rai 'shubh'
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