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Ravi 'VEER'
ab kahaan milnaa milaana ho raha hai
ab kahaan milnaa milaana ho raha hai | अब कहाँ मिलना मिलाना हो रहा है
- Ravi 'VEER'
अब
कहाँ
मिलना
मिलाना
हो
रहा
है
अब
न
उन
गलियों
में
जाना
हो
रहा
है
आँख
से
दीदार
करना
था
मगर
अब
आँख
से
आँसू
बहाना
हो
रहा
है
जो
कभी
मेरा
दिवाना
था
बहुत
वो
ग़ैर
का
देखो
दिवाना
हो
रहा
है
फूल
ताज़ा
है
महीनों
बाद
भी
पर
इश्क़
लगता
है
पुराना
हो
रहा
है
आँसुओं
को
कब
तलक
पीता
रहूँ
सो
मयकदों
में
रोज़
जाना
हो
रहा
है
- Ravi 'VEER'
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निगाह-ए-शोख़
का
क़ैदी
नहीं
है
कौन
यहाँ
किसे
तमन्ना
नहीं
फूल
चूमने
को
मिले
Aks samastipuri
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तुमने
जो
फूल
लेते
में
छू
लीं
हैं
उंगलियाँ
मेरे
बदन
से
आएगी
ख़ुशबू
गुलाब
की
Siddharth Saaz
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अपने
होंटों
से
कहो
फूल
को
चू
में
हर
रोज़
जब
मेरे
लब
नहीं
होंगे
तो
सहूलत
होगी
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Shahbaz Rizvi
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पैर
के
छालों
में
चुभते
हैं
हजारों
काँटें
फूल
तब
बाग
में
शायान
हुआ
करते
हैं
Aves Sayyad
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वक़्त
ही
कम
था
फ़ैसले
के
लिए
वर्ना
मैं
आता
मशवरे
के
लिए
तुम
को
अच्छे
लगे
तो
तुम
रख
लो
फूल
तोड़े
थे
बेचने
के
लिए
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Zia Mazkoor
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उम्र
गुज़री
है
माँजते
ख़ुद
को
साफ़
हैं
पर
चमक
नहीं
पाए
डाल
ने
फूल
की
तरह
पाला
ख़ार
थे
ना
महक
नहीं
पाए
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Vishal Bagh
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मिरे
ही
वास्ते
लाया
है
दोनो
फूल
और
ख़ंजर
मुझे
ये
देखना
है
बस
वो
पहले
क्या
उठाता
है
Parul Singh "Noor"
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आदतन
उसके
लिए
फूल
ख़रीदे
वरना
नहीं
मालूम
वो
इस
बार
यहाँ
है
कि
नहीं
Abbas Tabish
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उसकी
तरफ़
से
फूल
भी
आएँगे
एक
रोज़
पत्थर
उठा
के
चूम
ले
इसको
पहल
समझ
Munawwar Rana
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सूख
जाता
जल्द
है
फिर
भी
निशानी
के
लिए
फूल
इक
छुप
के
किताबों
में
छिपाना
इश्क़
है
Parul Singh "Noor"
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मैं
सच
कहता
हूँ
अब
वो
मर
भी
जाए
तो
मेरी
जानिब
से
कोई
इशारा
नईं
होगा
Ravi 'VEER'
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जिस
तरह
पत्ते
गिरे
है
शाख़
से
ठीक
वैसे
ही
गिरा
हूँ
यार
मैं
नासमझ
था
मैं
बहुत
पहले
मगर
अब
बहुत
ही
सरफिरा
हूँ
यार
मैं
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Ravi 'VEER'
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आत्मा
के
इक
नहीं
सौ-सौ
ठिकाने
है
मगर
देह
का
निश्चित
है
जाना
एक
दिन
शमशान
में
Ravi 'VEER'
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सब
सेे
हँसकर
मिलना
उसकी
आदत
थी
मुझको
लगता
था
मेरी
दीवानी
है
Ravi 'VEER'
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पढ़ने
को
है
बहुत
किताबें
पास
मगर
हैरत
है,
मैं
उसकी
आँखें
पढ़ता
हूँ
Ravi 'VEER'
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