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Ravi 'VEER'
aatma ke ik nahin sau-sau thikaane hai magar
aatma ke ik nahin sau-sau thikaane hai magar | आत्मा के इक नहीं सौ-सौ ठिकाने है मगर
- Ravi 'VEER'
आत्मा
के
इक
नहीं
सौ-सौ
ठिकाने
है
मगर
देह
का
निश्चित
है
जाना
एक
दिन
शमशान
में
- Ravi 'VEER'
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तुम्हारी
याद
में
सागर
मिरी
आँखों
से
बहते
हैं
मुहब्बत
में
मिरी
जाना
हम
इतना
दर्द
सहते
हैं
Ravi 'VEER'
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अब
कहाँ
मिलना
मिलाना
हो
रहा
है
अब
न
उन
गलियों
में
जाना
हो
रहा
है
आँख
से
दीदार
करना
था
मगर
अब
आँख
से
आँसू
बहाना
हो
रहा
है
जो
कभी
मेरा
दिवाना
था
बहुत
वो
ग़ैर
का
देखो
दिवाना
हो
रहा
है
फूल
ताज़ा
है
महीनों
बाद
भी
पर
इश्क़
लगता
है
पुराना
हो
रहा
है
आँसुओं
को
कब
तलक
पीता
रहूँ
सो
मयकदों
में
रोज़
जाना
हो
रहा
है
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Ravi 'VEER'
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सुख
दुख
की
पैमाइश
की
तो
ये
जाना
काँटो
पर
चलकर
फूलों
पर
सोना
है
Ravi 'VEER'
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चाँद
इशारे
करता
है
उसको
लेकिन
वो
छत
से
बस
मुझको
देखा
करती
है
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डर
मुझे
मेरी
मुहब्बत
एक
दिन
खो
जाएगी
यार
मुझको
लग
रहा
वो
ग़ैर
की
हो
जाएगी
मैं
सभी
वादे
पुराने
ही
निभाते
जाऊँगा
और
वो
जाकर
किसी
की
बाँह
में
सो
जाएगी
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Ravi 'VEER'
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