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Shadab Shabbiri
ik zaraa ye bhi kaam kar do nakaam meraa tamaam kar do na
ik zaraa ye bhi kaam kar do nakaam meraa tamaam kar do na | इक ज़रा ये भी काम कर दो ना
- Shadab Shabbiri
इक
ज़रा
ये
भी
काम
कर
दो
ना
काम
मेरा
तमाम
कर
दो
ना
- Shadab Shabbiri
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भरे
हुए
जाम
पर
सुराही
का
सर
झुका
तो
बुरा
लगेगा
जिसे
तेरी
आरज़ू
नहीं
तू
उसे
मिला
तो
बुरा
लगेगा
ये
आख़िरी
कंपकंपाता
जुमला
कि
इस
तअ'ल्लुक़
को
ख़त्म
कर
दो
बड़े
जतन
से
कहा
है
उस
ने
नहीं
किया
तो
बुरा
लगेगा
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Zubair Ali Tabish
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देखो
तो
चश्म-ए-यार
की
जादू-निगाहियाँ
बेहोश
इक
नज़र
में
हुई
अंजुमन
तमाम
Hasrat Mohani
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किसी
बहाने
से
उसकी
नाराज़गी
ख़त्म
तो
करनी
थी
उसके
पसंदीदा
शाइर
के
शे'र
उसे
भिजवाए
हैं
Ali Zaryoun
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सूरज
लिहाफ़
ओढ़
के
सोया
तमाम
रात
सर्दी
से
इक
परिंदा
दरीचे
में
मर
गया
Athar nasik
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हर
एक
चौखट
खुली
हुई
थी
हर
इक
दरीचा
खुला
हुआ
था
कि
उसकी
आमद
पे
दर
यहाँ
तक
कि
बेघरों
का
खुला
हुआ
था
ये
तेरी
हम्म
ने
हमें
ही
उलझन
में
डाल
रक्खा
है
वरना
हम
पर
तमाम
साइंस
के
फ़लसफ़ों
का
हर
एक
चिट्ठा
खुला
हुआ
था
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Saad Ahmad
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चलता
रहने
दो
मियाँ
सिलसिला
दिलदारी
का
आशिक़ी
दीन
नहीं
है
कि
मुकम्मल
हो
जाए
Abbas Tabish
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मानी
हैं
मैं
ने
सैकड़ों
बातें
तमाम
उम्र
आज
आप
एक
बात
मेरी
मान
जाइए
Ameer Minai
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अब
बिछड़ने
पर
समझ
पाते
हैं
हम
इक
दूसरे
को
इम्तिहाँ
के
ख़त्म
हो
जाने
पे
हल
याद
आ
रहा
है
Nishant Singh
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अंजाम
उसके
हाथ
है
आग़ाज़
करके
देख
भीगे
हुए
परों
से
ही
परवाज़
करके
देख
Nawaz Deobandi
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दुश्मनी
लाख
सही
ख़त्म
न
कीजे
रिश्ता
दिल
मिले
या
न
मिले
हाथ
मिलाते
रहिए
Nida Fazli
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शैख़
साहब
की
पैरवी
करके
हम
गुनहगार
हो
चुके
होंगे
Shadab Shabbiri
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सैर-ए-गुलशन
को
जब
वो
आए
हैं
तब
कहीं
फूल
मुस्कुराए
हैं
आग
बरसेगी
देखना
इक
दिन
ज़ुल्म-ओ-दहशत
के
अब्र
छाए
हैं
उनके
रुख़्सार-ओ-लब-क़द-ओ-क़ामत
फिर
से
महफ़िल
में
खींच
लाए
हैं
आप
की
बात
हमने
की
ही
नहीं
आप
क्यूँ
सुन
के
तिलमिलाए
हैं
सुन
रहा
हूँ
वो
आ
के
जाएँगे
अश्क
आँखों
में
डबडबाए
हैं
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Shadab Shabbiri
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शौक़-ए-मंज़िल
में
चलता
रहता
हूँ
पड़ता
रहता
है
आबला
दिल
में
Shadab Shabbiri
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आ
गई
पुख़्तगी
मोहब्बत
में
लुत्फ़
मिलने
लगा
है
फुर्क़त
में
Shadab Shabbiri
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बर्क़
दिल
पर
मिरे
गिराएगा
करके
वा'दा
वो
फिर
न
आएगा
Shadab Shabbiri
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