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Ravi 'VEER'
titliyon ki thii zaroorat so use rakha magar
titliyon ki thii zaroorat so use rakha magar | तितलियों की थी ज़रूरत सो उसे रक्खा मगर
- Ravi 'VEER'
तितलियों
की
थी
ज़रूरत
सो
उसे
रक्खा
मगर
वो
बग़ीचे
के
सभी
फूलों
को
पत्थर
कर
गया
- Ravi 'VEER'
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वैसे
तो
ज़ेवरों
की
ज़रूरत
नहीं
तुझे
फिर
भी
अगर
ये
फूल
तेरे
काम
आ
सके
Charagh Sharma
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फूल
खिले
हैं
लिखा
हुआ
है
तोड़ो
मत
और
मचल
कर
जी
कहता
है
छोड़ो
मत
Ameeq Hanafi
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घर
की
तक़सीम
में
अँगनाई
गँवा
बैठे
हैं
फूल
गुलशन
से
शनासाई
गँवा
बैठे
हैं
बात
आँखों
से
समझ
लेने
का
दावा
मत
कर
हम
इसी
शौक़
में
बीनाई
गँवा
बैठे
हैं
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Abrar Kashif
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तोहफ़ा,
फूल,
शिकायत,
कुछ
तो
लेकर
जा
इश्क़
से
मिलने
ख़ाली
हाथ
नहीं
जाते
Tanoj Dadhich
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बोसा
जो
रुख़
का
देते
नहीं
लब
का
दीजिए
ये
है
मसल
कि
फूल
नहीं
पंखुड़ी
सही
Sheikh Ibrahim Zauq
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इक
कली
की
पलकों
पर
सर्द
धूप
ठहरी
थी
इश्क़
का
महीना
था
हुस्न
की
दुपहरी
थी
ख़्वाब
याद
आते
हैं
और
फिर
डराते
हैं
जागना
बताता
है
नींद
कितनी
गहरी
थी
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Vikram Gaur Vairagi
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होली
है
या
फिर
फूलों
का
मौसम
है
सब
के
चेहरों
पे
रंग
है
ख़ुशबू
भी
है
Meem Alif Shaz
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काँटों
में
घिरे
फूल
को
चूम
आएगी
लेकिन
तितली
के
परों
को
कभी
छिलते
नहीं
देखा
Parveen Shakir
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जहाँ
पे
मैंने
तुझे
पहली
बार
देखा
था
वहाँ
पे
फूल
रखे
मैंने,
उम्र
भर
रक्खे
Aslam Rashid
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आज
भी
शायद
कोई
फूलों
का
तोहफ़ा
भेज
दे
तितलियाँ
मंडला
रही
हैं
काँच
के
गुल-दान
पर
Shakeb Jalali
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इतना
यक़ीं
ख़ुदा
ने
तुमको
तराश
कर
फिर
इक
बार
हाथ
अपने
चू
में
ज़रूर
होंगे
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Ravi 'VEER'
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इज़हार
पर
उनके
कभी
इक़रार
मत
करना
यहाँ
जिनके
लबों
पर
इश्क़
हो
पर
दिल
हवस
में
चूर
हो
Ravi 'VEER'
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डगर
मुश्किल
मगर
है
हौसले
पुरज़ोर
सीने
में
रगों
में
रक्त
है
उबला
मचा
है
शोर
सीने
में
सफ़र
में
मुश्किलें
क्या
ख़ाक
रोकेगी
मेरा
रस्ता
नज़र
में
मंज़िलें
और
आग
है
घनघोर
सीने
में
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Ravi 'VEER'
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ख़ून
पसीना
दोनों
मिलकर
रोटी
बनके
आते
हैं
तब
जाकर
के
रोज़
हमारी
भूख
कहीं
मिट
पाती
है
Ravi 'VEER'
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आख़िर
कैसे
ये
लोग
है
कैसी
ये
मक्कारी
करते
है
माँ
पर
लिखने
वाले
ही
अब
माँ
से
गद्दारी
करते
है
Ravi 'VEER'
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