kar diya tark yuñ ibadat ko | कर दिया तर्क यूँँ इबादत को

  - Shajar Abbas
करदियातर्कयूँँइबादतको
तुमआएमेरीअयादतको
उसनेरुख़सेनापलटीअपनेनक़ाब
हमतरसतेरहेज़ियारतको
येमोहब्बतभीइकइबादतहै
क्यूँक़ज़ाकरदूँइसइबादतको
ज़िन्दगीपरतुम्हारीलानतहै
उठनापाएमेरीहिमायतको
इससियासतनेघरजलाडाले
आगलगजाएइससियासतको
सबमकाँशहरमेंबराबरहै
ज़लज़लाढागयाइमारतको
उसनेअपनीहयाकेपर्देमें
क़ैदकररक्खाहैक़यामतको
जिनकोमैंनेसुखनसिखायाथा
उठरहेहैंवहीबग़ावतको
हक़बयानीतोमेरीआदतहै
क्यूँबदलदूँमैंअपनीआदतको
जोनिकम्मीहोसुनिएऔलादें
बेचतीहैंवहींविरासतको
मैंशजरहूँजुदाहूँदुनियासे
तुमनासमझोगेमेरीतीनतको
  - Shajar Abbas
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