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Amanpreet singh
bhala un bacchon ko achha lagega kya
bhala un bacchon ko achha lagega kya | भला उन बच्चों को अच्छा लगेगा क्या
- Amanpreet singh
भला
उन
बच्चों
को
अच्छा
लगेगा
क्या
जिन्हें
तब
दुनिया
दिखती
थी
ग़ुबारे
में
- Amanpreet singh
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अपनी
दुनिया
भी
चल
पड़े
शायद
इक
रुका
फ़ैसला
किया
जाए
Madan Mohan Danish
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तू
किसी
और
ही
दुनिया
में
मिली
थी
मुझ
सेे
तू
किसी
और
ही
मौसम
की
महक
लाई
थी
डर
रहा
था
कि
कहीं
ज़ख़्म
न
भर
जाएँ
मेरे
और
तू
मुट्ठियाँ
भर-भर
के
नमक
लाई
थी
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Tehzeeb Hafi
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ये
नदी
वर्ना
तो
कब
की
पार
थी
मेरे
रस्ते
में
अना
दीवार
थी
आप
को
क्या
इल्म
है
इस
बात
का
ज़िंदगी
मुश्किल
नहीं
दुश्वार
थी
थीं
कमानें
दुश्मनों
के
हाथ
में
और
मेरे
हाथ
में
तलवार
थी
जल
गए
इक
रोज़
सूरज
से
चराग़
रौशनी
को
रौशनी
दरकार
थी
आज
दुनिया
के
लबों
पर
मुहर
है
कल
तलक
हाँ
साहब-ए-गुफ़्तार
थी
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ARahman Ansari
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हुआ
है
तुझ
से
बिछड़ने
के
बाद
ये
मालूम
कि
तू
नहीं
था
तेरे
साथ
एक
दुनिया
थी
Ahmad Faraz
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हम
क्या
करें
अगर
न
तिरी
आरज़ू
करें
दुनिया
में
और
भी
कोई
तेरे
सिवा
है
क्या
Hasrat Mohani
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जहाँ
तक
आके
तुम
वापस
गए
हो
वहाँ
अब
तक
कोई
पहुँचा
नहीं
है
Zubair Ali Tabish
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हम
मेहनतकश
इस
दुनिया
से
जब
अपना
हिस्सा
माँगेंगे
इक
बाग़
नहीं,
इक
खेत
नहीं,
हम
सारी
दुनिया
माँगेंगे
Faiz Ahmad Faiz
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दुनिया
की
फ़िक्र
छोड़,
न
यूँँ
अब
उदास
बैठ
ये
वक़्त
रब
की
देन
है,
अम्मी
के
पास
बैठ
Salman Zafar
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रात
की
भीगी-भीगी
मिट्टी
से
कुछ
उजाले
उगा
रही
होगी
मेरी
दुनिया
में
करके
अँधियारा
वो
दिवाली
मना
रही
होगी
Tanveer Ghazi
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टक
गोर-ए-ग़रीबाँ
की
कर
सैर
कि
दुनिया
में
उन
ज़ुल्म-रसीदों
पर
क्या
क्या
न
हुआ
होगा
Meer Taqi Meer
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एक
तो
हादसा
ये
हुआ
है
ज़िक्र
उसके
पे
आँसू
उतारे
फूल
सूखे
जमा
कर
के
मैंने
आज
तस्वीर
अपनी
पे
वारे
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Amanpreet singh
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तुम्हें
ये
सब
समझने
में
अभी
थोड़ा
समय
तो
है
किसी
ने
ज़िंदगी
कैसे
दुखी
हो
कर
निकाली
थी
Amanpreet singh
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ख़ुदा
के
घर
से
मैं
दूरी
बनाऊँगा
जी
फिर
मैं
घर
में
मजबूरी
बनाऊँगा
Amanpreet singh
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दिल
लगाया
गया
ख़ुद
लगा
ही
नहीं
दिल
से
मेरा
कभी
वो
हुआ
ही
नहीं
तारे
सबके
चमकते
रहे
रात
भर
पर
मेरे
घर
का
तारा
दिखा
ही
नहीं
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Amanpreet singh
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वो
बदन
कभी
मेरा
तो
हुआ
नहीं
लेकिन
उस
बदन
कि
ख़ुशबू
से
राबता
रहा
काफ़ी
Amanpreet singh
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