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Amanpreet singh
vo badan kabhi meraa to hua nahin lekinus badan ki KHushboo se raabta raha kaafi
vo badan kabhi meraa to hua nahin lekinus badan ki KHushboo se raabta raha kaafi | वो बदन कभी मेरा तो हुआ नहीं लेकिन
- Amanpreet singh
वो
बदन
कभी
मेरा
तो
हुआ
नहीं
लेकिन
उस
बदन
कि
ख़ुशबू
से
राबता
रहा
काफ़ी
- Amanpreet singh
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कभी
मिलता
नहीं
क्यूँ
मुझ
को
मुझ
में
कहाँ
है
गर
मेरे
अंदर
ख़ुदा
है
भटकती
है
कहीं
और
ही
मेरी
रूह
बदन
मेरा
कहीं
और
ही
पड़ा
है
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Chandan Sharma
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अक्सर
साँसें
रोक
के
सुनता
रहता
हूँ
उस
के
लम्स
बदन
पर
धड़का
करते
हैं
Swapnil Tiwari
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ये
इश्क़
आग
है
और
वो
बदन
शरारा
है
ये
सर्द
बर्फ़
सा
लड़का
पिघलने
वाला
है
Shadab Asghar
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है
उस
बदन
की
लत
मुझे
सो
दूसरा
बदन
अच्छा
तो
लग
रहा
है
मेरे
काम
का
नहीं
Vishnu virat
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टूटा
तो
हूँ
मगर
अभी
बिखरा
नहीं
'फ़राज़'
मेरे
बदन
पे
जैसे
शिकस्तों
का
जाल
हो
Ahmad Faraz
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तुमने
कैसे
उसके
जिस्म
की
ख़ुशबू
से
इनकार
किया
उस
पर
पानी
फेंक
के
देखो
कच्ची
मिट्टी
जैसा
है
Tehzeeb Hafi
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फूलों
की
सेज
पर
ज़रा
आराम
क्या
किया
उस
गुल-बदन
पे
नक़्श
उठ
आए
गुलाब
के
Adil Mansuri
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रंग-ओ-रस
की
हवस
और
बस
मसअला
दस्तरस
और
बस
यूँँ
बुनी
हैं
रगें
जिस्म
की
एक
नस
टस
से
मस
और
बस
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Ammar Iqbal
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हम
उस
में
बैठ
के
करते
हैं
साधना
तेरी
हमारा
जिस्म
भी
भीतर
से
एक
शिवाला
है
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Irshad Khan Sikandar
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मैं
आ
रहा
हूँ
अभी
चूम
कर
बदन
उस
का
सुना
था
आग
पे
बोसा
रक़म
नहीं
होता
Shanawar Ishaq
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तेरे
बिन
दिन
गुज़ार
सकता
हूॅं
ज़िंदगी
तुझपे
वार
सकता
हूॅं
जीतने
के
लिए
यहाँ
पर
मैं
तीर
अपनों
के
मार
सकता
हूॅं
ख़ास
तेरे
हैं
इसलिए
चुप
हूॅं
वरना
सर
से
उतार
सकता
हूॅं
पेड़
पर
छुप
के
मुझको
कहते
हैं
कर
तो
मैं
भी
शिकार
सकता
हूॅं
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Amanpreet singh
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हमारे
शे'र
उसकी
याद
में
गुज़रे
कि
हम
तो
उम्र
भर
इरशाद
में
गुज़रे
ख़ुदा
ये
ज़िंदगी
किस
काम
की
है
फिर
अगर
ये
वाली
भी
फ़रियाद
में
गुज़रे
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Amanpreet singh
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दिल
लगाया
गया
ख़ुद
लगा
ही
नहीं
दिल
से
मेरा
कभी
वो
हुआ
ही
नहीं
तारे
सबके
चमकते
रहे
रात
भर
पर
मेरे
घर
का
तारा
दिखा
ही
नहीं
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Amanpreet singh
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लटक
जाना
ही
अब
बेहतर
रहेगा
वास्ते
मेरे
गुज़ारा
इश्क़
में
मेरा
कि
अब
होगा
नहीं
शायद
Amanpreet singh
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ख़ुदा
के
घर
से
मैं
दूरी
बनाऊँगा
जी
फिर
मैं
घर
में
मजबूरी
बनाऊँगा
दिखा
दूँगा
दिए
को
एक
दिन
मैं
ख़ुद
यूँँ
मैं
ख़ुद
रौशनी
पूरी
बनाऊँगा
अभी
घर
में
नया
महमान
आया
है
तो
पहले
तो
मैं
मज़दूरी
बनाऊँगा
मुझे
चेहरा
दिखाई
तो
दे
तब
जानूँ
यूँँ
बिन
देखे
तो
क्या
दूरी
बनाऊँगा
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Amanpreet singh
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