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Ravi 'VEER'
izhaar par unke kabhi iqraar mat karna yahaañ
izhaar par unke kabhi iqraar mat karna yahaañ | इज़हार पर उनके कभी इक़रार मत करना यहाँ
- Ravi 'VEER'
इज़हार
पर
उनके
कभी
इक़रार
मत
करना
यहाँ
जिनके
लबों
पर
इश्क़
हो
पर
दिल
हवस
में
चूर
हो
- Ravi 'VEER'
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दो
नन्हीं
कलियों
ने
रोक
लिया
वरना
तितली
ने
तो
आज
धतूरा
खाना
था
Shruti chhaya
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इशरत-ए-क़तरा
है
दरिया
में
फ़ना
हो
जाना
दर्द
का
हद
से
गुज़रना
है
दवा
हो
जाना
Mirza Ghalib
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वो
आ
रहे
हैं,
वो
आते
हैं,
आ
रहे
होंगे
शब-ए-फ़िराक़
ये
कह
कर
गुज़ार
दी
हम
ने
Faiz Ahmad Faiz
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चढ़ते
हुवे
ए
शम्स
दिखा
ताव
भी
मगर
ये
जान
ले
कि
शाम
ढले
डूब
जाएगा
Afzal Ali Afzal
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जो
भी
होना
था
हो
गया
छोड़ो
अब
मैं
चलता
हूँ
रास्ता
छोड़ो
अब
तो
दुनिया
भी
देख
ली
तुमने
अब
तो
ख़्वाबों
को
देखना
छोड़ो
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Vikram Sharma
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पैग़ाम-ए-हयात-ए-जावेदाँ
था
हर
नग़्मा-ए-कृष्ण
बाँसुरी
का
Hasrat Mohani
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किसी
ने
मुफ्त
में
वो
शख़्स
पाया
जो
हर
कीमत
पे
मुझको
चाहिए
था
Uzair Hijazi
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रोज़
रोने
के
बहाने
ढूँढ़ते
है
बेबसी
से
अपने
रिश्ते
ख़ून
के
है
देख
लेंगे
फिर
ग़लत
क्या
है
सही
क्या
आ
अभी
इक
दूसरे
को
चूमते
है
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Aman Mishra 'Anant'
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लड़कियों
के
दुख
अजब
होते
हैं
सुख
उस
से
अजीब
हँस
रही
हैं
और
काजल
भीगता
है
साथ
साथ
Parveen Shakir
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जबकि
मैंने
इश्क़
में
मरने
का
वा'दा
कर
लिया
तब
लगा
मुझको
कि
मैंने
इश्क़
ज़्यादा
कर
लिया
Siddharth Saaz
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तेरे
इनकार
का
रत्ती
ज़रा
भी
ग़म
नहीं
मुझको
मगर
मुझको
तेरे
बर्ताव
पर
रोना
बहुत
आया
Ravi 'VEER'
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सबको
केवल
अपनी
चिंता
होती
है
मैं
ही
शायद
सबकी
चिंता
करता
हूँ
Ravi 'VEER'
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क्या
हो
गर
गुमनाम
ख़ज़ाने
मिल
जाएँ
यानी
फिर
वो
यार
पुराने
मिल
जाएँ
जिनके
साथ
में
गुज़रा
बचपन
सारा,
वो
मिल
जाएँ
तो
यार
ज़माने
मिल
जाएँ
मंज़िल
की
ख़ातिर
जो
निकले
हैं
घर
से
उनको
मंज़िल
ठौर
ठिकाने
मिल
जाएँ
चाय
के
प्याले
भी
करते
हैं
याद
उन्हें
कहते
हैं
इक
बार
दीवाने
मिल
जाएँ
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Ravi 'VEER'
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महीनों
बाद
आया
है
महीना
प्यार
का
लेकिन
महीनों
से
मेरा
महबूब
दर
मेरे
नहीं
आया
Ravi 'VEER'
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अदू
होते
रहे
अहबाब
कैसी
ये
करिश्माई,
इसी
तदबीर
में
मैं
रोज़
सुब्ह-ओ-शाम
रहता
था।
Ravi 'VEER'
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