hi
0
Search
Shayari
Writers
Events
Blog
Store
Help
Login
By:
00:00/00:00
Shadab Shabbiri
usse mil kar khushi hui thii mujhe
usse mil kar khushi hui thii mujhe | उस सेे मिल कर ख़ुशी हुई थी मुझे
- Shadab Shabbiri
उस
सेे
मिल
कर
ख़ुशी
हुई
थी
मुझे
और
फिर
देर
तक
उदासी
थी
- Shadab Shabbiri
Download Sher Image
यूँँ
देखिए
तो
आँधी
में
बस
इक
शजर
गया
लेकिन
न
जाने
कितने
परिंदों
का
घर
गया
जैसे
ग़लत
पते
पे
चला
आए
कोई
शख़्स
सुख
ऐसे
मेरे
दर
पे
रुका
और
गुज़र
गया
Read Full
Rajesh Reddy
Send
Download Image
46 Likes
मुझ
ऐसा
शख़्स
अगर
क़हक़हों
से
भर
जाए
ये
साँस
लेती
उदासी
तो
घुट
के
मर
जाए
वो
मेरे
बाद
तरस
जाएगा
मोहब्बत
को
उसे
ये
कहना
अगर
हो
सके
तो
मर
जाए
Read Full
Rakib Mukhtar
Send
Download Image
76 Likes
ये
जो
दीवार
अँधेरों
ने
उठा
रक्खी
है
मेरा
मक़्सद
इसी
दीवार
में
दर
करना
है
Azm Shakri
Send
Download Image
23 Likes
आ
जाए
कौन
कब
कहाँ
कैसी
ख़बर
के
साथ
अपने
ही
घर
में
बैठा
हुआ
हूँ
मैं
डर
के
साथ
Pratap Somvanshi
Send
Download Image
33 Likes
आँख
की
बेबसी
दिल
का
डर
देखना
तुम
किसी
दिन
ग़रीबों
का
घर
देखना
Alankrat Srivastava
Send
Download Image
8 Likes
पहले
सौ
बार
इधर
और
उधर
देखा
है
तब
कहीं
डर
के
तुम्हें
एक
नज़र
देखा
है
Majrooh Sultanpuri
Send
Download Image
64 Likes
शे'र
दर-अस्ल
हैं
वही
'हसरत'
सुनते
ही
दिल
में
जो
उतर
जाएँ
Hasrat Mohani
Send
Download Image
22 Likes
वही
मंज़िलें
वही
दश्त
ओ
दर
तिरे
दिल-ज़दों
के
हैं
राहबर
वही
आरज़ू
वही
जुस्तुजू
वही
राह-ए-पुर-ख़तर-ए-जुनूँ
Noon Meem Rashid
Send
Download Image
24 Likes
हम
किसी
दर
पे
न
ठिटके
न
कहीं
दस्तक
दी
सैकड़ों
दर
थे
मिरी
जाँ
तिरे
दर
से
पहले
Ibn E Insha
Send
Download Image
29 Likes
कल
जहाँ
दीवार
थी
है
आज
इक
दर
देखिए
क्या
समाई
थी
भला
दीवाने
के
सर
देखिए
Javed Akhtar
Send
Download Image
28 Likes
Read More
दिल
के
अरमान
दफ़्न
हैं
दिल
में
चलते-फिरते
मज़ार
हैं
हम
लोग
Shadab Shabbiri
Send
Download Image
0 Likes
किसी
के
दिल
को
दुखाना
मुझे
पसंद
नहीं
क़सम
से
रोना
रुलाना
मुझे
पसंद
नहीं
Shadab Shabbiri
Send
Download Image
0 Likes
इक
ज़रा
ये
भी
काम
कर
दो
ना
काम
मेरा
तमाम
कर
दो
ना
Shadab Shabbiri
Send
Download Image
0 Likes
सैर-ए-गुलशन
को
जब
वो
आए
हैं
तब
कहीं
फूल
मुस्कुराए
हैं
आग
बरसेगी
देखना
इक
दिन
ज़ुल्म-ओ-दहशत
के
अब्र
छाए
हैं
उनके
रुख़्सार-ओ-लब-क़द-ओ-क़ामत
फिर
से
महफ़िल
में
खींच
लाए
हैं
आप
की
बात
हमने
की
ही
नहीं
आप
क्यूँ
सुन
के
तिलमिलाए
हैं
सुन
रहा
हूँ
वो
आ
के
जाएँगे
अश्क
आँखों
में
डबडबाए
हैं
Read Full
Shadab Shabbiri
Download Image
0 Likes
बर्क़
दिल
पर
मिरे
गिराएगा
करके
वा'दा
वो
फिर
न
आएगा
Shadab Shabbiri
Send
Download Image
1 Like
Read More
Akbar Allahabadi
Krishna Bihari Noor
Shariq Kaifi
Mohammad Alvi
Anjum Rehbar
Abhishar Geeta Shukla
Ali Zaryoun
Zehra Nigaah
Amjad Islam Amjad
Asad Bhopali
Get Shayari on your Whatsapp
Mehndi Shayari
Education Shayari
Budhapa Shayari
Kitab Shayari
Aahat Shayari