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Subodh Sharma "Subh"
tum ho zoya ishq meraa is banaras ki tarah
tum ho zoya ishq meraa is banaras ki tarah | तुम हो ज़ोया इश्क़ मेरा इस बनारस की तरह
- Subodh Sharma "Subh"
तुम
हो
ज़ोया
इश्क़
मेरा
इस
बनारस
की
तरह
पर
मैं
कुंदन
तो
नहीं
हूँ
जो
कलाई
काट
लूँ
- Subodh Sharma "Subh"
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मेरा
किरदार
मेरी
बात
कहाँ
सुनता
है
ये
समझदार
मेरी
बात
कहाँ
सुनता
है
इश्क़
है
वादा-फ़रामोश
नहीं
है
कोई
दिल
तलबगार
मेरी
बात
कहाँ
सुनता
है
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Vishal Singh Tabish
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मुझे
पहले
पहल
लगता
था
ज़ाती
मसअला
है
मैं
फिर
समझा
मोहब्बत
क़ायनाती
मसअला
है
परिंदे
क़ैद
हैं
तुम
चहचहाहट
चाहते
हो
तुम्हें
तो
अच्छा
ख़ासा
नफ़सयाती
मसअला
है
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Umair Najmi
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ज़्यादा
मीठा
हो
तो
चींटा
लग
जाता
है
सच्चे
इश्क़
को
अक्सर
बट्टा
लग
जाता
है
हमने
अपनी
जान
गंवाई
तब
जाना
भाव
मिले
तो
कुछ
भी
सट्टा
लग
जाता
है
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Ritesh Rajwada
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याद
रखना
ही
मोहब्बत
में
नहीं
है
सब
कुछ
भूल
जाना
भी
बड़ी
बात
हुआ
करती
है
Jamal Ehsani
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मज़ा
चहिए
जो
आख़िर
तक
उदासी
से
मोहब्बत
कर
ख़ुशी
का
क्या
है
कब
तब्दील
है
से
थी
में
हो
जाए
Atul K Rai
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मोहब्बत
का
नहीं
इक
दिन
मुकर्रर
मोहब्बत
उम्रभर
का
सिलसिला
है
Neeraj Naveed
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नई
दुनिया
बनाऊँगा
मगर
मैं
अपनी
दुनिया
का
ख़ुदा
भी
इश्क़
में
खोया
हुआ
लड़का
बनाऊँगा
Satya Prakash Soni
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बाद
में
तुम
से
इश्क़
कर
लेंगे
पहले
ख़ुदस
तो
प्यार
कर
लें
हम
Shadab Asghar
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ख़ुद-कुशी
जुर्म
भी
है
सब्र
की
तौहीन
भी
है
इस
लिए
इश्क़
में
मर
मर
के
जिया
जाता
है
Ibrat Siddiqui
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सोच
कर
पाँव
डालना
इस
में
इश्क़
दरिया
नहीं
है
दलदल
है
Renu Nayyar
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रात
हम
सेे
न
बसर
की
जाए
आँख
ये
मुझ'से
उधर
की
जाए
देख
लो
हाल
मेरा
सोचो
फिर
अब
कहीं
और
नज़र
की
जाए
चुप
है,
कुछ
बोल,बता
जो
भी
हो
बात
उसकी
न
मगर
की
जाए
एक
बोतल
कि
बची
है
कल
से
अब
चलो
शाम
बसर
की
जाए
था
मैं
बद-नाम
मगर
पहले
था
अब
तो
उँगली
न
इधर
की
जाए
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Subodh Sharma "Subh"
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किताबों
में
मेरा
दिल
है
यहीं
रखना
लिखा
हो
नाम
उसका
बस
वहीं
रखना
वहीं
रखना
जहाँ
पे
छाँव
हो
उसकी
वगरना
क़ब्र
सहरा
में
नहीं
रखना
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Subodh Sharma "Subh"
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आता
है
काम
कब
ये
सिखाया
हुआ
सबक़
सब
सीख
के
भी
हाथ
पे
छाले
पड़े
रहे
Subodh Sharma "Subh"
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दीप
फिर
से
ये
जगमगाए
हैं
राम
जी
वन
से
लौट
आए
हैं
आज
कोई
नहीं
निभा
पाता
राम
ने
सब
वचन
निभाए
हैं
जाति
पे
तंज़
कसने
वालों
से
पूछना
बेर
किसने
खाए
हैं
राम
के
दिल
में
हैं
बसी
सीता
राम
को
दिल
में
हम
बसाए
हैं
पैर
अंगद
सा
शीश
को
कर
के
राम
के
दर
पे
हम
जमाए
हैं
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Subodh Sharma "Subh"
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लोग
जो
कहते
नहीं
है
दुख
किसी
से
शा'इरी
में
वो
सदा
ढलता
रहेगा
Subodh Sharma "Subh"
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