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Shubham Rai 'shubh'
dekho hai kitnii khoobsurat shaam ki chaalaakiyaan
dekho hai kitnii khoobsurat shaam ki chaalaakiyaan | देखो है कितनी ख़ूब-सूरत शाम की चालाकियाँ
- Shubham Rai 'shubh'
देखो
है
कितनी
ख़ूब-सूरत
शाम
की
चालाकियाँ
मैं
चाहता
हूँ
साथ
तेरा,
और
उड़ती
तितलियाँ
- Shubham Rai 'shubh'
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ये
शाम
ख़ुशबू
पहन
के
तेरी
ढली
है
मुझ
में
जो
रेज़ा
रेज़ा
मैं
क़तरा
क़तरा
पिघल
रही
हूँ
ख़मोश
शब
के
समुंदरों
में
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Kiran K
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'मीर'
से
बैअत
की
है
तो
'इंशा'
मीर
की
बैअत
भी
है
ज़रूर
शाम
को
रो
रो
सुब्ह
करो
अब
सुब्ह
को
रो
रो
शाम
करो
Ibn E Insha
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शाम
भी
थी
धुआँ
धुआँ
हुस्न
भी
था
उदास
उदास
दिल
को
कई
कहानियाँ
याद
सी
आ
के
रह
गईं
Firaq Gorakhpuri
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फिर
आज
'अदम'
शाम
से
ग़मगीं
है
तबीअत
फिर
आज
सर-ए-शाम
मैं
कुछ
सोच
रहा
हूँ
Abdul Hamid Adam
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नई
सुब्ह
पर
नज़र
है
मगर
आह
ये
भी
डर
है
ये
सहर
भी
रफ़्ता
रफ़्ता
कहीं
शाम
तक
न
पहुँचे
Shakeel Badayuni
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कोई
इशारा
दिलासा
न
कोई
वा'दा
मगर
जब
आई
शाम
तिरा
इंतिज़ार
करने
लगे
Waseem Barelvi
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दिल
आज
शाम
से
ही
उसे
ढूँडने
लगा
कल
जिस
के
बा'द
कमरे
में
तन्हाई
आई
थी
Ammar Iqbal
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शाम
थी
हिज्र
की
हाल
मत
पूछना
आँख
थकने
लगे
तो
जिगर
रो
पड़े
Piyush Mishra 'Aab'
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कभी
तो
नस्ल-ओ-वतन-परस्ती
की
तीरगी
को
शिकस्त
होगी
कभी
तो
शाम-ए-अलम
मिटेगी
कभी
तो
सुब्ह-ए-ख़ुशी
मिलेगी
Abul mujahid zaid
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देख
कर
इंसान
की
बेचारगी
शाम
से
पहले
परिंदे
सो
गए
Iffat Zarrin
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चाहे
जितनी
राह
में
आ
जाए
मुश्किल,
ख़्वाब
को
मेरे
मुक्कमल
तो
करूँँगा
Shubham Rai 'shubh'
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जीतते
ही
तुम
कहीं
अच्छा
सा
कोई
घर
बनाओगे
काम
करने
की
जगह
तुम
घूम
कर
छुट्टी
मनाओगे
Shubham Rai 'shubh'
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आदमी
की
नस्ल
को
हम
दूर
से
पहचानते
हैं
हाथ
किस
का
है
कहाँ
पे
यार
हम
सब
जानते
हैं
Shubham Rai 'shubh'
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ख़ुदा
का
घर
अगर
कोई
नहीं
है
दिखा
मुझको
कि
डर
कोई
नहीं
है
उड़ी
दरगाह
की
चादर
हवा
में
बता
मौला
का
दर
कोई
नहीं
है
सभी
भगवान
जब
इंसान
में
हैं
तो
क्या
आदर्श
नर
कोई
नहीं
है
सिखाते
हैं
ग़ज़ल
कहना
वो
हमको
अभी
जिनको
हुनर
कोई
नहीं
है
धरा
पर
मोक्ष
है
अपना
बनारस
बनारस
सा
नगर
कोई
नहीं
है
बहुत
सारे
मकाँ
परदेस
में
हैं
मगर
घर
सा
शजर
कोई
नहीं
है
नवाज़िश
आपकी
है
सामने
हूँ
इधर
इल्म-ओ-हुनर
कोई
नहीं
है
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Shubham Rai 'shubh'
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ख़ूब
प्यारा
किनारा
हो
सकता
है
एक
तिनका
सहारा
हो
सकता
है
आज
ईमान
का
माने
वा'दा
है
क़ौल
उसके
गुज़ारा
हो
सकता
है
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Shubham Rai 'shubh'
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