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Ravi 'VEER'
maheenon baad aaya hai mahina pyaar ka lekin
maheenon baad aaya hai mahina pyaar ka lekin | महीनों बाद आया है महीना प्यार का लेकिन
- Ravi 'VEER'
महीनों
बाद
आया
है
महीना
प्यार
का
लेकिन
महीनों
से
मेरा
महबूब
दर
मेरे
नहीं
आया
- Ravi 'VEER'
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इस
ख़ौफ़
में
कि
ख़ुद
न
भटक
जाएँ
राह
में
भटके
हुओं
को
राह
दिखाता
नहीं
कोई
Anwar Taban
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शग़्ल
था
दश्त-नवर्दी
का
कभी
ऐ
'ताबाँ'
अब
गुलिस्ताँ
में
भी
जाते
हुए
डर
लगता
है
Anwar Taban
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वही
मंज़िलें
वही
दश्त
ओ
दर
तिरे
दिल-ज़दों
के
हैं
राहबर
वही
आरज़ू
वही
जुस्तुजू
वही
राह-ए-पुर-ख़तर-ए-जुनूँ
Noon Meem Rashid
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मुझे
ये
डर
है
तेरी
आरज़ू
न
मिट
जाए
बहुत
दिनों
से
तबीअत
मिरी
उदास
नहीं
Nasir Kazmi
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सखियों
संग
रँगने
की
धमकी
सुनकर
क्या
डर
जाऊँगा
तेरी
गली
में
क्या
होगा
ये
मालूम
है
पर
आऊँगा
Kumar Vishwas
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तमाम
शहर
को
तारीकियों
से
शिकवा
है
मगर
चराग़
की
बैअत
से
ख़ौफ़
आता
है
Aziz Nabeel
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ये
जो
दीवार
अँधेरों
ने
उठा
रक्खी
है
मेरा
मक़्सद
इसी
दीवार
में
दर
करना
है
Azm Shakri
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कुछ
न
था
मेरे
पास
खोने
को
तुम
मिले
हो
तो
डर
गया
हूँ
मैं
Nomaan Shauque
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किसे
है
वक़्त
मोहब्बत
में
दर-ब-दर
भटके
मैं
उसके
शहर
गया
था
किसी
ज़रूरत
से
Riyaz Tariq
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हुनर
से
काम
लिया
पेंट
ब्रश
नहीं
तोड़ा
बना
लिया
तेरे
जैसा
ही
कोई
रंगों
से
मुझे
ये
डर
है
कि
मिल
जाएगी
तो
रो
दूँगा
मैं
जिस
ख़ुशी
को
तरसता
रहा
हूँ
बरसों
से
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Rahul Gurjar
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इन
आँखों
को
ताजमहल
क्या
भाएगा
इन
आँखों
ने
उसका
चेहरा
देखा
है
Ravi 'VEER'
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ख़ून
पसीना
दोनों
मिलकर
रोटी
बनके
आते
हैं
तब
जाकर
के
रोज़
हमारी
भूख
कहीं
मिट
पाती
है
Ravi 'VEER'
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अब
कहाँ
मिलना
मिलाना
हो
रहा
है
अब
न
उन
गलियों
में
जाना
हो
रहा
है
आँख
से
दीदार
करना
था
मगर
अब
आँख
से
आँसू
बहाना
हो
रहा
है
जो
कभी
मेरा
दिवाना
था
बहुत
वो
ग़ैर
का
देखो
दिवाना
हो
रहा
है
फूल
ताज़ा
है
महीनों
बाद
भी
पर
इश्क़
लगता
है
पुराना
हो
रहा
है
आँसुओं
को
कब
तलक
पीता
रहूँ
सो
मयकदों
में
रोज़
जाना
हो
रहा
है
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Ravi 'VEER'
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तितलियों
की
थी
ज़रूरत
सो
उसे
रक्खा
मगर
वो
बग़ीचे
के
सभी
फूलों
को
पत्थर
कर
गया
Ravi 'VEER'
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सब
सेे
हँसकर
मिलना
उसकी
आदत
थी
मुझको
लगता
था
मेरी
दीवानी
है
Ravi 'VEER'
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