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Subodh Sharma "Subh"
log jo kahte nahin hai dukh kisi se
log jo kahte nahin hai dukh kisi se | लोग जो कहते नहीं है दुख किसी से
- Subodh Sharma "Subh"
लोग
जो
कहते
नहीं
है
दुख
किसी
से
शा'इरी
में
वो
सदा
ढलता
रहेगा
- Subodh Sharma "Subh"
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उस
ख़ूब-रू
से
रब्त
ज़रा
कम
हुआ
मेरा
ये
देख
कर
उदासी
मेरे
संग
लग
गई
Siddharth Saaz
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गर
कोई
मुझ
सेे
आकर
कहता,
यार
उदासी
है
मैं
उसको
गले
लगाकर
कहता,
यार
उदासी
है
होता
दरवेश
अगर
मैं
तो
फिर
सारी
दो-पहरी
गलियों
में
सदा
लगाकर
कहता,
यार
उदासी
है
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Siddharth Saaz
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कोई
हादसा
लेकर
आदमी
किधर
जाए
आदमी
अगर
कह
दे
हादसा
उदासी
है
Rohit tewatia 'Ishq'
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ख़मोशी
तो
यही
बतला
रही
है
उदासी
रास
मुझको
आ
रही
है
मुझे
जिन
ग़लतियों
से
सीखना
था
वही
फिर
ज़िंदगी
दोहरा
रही
है
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Vishal Singh Tabish
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अब
उदास
फिरते
हो
सर्दियों
की
शामों
में
इस
तरह
तो
होता
है
इस
तरह
के
कामों
में
Shoaib Bin Aziz
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मैं
अँधेरों
से
बचा
लाया
था
अपने
आप
को
मेरा
दुख
ये
है
मिरे
पीछे
उजाले
पड़
गए
Rahat Indori
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दूजों
का
दुख
समझने
को
बे
हद
ज़रूरी
है
थोड़ी
सही
प
दिल
में
अज़ीयत
बनी
रहे
Afzal Ali Afzal
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दुख
तो
बहुत
मिले
हैं
मोहब्बत
नहीं
मिली
यानी
कि
जिस्म
मिल
गया
औरत
नहीं
मिली
मुझको
पिता
की
आँख
के
आँसू
तो
मिल
गए
मुझको
पिता
से
ज़ब्त
की
आदत
नहीं
मिली
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Abhishar Geeta Shukla
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शोर
की
इस
भीड़
में
ख़ामोश
तन्हाई
सी
तुम
ज़िन्दगी
है
धूप
तो
मद-मस्त
पुर्वाई
सी
तुम
चाहे
महफ़िल
में
रहूँ
चाहे
अकेले
में
रहूँ
गूँजती
रहती
हो
मुझ
में
शोख़
शहनाई
सी
तुम
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Kunwar Bechain
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शहर
का
तब्दील
होना
शाद
रहना
और
उदास
रौनक़ें
जितनी
यहाँ
हैं
औरतों
के
दम
से
हैं
Muneer Niyazi
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हाथ
सर
पे
रख
रहे
गुस्ताख़
ख़ाली
जल
गया
जब
सब
बची
है
राख़
ख़ाली
इन
ठिकानों
पर
भला
अब
कौन
चहके
सब
परिंदे
उड़
गए
हैं
शाख़
ख़ाली
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Subodh Sharma "Subh"
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ये
परचम
इश्क़
का
वो
धर
चुका
था
मोहब्बत
थी
हमें
वो
कर
चुका
था
मिला
था
जब
मुझे
पहले-पहल
वो
मियाँ
मैं
तो
उसी
दिन
मर
चुका
था
ग़ज़ल
के
वास्ते
फिर
से
उठाई
वगरना
मैं
क़लम
तो
धर
चुका
था
लिखा
था
ज़िंदगी
पर
उस
सेे
पहले
मोहब्बत
का
मैं
कालम
भर
चुका
था
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Subodh Sharma "Subh"
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दीप
फिर
से
ये
जगमगाए
हैं
राम
जी
वन
से
लौट
आए
हैं
आज
कोई
नहीं
निभा
पाता
राम
ने
सब
वचन
निभाए
हैं
जाति
पे
तंज़
कसने
वालों
से
पूछना
बेर
किसने
खाए
हैं
राम
के
दिल
में
हैं
बसी
सीता
राम
को
दिल
में
हम
बसाए
हैं
पैर
अंगद
सा
शीश
को
कर
के
राम
के
दर
पे
हम
जमाए
हैं
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Subodh Sharma "Subh"
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किताबों
में
मेरा
दिल
है
यहीं
रखना
लिखा
हो
नाम
उसका
बस
वहीं
रखना
वहीं
रखना
जहाँ
पे
छाँव
हो
उसकी
वगरना
क़ब्र
सहरा
में
नहीं
रखना
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Subodh Sharma "Subh"
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किसी
दिन
मूड
घूमा
तो
ये
चक्का
जाम
कर
देंगे
मेरा
चर्चा
तेरे
अख़बार
में,
पैग़ाम
कर
देंगे
हमारे
ख़ून
में
मेहनत
की
ये
मिक़दार
इतनी
है
ये
दस्तावेज़
डिग्री
सब
ही
तेरे
नाम
कर
देंगे
तुझे
चुन
के
बता
फिर
से
भला
अब
क्या
करेंगे
हम
हमारे
काम
तो
पूरे
सभी,
श्री
राम
कर
देंगे
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Subodh Sharma "Subh"
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