sadaaein aati jab mujhko bhi andar se | सदाएँ आती जब मुझको भी अंदर से

  - Vishal Jha
सदाएँआतीजबमुझकोभीअंदरसे
ख़िज़ाँकाअक्सहोजाताहूँबाहरस
हवा-ए-ग़मअगरहोदाइमीमुझपे
हराऔरताज़ाहोसकताहूँपैकरसे
कमाईहैमलाल-ओ-अश्कहमनेतो
सोबाग़-ए-हिज्रहीनिकलेगालॉकरसे
जोशाख-ए-लबसेटूटेगासमरमेरा
अभीलटकाहुआनज़रोंकेलंगरसे
वहीजोयादआनाथानहींआया
मुसीबतघूमतीसरगोशनंबरसे
उगीफसलेंफ़नातोसबनेकाटीहै
कभीजीतीकिसीनेशर्तअंबरसे
तेरीबसतीनसेतनक़ीदकरताहूँ
मैंपंखोंसेदिवारोंसेबिस्तरसे
  - Vishal Jha
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