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Sandhya maurya
Geeton men jo mukhda banta hai
गीतों में जो मुखड़ा बनता है
- Sandhya maurya
गीतों
में
जो
मुखड़ा
बनता
है
वो
ग़ज़लों
में
मतला
बनता
है
खेल
दिखाकर
बोला
जादूगर
देखो
अब
देखो
क्या
बनता
है
मुझपे
जब
भी
किरणें
पड़ती
हैं
दीवारों
पर
साया
बनता
है
और
कहीं
बनते
होंगे
आदम
चाक
पे
केवल
ख़ाका
बनता
है
सारे
हक़
जब
तुझको
दे
डाले
तेरा
मुझ
सेे
लड़ना
बनता
है
बनता
है
जब
पीठ
पे
एक
भँवर
तब
जाकर
कुछ
पैसा
बनता
है
वहशत
से
जो
देखता
है
औरत
आगे
चलकर
अंधा
बनता
है
किस
साॅंचे
ने
उसे
बनाया
फिर
जिस
सेे
ख़ुद
ही
साॅंचा
बनता
है
- Sandhya maurya
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ख़्वाब
मेरे
यार
आख़िर
हो
गए
बेकार
आख़िर
दास्ताँ
मरने
लगी
है
क्या
करे
किरदार
आख़िर
कर
रहे
हो
बात
कैसी
तुम
भी
मेरे
यार
आख़िर
हम
लड़ें
ये
चाहती
है
हरघड़ी
सरकार
आख़िर
सामने
ख़ुद
के
ख़ुदी
हम
हो
गए
दीवार
आख़िर
वो
न
समझेगा
हुए
हम
जिस
क़दर
लाचार
आख़िर
फिर
उसी
से
हो
गया
है
इश्क़
मुझको
यार
आख़िर
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चलो
मैं
तो
तुम्हारी
बात
पर
कर
लूँ
यक़ीं
थोड़ा
मगर
तुम
आदमी
हो
आदमी
का
क्या
भरोसा
हैं
Sandhya maurya
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है
बड़ी
पुर-कैफ़
वो
तस्वीर
उसकी
क्या
कहें
दिलकश
बड़ी
है
हीर
उसकी
जाँ
हमारी
हम
ख़ुशी
से
दें
तभी
तो
इस
गले
पर
हो
अगर
शमशीर
उसकी
प्यार
पर
तेरे
भरोसा
कर
लिया
था
हाँ
फ़क़त
इतनी
रही
तक़्सीर
उसकी
इस
तरह
अब
दिल
मिरा
क़ैदी
हुआ
है
है
क़फ़स
मेरा
मगर
ज़ंजीर
उसकी
बस
रहे
गंदी
निगाहों
से
बची
वो
या-ख़ुदा
ऐसी
बना
तक़दीर
उसकी
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एक
लड़के
की
बदौलत
देखिए
शा'इरी
के
फ़ील्ड
में
हम
आ
गए
Sandhya maurya
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मय
कभी
पीना
नहीं
जाना
नहीं
इक
शराबी
मुझको
ये
समझा
रहा
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