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Sandhya maurya
hai ba
hai ba | है बड़ी पुर-कैफ़ वो तस्वीर उसकी
- Sandhya maurya
है
बड़ी
पुर-कैफ़
वो
तस्वीर
उसकी
क्या
कहें
दिलकश
बड़ी
है
हीर
उसकी
जाँ
हमारी
हम
ख़ुशी
से
दें
तभी
तो
इस
गले
पर
हो
अगर
शमशीर
उसकी
प्यार
पर
तेरे
भरोसा
कर
लिया
था
हाँ
फ़क़त
इतनी
रही
तक़्सीर
उसकी
इस
तरह
अब
दिल
मिरा
क़ैदी
हुआ
है
है
क़फ़स
मेरा
मगर
ज़ंजीर
उसकी
बस
रहे
गंदी
निगाहों
से
बची
वो
या-ख़ुदा
ऐसी
बना
तक़दीर
उसकी
- Sandhya maurya
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पहले
लगा
था
हिज्र
में
जाएँगे
जान
से
पर
जी
रहे
हैं
और
भी
हम
इत्मीनान
से
Ankit Maurya
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इक
और
इश्क़
की
नहीं
फुर्सत
मुझे
सनम
और
हो
भी
अब
अगर
तो
मेरा
मन
नहीं
बचा
Afzal Ali Afzal
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ये
हक़ीक़त
है,
मज़हका
नहीं
है
वो
बहुत
दूर
है,
जुदा
नहीं
है
तेरे
होंटों
पे
रक़्स
करता
है
राज़
जो
अब
तलक
खुला
नहीं
है
जान
ए
जांँ
तेरे
हुस्न
के
आगे
ये
जो
शीशा
है,
आइना
नहीं
है
क्यूँ
शराबोर
हो
पसीने
में
मैं
ने
बोसा
अभी
लिया
नहीं
है
उस
का
पिंदार
भी
वहीं
का
वहीं
मेरे
लब
पर
भी
इल्तेजा
नहीं
है
जो
भी
होना
था
हो
चुका
काज़िम
अब
किसी
से
हमें
गिला
नहीं
है
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Kazim Rizvi
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ज़्यादा
मीठा
हो
तो
चींटा
लग
जाता
है
सच्चे
इश्क़
को
अक्सर
बट्टा
लग
जाता
है
हमने
अपनी
जान
गंवाई
तब
जाना
भाव
मिले
तो
कुछ
भी
सट्टा
लग
जाता
है
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Ritesh Rajwada
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इसी
से
जान
गया
मैं
कि
बख़्त
ढलने
लगे
मैं
थक
के
छाँव
में
बैठा
तो
पेड़
चलने
लगे
मैं
दे
रहा
था
सहारे
तो
इक
हुजूम
में
था
जो
गिर
पड़ा
तो
सभी
रास्ता
बदलने
लगे
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Farhat Abbas Shah
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चाहे
हो
आसमान
पे
चाहे
ज़मीं
पे
हो
वहशत
का
रक़्स
हम
ही
करेंगे
कहीं
पे
हो
दिल
पर
तुम्हारे
नाम
की
तख़्ती
लगी
न
थी
फिर
भी
ज़माना
जान
गया
तुम
यहीं
पे
हो
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Nirmal Nadeem
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पत्थर
के
ख़ुदा
पत्थर
के
सनम
पत्थर
के
ही
इंसाँ
पाए
हैं
तुम
शहर-ए-मोहब्बत
कहते
हो
हम
जान
बचा
कर
आए
हैं
Sudarshan Fakir
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शाम-ए-फ़िराक़
अब
न
पूछ
आई
और
आ
के
टल
गई
दिल
था
कि
फिर
बहल
गया
जाँ
थी
कि
फिर
सँभल
गई
Faiz Ahmad Faiz
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बस
यूँँ
ही
मेरा
गाल
रखने
दे
मेरी
जान
आज
गाल
पर
अपने
Jaun Elia
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चढ़ते
हुवे
ए
शम्स
दिखा
ताव
भी
मगर
ये
जान
ले
कि
शाम
ढले
डूब
जाएगा
Afzal Ali Afzal
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चलो
मैं
तो
तुम्हारी
बात
पर
कर
लूँ
यक़ीं
थोड़ा
मगर
तुम
आदमी
हो
आदमी
का
क्या
भरोसा
हैं
Sandhya maurya
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गीतों
में
जो
मुखड़ा
बनता
है
वो
ग़ज़लों
में
मतला
बनता
है
खेल
दिखाकर
बोला
जादूगर
देखो
अब
देखो
क्या
बनता
है
मुझपे
जब
भी
किरणें
पड़ती
हैं
दीवारों
पर
साया
बनता
है
और
कहीं
बनते
होंगे
आदम
चाक
पे
केवल
ख़ाका
बनता
है
सारे
हक़
जब
तुझको
दे
डाले
तेरा
मुझ
सेे
लड़ना
बनता
है
बनता
है
जब
पीठ
पे
एक
भँवर
तब
जाकर
कुछ
पैसा
बनता
है
वहशत
से
जो
देखता
है
औरत
आगे
चलकर
अंधा
बनता
है
किस
साॅंचे
ने
उसे
बनाया
फिर
जिस
सेे
ख़ुद
ही
साॅंचा
बनता
है
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Sandhya maurya
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एक
लड़के
की
बदौलत
देखिए
शा'इरी
के
फ़ील्ड
में
हम
आ
गए
Sandhya maurya
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मय
कभी
पीना
नहीं
जाना
नहीं
इक
शराबी
मुझको
ये
समझा
रहा
Sandhya maurya
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ख़्वाब
मेरे
यार
आख़िर
हो
गए
बेकार
आख़िर
दास्ताँ
मरने
लगी
है
क्या
करे
किरदार
आख़िर
कर
रहे
हो
बात
कैसी
तुम
भी
मेरे
यार
आख़िर
हम
लड़ें
ये
चाहती
है
हरघड़ी
सरकार
आख़िर
सामने
ख़ुद
के
ख़ुदी
हम
हो
गए
दीवार
आख़िर
वो
न
समझेगा
हुए
हम
जिस
क़दर
लाचार
आख़िर
फिर
उसी
से
हो
गया
है
इश्क़
मुझको
यार
आख़िर
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Sandhya maurya
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