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Ravi 'VEER'
sukh dukh ki paimaish ki to ye jaana
sukh dukh ki paimaish ki to ye jaana | सुख दुख की पैमाइश की तो ये जाना
- Ravi 'VEER'
सुख
दुख
की
पैमाइश
की
तो
ये
जाना
काँटो
पर
चलकर
फूलों
पर
सोना
है
- Ravi 'VEER'
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लाखों
सद
में
ढेरों
ग़म
फिर
भी
नहीं
हैं
आँखें
नम
इक
मुद्दत
से
रोए
नहीं
क्या
पत्थर
के
हो
गए
हम
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Azm Shakri
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मेरे
नादाँ
दिल
उदासी
कोई
अच्छी
शय
नहीं
देख
सूखे
फूल
पर
आती
नहीं
हैं
तितलियाँ
Deepak Vikal
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अपनी
तबाहियों
का
मुझे
कोई
ग़म
नहीं
तुम
ने
किसी
के
साथ
मोहब्बत
निभा
तो
दी
Sahir Ludhianvi
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उदास
लोग
इसी
बात
से
हैं
ख़ुश
कि
चलो
हमारे
साथ
हुए
हादसों
की
बात
हुई
Abhishar Geeta Shukla
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दूजों
का
दुख
समझने
को
बे
हद
ज़रूरी
है
थोड़ी
सही
प
दिल
में
अज़ीयत
बनी
रहे
Afzal Ali Afzal
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जब
भी
आता
है
दिसम्बर
ग़म
के
टाँके
खुलते
हैं
याद
है
यूँँ
तेरा
जाना
और
कहना
ख़ुश
रहो
Neeraj Neer
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यही
बहुत
है
मिरे
ग़म
में
तुम
शरीक
हुए
मैं
हॅंस
पड़ूँगा
अगर
तुमने
अब
दिलासा
दिया
Imran Aami
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उम्र
भर
मेरी
उदासी
के
लिए
काफ़ी
है
जो
सबब
मेरी
ख़मोशी
के
लिए
काफ़ी
है
जान
दे
देंगे
अगर
आप
कहेंगे
हम
सेे
जान
देना
ही
मु'आफ़ी
के
लिए
काफ़ी
है
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Aakash Giri
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दुख
तो
बहुत
मिले
हैं
मोहब्बत
नहीं
मिली
यानी
कि
जिस्म
मिल
गया
औरत
नहीं
मिली
मुझको
पिता
की
आँख
के
आँसू
तो
मिल
गए
मुझको
पिता
से
ज़ब्त
की
आदत
नहीं
मिली
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Abhishar Geeta Shukla
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हम
ऐसे
लोग
भी
जाने
कहाँ
से
आते
हैं
ख़ुशी
में
रोते
हैं
जो
ग़म
में
मुस्कुराते
हैं
हमारा
साथ
भला
कब
तलक
निभाते
आप
कभी
कभी
तो
हमीं
ख़ुद
से
ऊब
जाते
हैं
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Mohit Dixit
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अब
मुहब्बत
की
दु'आ
मत
दीजिये
जो
हुआ
इक
हादसा
काफ़ी
रहा
Ravi 'VEER'
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तितलियों
की
थी
ज़रूरत
सो
उसे
रक्खा
मगर
वो
बग़ीचे
के
सभी
फूलों
को
पत्थर
कर
गया
Ravi 'VEER'
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इज़हार
पर
उनके
कभी
इक़रार
मत
करना
यहाँ
जिनके
लबों
पर
इश्क़
हो
पर
दिल
हवस
में
चूर
हो
Ravi 'VEER'
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देखतें
हैं
और
कितना
ग़म
सहूँगा
मैं
मौत
तो
तय
है
मगर
कैसे
मरूँगा
मैं
इश्क़
तो
मेरा
मुकम्मल
हो
नहीं
पाया
सोचता
हूँ
ज़िन्दगी
में
क्या
करूँँगा
मैं
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Ravi 'VEER'
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कब
मैं
अच्छे
शे'र
यहाँ
कह
पाऊँगा
कब
मुझको
सुनना
चाहेगा
हर
कोई
Ravi 'VEER'
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