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Ravi 'VEER'
aakhir kaise ye log hai kaisi ye makkaari karte hai
aakhir kaise ye log hai kaisi ye makkaari karte hai | आख़िर कैसे ये लोग है कैसी ये मक्कारी करते है
- Ravi 'VEER'
आख़िर
कैसे
ये
लोग
है
कैसी
ये
मक्कारी
करते
है
माँ
पर
लिखने
वाले
ही
अब
माँ
से
गद्दारी
करते
है
- Ravi 'VEER'
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जब
चली
ठंडी
हवा
बच्चा
ठिठुर
कर
रह
गया
माँ
ने
अपने
ला'ल
की
तख़्ती
जला
दी
रात
को
Sibt Ali Saba
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इक
लड़की
है
जो
इकदम
घर
जैसी
है
वो
बिल्कुल
माँ
जैसी
बातें
करती
है
Siddharth Saaz
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बोझ
उठाए
हुए
फिरती
है
हमारा
अब
तक
ऐ
ज़मीं
माँ
तिरी
ये
उम्र
तो
आराम
की
थी
Parveen Shakir
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ये
मख़मली
गद्दे
तो
तुझको
ही
मुबारक
हों
ऐ
दोस्त
मुझे
बस
माँ
की
गोद
ही
काफ़ी
है
Harsh saxena
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मुझ
सेे
बेहतर
लड़का
तो
मिल
जाएगा
लेकिन
मेरी
माँ
से
बेहतर
सास
नहीं
Tanoj Dadhich
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हमने
जिस
मासूम
परी
को
अपने
दिल
की
जाँ
बोला
था
उसने
हमको
धोखा
देकर
और
किसी
को
हाँ
बोला
था
सारे
वादे
भूल
गई
तुम
कोई
बात
नहीं
जानेमन
लेकिन
ये
कैसे
भूली
तुम
मेरी
माँ
को
माँ
बोला
था
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Tanoj Dadhich
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मुझे
आँखें
दिखाकर
बोलती
है
चुप
रहो
भैया
बहिन
छोटी
भले
हो
बात
वो
अम्मा
सी
करती
है
Divy Kamaldhwaj
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मुझे
मालूम
है
माँ
की
दुआएँ
साथ
चलती
हैं
सफ़र
की
मुश्किलों
को
हाथ
मलते
मैंने
देखा
है
Aalok Shrivastav
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अलमास
धरे
रह
जाते
हैं
बिकता
है
तो
पत्थर
बिकता
है
अजनास
नहीं
इस
दुनिया
में
इंसाँ
का
मुक़द्दर
बिकता
है
'खालिद
सज्जाद'
सुनार
हूँ
मैं
इस
ग़म
को
ख़ूब
समझता
हूँ
जब
बेटा
छुप
कर
रोता
है
तब
माँ
का
ज़ेवर
बिकता
है
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Khalid Sajjad
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एक
मुद्दत
से
मिरी
माँ
नहीं
सोई
'ताबिश'
मैं
ने
इक
बार
कहा
था
मुझे
डर
लगता
है
Abbas Tabish
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लोग
कहते
है
कि
ज़हर
होता
है
इश्क़
फिर
भी
हमें
हर
पहर
होता
है
इश्क़
हमें
इश्क़
ख़ुदा
की
इबादत
लगती
है
कभी
कभी
लगा,
ख़ुदा
का
कहर
होता
है
इश्क़
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Ravi 'VEER'
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आज
ये
कल
वो
डगर
करते
नहीं
मुफ़लिसी
में
हम
सफ़र
करते
नहीं
उम्र
छोटी
थी
वगरना
यार
हम
इश्क़
तुम
सेे
इस
कदर
करते
नहीं
गर
पता
होता
हमें
अंजाम
तो
हम
नज़र
अपनी
उधर
करते
नहीं
इश्क़
दो
तरफ़ा
रहा
होता
तो
हम
आँख
अपनी
तर-बतर
करते
नहीं
ज़िंदगी
गर
जो
सुनाती
लोरियाँ
मौत
तुझको
हम
ख़बर
करते
नहीं
'वीर'
चाहत
से
अगर
मिलता
कोई
हम
दु'आ
शाम-ओ-सहर
करते
नहीं
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Ravi 'VEER'
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मैं
अकेला
ही
नहीं
था
इश्क़
में
जो
लिखे
उसने
वो
ख़त
भी
देखिए
काग़ज़ी
है
इश्क़
अब
तो
मानिए
काग़ज़ों
पर
दस्तख़त
भी
देखिए
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Ravi 'VEER'
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कल
अचानक
वाक़िया
ये
हो
गया
मैं
तबस्सुम
देख
उसकी
खो
गया
उसकी
आँखें
नींद
मेरी
ले
गई
फिर
न
जाने
कब
सवेरा
हो
गया
वो
वहाँ
बिस्तर
में
सोई
थी
मगर
एक
पागल
सीढ़ियों
पर
सो
गया
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Ravi 'VEER'
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हर
गली
में
चाँद
अब
मिल
जाएगा
यारो
यहाँ
सो
कौन
चाहेगा
सितारों
को
भला
इस
भीड़
में
अब
Ravi 'VEER'
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