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Ravi 'VEER'
aaj ye kal vo dagar karte nahin
aaj ye kal vo dagar karte nahin | आज ये कल वो डगर करते नहीं
- Ravi 'VEER'
आज
ये
कल
वो
डगर
करते
नहीं
मुफ़लिसी
में
हम
सफ़र
करते
नहीं
उम्र
छोटी
थी
वगरना
यार
हम
इश्क़
तुम
सेे
इस
कदर
करते
नहीं
गर
पता
होता
हमें
अंजाम
तो
हम
नज़र
अपनी
उधर
करते
नहीं
इश्क़
दो
तरफ़ा
रहा
होता
तो
हम
आँख
अपनी
तर-बतर
करते
नहीं
ज़िंदगी
गर
जो
सुनाती
लोरियाँ
मौत
तुझको
हम
ख़बर
करते
नहीं
'वीर'
चाहत
से
अगर
मिलता
कोई
हम
दु'आ
शाम-ओ-सहर
करते
नहीं
- Ravi 'VEER'
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शौक़,लत,आवारगी,अय्याशी
में
गुज़री
हमारी
ज़िन्दगी
अब
तू
मुनासिब
सी
सज़ा
दे
गिनती
करके
Kartik tripathi
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दुख
की
दीमक
अगर
नहीं
लगती
ज़िन्दगी
किस
क़द्र
हसीं
लगती
वस्ल
को
लॉटरी
समझता
हूँ
लॉटरी
रोज़
तो
नहीं
लगती
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Azbar Safeer
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जुदा
हुए
हैं
बहुत
लोग
एक
तुम
भी
सही
अब
इतनी
बात
पे
क्या
ज़िंदगी
हराम
करें
Nasir Kazmi
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ज़िंदगी
क्या
किसी
मुफ़लिस
की
क़बा
है
जिस
में
हर
घड़ी
दर्द
के
पैवंद
लगे
जाते
हैं
Faiz Ahmad Faiz
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किया
बादलों
में
सफ़र
ज़िंदगी
भर
ज़मीं
पर
बनाया
न
घर
ज़िंदगी
भर
सभी
ज़िंदगी
के
मज़े
लूटते
हैं
न
आया
हमें
ये
हुनर
ज़िंदगी
भर
मोहब्बत
रही
चार
दिन
ज़िंदगी
में
रहा
चार
दिन
का
असर
ज़िंदगी
भर
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Anwar Shaoor
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मुझे
चाह
थी
किसी
और
की,
प
मुझे
मिला
कोई
और
है
मेरी
ज़िन्दगी
का
है
और
सच,
मेरे
ख़्वाब
सा
कोई
और
है
तू
क़रीब
था
मेरे
जिस्म
के,
बड़ा
दूर
था
मेरी
रूह
से
तू
मेरे
लिए
मेरे
हमनशीं
कोई
और
था
कोई
और
है
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Avtar Singh Jasser
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हम
भी
क्या
ज़िंदगी
गुज़ार
गए
दिल
की
बाज़ी
लगा
के
हार
गए
Dagh Dehlvi
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कुछ
बेटियाँ
बिन
बाप
के
भी
काटती
हैं
ज़िंदगी
कुछ
बेटियों
के
सिर
पे
दोनों
हाथ
माँ
के
होते
हैं
Bhoomi Srivastava
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मैं
ने
आबाद
किए
कितने
ही
वीराने
'हफ़ीज़'
ज़िंदगी
मेरी
इक
उजड़ी
हुई
महफ़िल
ही
सही
Hafeez Banarasi
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ज़िंदगी
एक
फ़न
है
लम्हों
को
अपने
अंदाज़
से
गँवाने
का
Jaun Elia
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सब
सेे
हँसकर
मिलना
उसकी
आदत
थी
मुझको
लगता
था
मेरी
दीवानी
है
Ravi 'VEER'
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तेरे
इनकार
का
रत्ती
ज़रा
भी
ग़म
नहीं
मुझको
मगर
मुझको
तेरे
बर्ताव
पर
रोना
बहुत
आया
Ravi 'VEER'
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बच्चे
मेरी
गली
के
पढ़ने
लगे
है
गज़लें
कैसे
लगी
ये
आदत
ये
कौन
जानता
है
Ravi 'VEER'
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तुम्हारी
याद
में
सागर
मिरी
आँखों
से
बहते
हैं
मुहब्बत
में
मिरी
जाना
हम
इतना
दर्द
सहते
हैं
Ravi 'VEER'
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बादल
भी
उसके
दीवाने
लगते
हैं
वो
घर
से
निकले
तो
बारिश
होती
हैं
Ravi 'VEER'
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