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Ravi 'VEER'
baadal bhi uske deewane lagte hain
baadal bhi uske deewane lagte hain | बादल भी उसके दीवाने लगते हैं
- Ravi 'VEER'
बादल
भी
उसके
दीवाने
लगते
हैं
वो
घर
से
निकले
तो
बारिश
होती
हैं
- Ravi 'VEER'
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तुम्हें
मैं
क्या
बताऊँ
इस
शहर
का
हाल
कैसा
है
यहाँ
बारिश
तो
होती
है
मगर
सावन
नहीं
आता
Bhaskar Shukla
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रात
हो,
चाँद
हो,
बारिश
भी
हो
और
तुम
भी
हो
ऐसा
मुमकिन
ही
नहीं
है
कि
कभी
हो
मिरे
साथ
Faiz Ahmad
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ख़्वाब
पलकों
की
हथेली
पे
चुने
रहते
हैं
कौन
जाने
वो
कभी
नींद
चुराने
आए
मुझ
पे
उतरे
मेरे
अल्हाम
की
बारिश
बन
कर
मुझ
को
इक
बूॅंद
समुंदर
में
छुपाने
आए
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Khalil Ur Rehman Qamar
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अब
के
सावन
में
शरारत
ये
मिरे
साथ
हुई
मेरा
घर
छोड़
के
कुल
शहर
में
बरसात
हुई
Gopaldas Neeraj
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बारिश
हो
जाने
के
बाद
भी
मिट्टी
गीली
रहती
है
मैं
तेरे
जाने
के
बाद
भी
तुझ
सेे
बातें
करता
हूँ
Siddharth Saaz
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तुझे
करनी
है
तो
मुसावात
कर
कि
बेहतर
हमारे
भी
हालात
कर
मिटा
दिल
में
बनते
ये
सहराओं
को
ख़ुदा
अपने
बन्दों
पे
बरसात
कर
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Siddharth Saaz
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आँख
भर
आई
किसी
से
जो
मुलाक़ात
हुई
ख़ुश्क
मौसम
था
मगर
टूट
के
बरसात
हुई
Manzar Bhopali
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धूप
तो
धूप
ही
है
इसकी
शिकायत
कैसी
अब
की
बरसात
में
कुछ
पेड़
लगाना
साहब
Nida Fazli
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धूप
में
कौन
किसे
याद
किया
करता
है
पर
तिरे
शहर
में
बरसात
तो
होती
होगी
Ameer Imam
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जाने
कैसे
ख़ुश
रहने
की
आदत
डाली
जाती
है
उनके
यहाँ
तो
बारिश
में
भी
धूप
निकाली
जाती
है
Ritesh Rajwada
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मुझको
नशा
है
इक
बस
उसकी
निगाह
का
सो
ये
बोतलें
ये
सिगरेट
अब
काम
की
नहीं
हैं
Ravi 'VEER'
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पढ़ने
को
है
बहुत
किताबें
पास
मगर
हैरत
है,
मैं
उसकी
आँखें
पढ़ता
हूँ
Ravi 'VEER'
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ज़ख़्म
कईं
दे
जाते
है
बैरी
लेकिन
ज़ख़्म
दिया
यारों
का
गहरा
लगता
है
Ravi 'VEER'
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कब
तक
चलेंगे
वो
ही
अफ़साने
ज़माने
में
कहो
कब
तक
चलेगा
दौर
इक
तरफा
मुहब्बत
का
यहाँ
कब
तक
मिलेगा
हीर
को
राँझा
बताओ
ये
मुझे
कब
तक
सहे
मजनूँ
भला
ग़म
रंज-ए-उल्फ़त
का
यहाँ
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Ravi 'VEER'
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अगर
खुशियाँ
मुकद्दर
में
रही
तो
ग़म
भी
आएँगे
अगर
आएँगे
हिस्से
ज़ख़्म
तो
मरहम
भी
आएँगे
Ravi 'VEER'
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