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Ravi 'VEER'
dekhten hain aur kitna gham sahunga main
dekhten hain aur kitna gham sahunga main | देखतें हैं और कितना ग़म सहूँगा मैं
- Ravi 'VEER'
देखतें
हैं
और
कितना
ग़म
सहूँगा
मैं
मौत
तो
तय
है
मगर
कैसे
मरूँगा
मैं
इश्क़
तो
मेरा
मुकम्मल
हो
नहीं
पाया
सोचता
हूँ
ज़िन्दगी
में
क्या
करूँँगा
मैं
- Ravi 'VEER'
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धूप
में
निकलो
घटाओं
में
नहा
कर
देखो
ज़िंदगी
क्या
है
किताबों
को
हटा
कर
देखो
Nida Fazli
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शोर
की
इस
भीड़
में
ख़ामोश
तन्हाई
सी
तुम
ज़िन्दगी
है
धूप
तो
मद-मस्त
पुर्वाई
सी
तुम
चाहे
महफ़िल
में
रहूँ
चाहे
अकेले
में
रहूँ
गूँजती
रहती
हो
मुझ
में
शोख़
शहनाई
सी
तुम
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Kunwar Bechain
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दुख
की
दीमक
अगर
नहीं
लगती
ज़िन्दगी
किस
क़द्र
हसीं
लगती
वस्ल
को
लॉटरी
समझता
हूँ
लॉटरी
रोज़
तो
नहीं
लगती
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Azbar Safeer
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कुछ
दिन
से
ज़िंदगी
मुझे
पहचानती
नहीं
यूँँ
देखती
है
जैसे
मुझे
जानती
नहीं
Anjum Rehbar
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तुम्हारी
मौत
मेरी
ज़िंदगी
से
बेहतर
है
तुम
एक
बार
मरे
मैं
तो
बार
बार
मरा
Zubair Ali Tabish
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ज़िन्दगी
से
ऐसे
काटा
सीन
उसने
इश्क़
का
देखता
है
कोई
जैसे
फ़िल्म
गाने
काट
कर
Ankit Maurya
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जो
गुज़ारी
न
जा
सकी
हम
से
हम
ने
वो
ज़िन्दगी
गुज़ारी
है
Jaun Elia
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हम
भी
क्या
ज़िंदगी
गुज़ार
गए
दिल
की
बाज़ी
लगा
के
हार
गए
Dagh Dehlvi
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अब
ज़िन्दगी
से
कोई
मिरा
वास्ता
नहीं
पर
ख़ुद-कुशी
भी
कोई
सही
रास्ता
नहीं
Rahul
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मुझे
चाह
थी
किसी
और
की,
प
मुझे
मिला
कोई
और
है
मेरी
ज़िन्दगी
का
है
और
सच,
मेरे
ख़्वाब
सा
कोई
और
है
तू
क़रीब
था
मेरे
जिस्म
के,
बड़ा
दूर
था
मेरी
रूह
से
तू
मेरे
लिए
मेरे
हमनशीं
कोई
और
था
कोई
और
है
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Avtar Singh Jasser
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आत्मा
के
इक
नहीं
सौ-सौ
ठिकाने
है
मगर
देह
का
निश्चित
है
जाना
एक
दिन
शमशान
में
Ravi 'VEER'
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होश
में
रहे
कैसे
इश्क़
का
नशा
करके
होश
जो
हमें
आए
फिर
नशा
बुलाता
है
Ravi 'VEER'
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बताओ
बस
दिसम्बर
क्यूँ
चुना
है
दर्द
सहने
को
पिघलते
जून
में
आँखों
से
क्या
आँसू
नहीं
आते
Ravi 'VEER'
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क्या
हो
गर
गुमनाम
ख़ज़ाने
मिल
जाएँ
यानी
फिर
वो
यार
पुराने
मिल
जाएँ
जिनके
साथ
में
गुज़रा
बचपन
सारा,
वो
मिल
जाएँ
तो
यार
ज़माने
मिल
जाएँ
मंज़िल
की
ख़ातिर
जो
निकले
हैं
घर
से
उनको
मंज़िल
ठौर
ठिकाने
मिल
जाएँ
चाय
के
प्याले
भी
करते
हैं
याद
उन्हें
कहते
हैं
इक
बार
दीवाने
मिल
जाएँ
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Ravi 'VEER'
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इन
आँखों
को
ताजमहल
क्या
भाएगा
इन
आँखों
ने
उसका
चेहरा
देखा
है
Ravi 'VEER'
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