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Ravi 'VEER'
mujhko nasha hai ik bas uski nigaah ka so
mujhko nasha hai ik bas uski nigaah ka so | मुझको नशा है इक बस उसकी निगाह का सो
- Ravi 'VEER'
मुझको
नशा
है
इक
बस
उसकी
निगाह
का
सो
ये
बोतलें
ये
सिगरेट
अब
काम
की
नहीं
हैं
- Ravi 'VEER'
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किस
से
जा
कर
माँगिये
दर्द-ए-मोहब्बत
की
दवा
चारा-गर
अब
ख़ुद
ही
बेचारे
नज़र
आने
लगे
Shakeel Badayuni
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मुझे
भी
बख़्श
दे
लहजे
की
ख़ुशबयानी
सब
तेरे
असर
में
हैं
अल्फ़ाज़
सब,
म'आनी
सब
मेरे
बदन
को
खिलाती
है
फूल
की
मानिंद
कि
उस
निगाह
में
है
धूप,
छाँव,
पानी
सब
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Subhan Asad
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तूफ़ानों
से
आँख
मिलाओ
सैलाबों
पे
वार
करो
मल्लाहों
का
चक्कर
छोड़ो
तैर
के
दरिया
पार
करो
Rahat Indori
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मुझ
पर
निगाह-ए-नाज़
का
जब
जादू
चल
गया
मैं
रफ़्ता
रफ़्ता
क़ैस
की
सोहबत
में
ढल
गया
ज़ुल्फें
उन्होंने
खोल
के
बिखराई
थी
शजर
फिर
देखते
ही
देखते
मौसम
बदल
गया
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Shajar Abbas
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तुम्हें
देखे
ज़माना
हो
गया
है
नज़र
महके
ज़माना
हो
गया
है
बिछड़के
तुम
सेे
आँखें
बुझ
गई
हैं
ये
दिल
धड़के
ज़माना
हो
गया
है
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Subhan Asad
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वफ़ा
नज़र
नहीं
आती
कहीं
ज़माने
में
वफ़ा
का
ज़िक्र
किताबों
में
देख
लेते
हैं
Hafeez Banarasi
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देखो
तो
चश्म-ए-यार
की
जादू-निगाहियाँ
बेहोश
इक
नज़र
में
हुई
अंजुमन
तमाम
Hasrat Mohani
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भटकती
फिर
रही
है
आँख
घर
में
तिरी
आवाज़
इसको
दिख
रही
है
Himanshu Kiran Sharma
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फिर
किसी
के
सामने
चश्म-ए-तमन्ना
झुक
गई
शौक़
की
शोख़ी
में
रंग-ए-एहतराम
आ
ही
गया
Asrar Ul Haq Majaz
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आँख
भर
आई
किसी
से
जो
मुलाक़ात
हुई
ख़ुश्क
मौसम
था
मगर
टूट
के
बरसात
हुई
Manzar Bhopali
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हमें
मालूम
कुछ
हाँसिल
नहीं
होगा
मगर
फिर
भी
तेरी
गलियों
में
घू
में
हम
शहर
में
थी
कईं
गलियां
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Ravi 'VEER'
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जुर्म
में
शामिल
रहेंगे
खिड़कियाँ,
दीवार,
छत
और
फिर
औरत
की
अस्मत
कुंडियाँ
ले
जाएंगी
Ravi 'VEER'
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हाथ
पकड़
कर
हम
दोनों
इक
काम
करें
रफ़्ता-रफ़्ता
ग़म
ख़ुशियों
के
नाम
करें
Ravi 'VEER'
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सूरत
देखूँ,
आँखें
देखूँ,
ज़ुल्फ़ें
देखूँ,
क्या
देखूँ
कैसे
इन
आँखों
से
मैं
इक
बार
उसे
पूरा
देखूँ
Ravi 'VEER'
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ज़ख़्म
क्या
होगा
जहाँ
में
और
कोई
दूसरा
बाप
के
शाने
अगर
मरघट
को
बेटा
चल
पड़े
Ravi 'VEER'
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