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Sandhya maurya
KHvaab mere yaar aakhir
KHvaab mere yaar aakhir | ख़्वाब मेरे यार आख़िर
- Sandhya maurya
ख़्वाब
मेरे
यार
आख़िर
हो
गए
बेकार
आख़िर
दास्ताँ
मरने
लगी
है
क्या
करे
किरदार
आख़िर
कर
रहे
हो
बात
कैसी
तुम
भी
मेरे
यार
आख़िर
हम
लड़ें
ये
चाहती
है
हरघड़ी
सरकार
आख़िर
सामने
ख़ुद
के
ख़ुदी
हम
हो
गए
दीवार
आख़िर
वो
न
समझेगा
हुए
हम
जिस
क़दर
लाचार
आख़िर
फिर
उसी
से
हो
गया
है
इश्क़
मुझको
यार
आख़िर
- Sandhya maurya
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तमाम
शहर
की
ख़ातिर
चमन
से
आते
हैं
हमारे
फूल
किसी
के
बदन
से
आते
हैं
Farhat Ehsaas
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मसअला
ख़त्म
हुआ
चाहता
है
दिल
बस
अब
ज़ख़्म
नया
चाहता
है
Shakeel Jamali
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तमाम
जिस्म
को
आँखें
बना
के
राह
तको
तमाम
खेल
मुहब्बत
में
इंतिज़ार
का
है
Munawwar Rana
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देखो
तो
चश्म-ए-यार
की
जादू-निगाहियाँ
बेहोश
इक
नज़र
में
हुई
अंजुमन
तमाम
Hasrat Mohani
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मिरे
सलीक़े
से
मेरी
निभी
मोहब्बत
में
तमाम
उम्र
मैं
नाकामियों
से
काम
लिया
Meer Taqi Meer
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कीजे
इज़हार-ए-मोहब्बत
चाहे
जो
अंजाम
हो
ज़िंदगी
में
ज़िंदगी
जैसा
कोई
तो
काम
हो
Priyamvada ilhan
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दिल-ए-नादाँ
तुझे
हुआ
क्या
है
आख़िर
इस
दर्द
की
दवा
क्या
है
Mirza Ghalib
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इसी
लिए
तो
यहाँ
अब
भी
अजनबी
हूँ
मैं
तमाम
लोग
फ़रिश्ते
हैं
आदमी
हूँ
मैं
Bashir Badr
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कुछ
इस
तरह
से
गुज़ारी
है
ज़िन्दगी
जैसे
तमाम
उम्र
किसी
दूसरे
के
घर
में
रहा
Ahmad Faraz
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वो
भी
आख़िर
तिरी
ता'रीफ़
में
ही
ख़र्च
हुआ
मैं
ने
जो
वक़्त
निकाला
था
शिकायत
के
लिए
Azhar Nawaz
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गीतों
में
जो
मुखड़ा
बनता
है
वो
ग़ज़लों
में
मतला
बनता
है
खेल
दिखाकर
बोला
जादूगर
देखो
अब
देखो
क्या
बनता
है
मुझपे
जब
भी
किरणें
पड़ती
हैं
दीवारों
पर
साया
बनता
है
और
कहीं
बनते
होंगे
आदम
चाक
पे
केवल
ख़ाका
बनता
है
सारे
हक़
जब
तुझको
दे
डाले
तेरा
मुझ
सेे
लड़ना
बनता
है
बनता
है
जब
पीठ
पे
एक
भँवर
तब
जाकर
कुछ
पैसा
बनता
है
वहशत
से
जो
देखता
है
औरत
आगे
चलकर
अंधा
बनता
है
किस
साॅंचे
ने
उसे
बनाया
फिर
जिस
सेे
ख़ुद
ही
साॅंचा
बनता
है
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Sandhya maurya
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एक
लड़के
की
बदौलत
देखिए
शा'इरी
के
फ़ील्ड
में
हम
आ
गए
Sandhya maurya
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मय
कभी
पीना
नहीं
जाना
नहीं
इक
शराबी
मुझको
ये
समझा
रहा
Sandhya maurya
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है
बड़ी
पुर-कैफ़
वो
तस्वीर
उसकी
क्या
कहें
दिलकश
बड़ी
है
हीर
उसकी
जाँ
हमारी
हम
ख़ुशी
से
दें
तभी
तो
इस
गले
पर
हो
अगर
शमशीर
उसकी
प्यार
पर
तेरे
भरोसा
कर
लिया
था
हाँ
फ़क़त
इतनी
रही
तक़्सीर
उसकी
इस
तरह
अब
दिल
मिरा
क़ैदी
हुआ
है
है
क़फ़स
मेरा
मगर
ज़ंजीर
उसकी
बस
रहे
गंदी
निगाहों
से
बची
वो
या-ख़ुदा
ऐसी
बना
तक़दीर
उसकी
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Sandhya maurya
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हमें
छोड़ो
हमारे
हाल
पर
तुम
कहो
कैसी
तबीअत
है
तुम्हारी
Sandhya maurya
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