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Amanpreet singh
KHuda ke ghar se main doori banaoonga
KHuda ke ghar se main doori banaoonga | ख़ुदा के घर से मैं दूरी बनाऊँगा
- Amanpreet singh
ख़ुदा
के
घर
से
मैं
दूरी
बनाऊँगा
जी
फिर
मैं
घर
में
मजबूरी
बनाऊँगा
दिखा
दूँगा
दिए
को
एक
दिन
मैं
ख़ुद
यूँँ
मैं
ख़ुद
रौशनी
पूरी
बनाऊँगा
अभी
घर
में
नया
महमान
आया
है
तो
पहले
तो
मैं
मज़दूरी
बनाऊँगा
मुझे
चेहरा
दिखाई
तो
दे
तब
जानूँ
यूँँ
बिन
देखे
तो
क्या
दूरी
बनाऊँगा
- Amanpreet singh
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मंज़िलें
क्या
हैं,
रास्ता
क्या
है
हौसला
हो
तो
फ़ासला
क्या
है
Aalok Shrivastav
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जाड़ों
की
रातें
उस
पर
भी
तुम
सेे
ये
जुदाई
बाहों
की
छोड़ो
हमको
हासिल
नहीं
रजाई
Harsh saxena
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सब
को
बचाओ
ख़ुद
भी
बचो
फ़ासला
रखो
अब
और
कुछ
करो
न
करो
फ़ासला
रखो
ख़तरा
तो
मुफ़्त
में
भी
नहीं
लेना
चाहिए
घर
से
निकल
के
मोल
न
लो
फ़ासला
रखो
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Jawwad Sheikh
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दर्द-ए-मुहब्बत
दर्द-ए-जुदाई
दोनों
को
इक
साथ
मिला
तू
भी
तन्हा
मैं
भी
तन्हा
आ
इस
बात
पे
हाथ
मिला
Abrar Kashif
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दूरी
हुई
तो
उन
सेे
क़रीब
और
हम
हुए
ये
कैसे
फ़ासले
थे
जो
बढ़ने
से
कम
हुए
Waseem Barelvi
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थी
वस्ल
में
भी
फ़िक्र-ए-जुदाई
तमाम
शब
वो
आए
तो
भी
नींद
न
आई
तमाम
शब
Momin Khan Momin
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शब-ए-विसाल
बहुत
कम
है
आसमाँ
से
कहो
कि
जोड़
दे
कोई
टुकड़ा
शब-ए-जुदाई
का
Ameer Minai
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नज़दीकी
अक्सर
दूरी
का
कारन
भी
बन
जाती
है
सोच-समझ
कर
घुलना-मिलना
अपने
रिश्ते-दारों
में
Aalok Shrivastav
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जो
देखने
में
बहुत
ही
क़रीब
लगता
है
उसी
के
बारे
में
सोचो
तो
फ़ासला
निकले
Waseem Barelvi
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जिस
की
आँखों
में
कटी
थीं
सदियाँ
उस
ने
सदियों
की
जुदाई
दी
है
Gulzar
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आज
के
दिन
गर
बुलाया
होता
उसने
ईद
फिर
मेरी
भी
सबके
जैसी
होती
Amanpreet singh
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हमारी
आँख
में
पानी
नहीं
रहता
हमारे
दिल
में
अब
जानी
नहीं
रहता
मोहब्बत
हो
गई
थी
और
ये
मुझको
पता
था
प्यार
जिस्मानी
नहीं
रहता
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Amanpreet singh
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तुम्हें
तो
चाह
कर
देखा
गया
है
तभी
तो
याद
में
खोया
गया
है
हमारे
बाद
उसने
क्या
बचाया
सभी
कुछ
ही
न
तो
ज़ाया'
गया
है
अधूरे
काम
करने
बाद
उसको
अधूरा
फिर
ही
क्यूँ
छोड़ा
गया
है
कुँवारी
लड़कियों
का
दुख
ही
है
वो
कभी
हम
सेे
न
जो
समझा
गया
है
बताया
साथ
में
रहने
लगे
थे
ख़ुशी
पर
ग़म
ही
का
साया
गया
है
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Amanpreet singh
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आदतन
तुझको
भी
छोड़
सकता
हूँ
मैं
घर
बचाने
को
छत
तोड़
सकता
हूँ
मैं
Amanpreet singh
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आँख
को
नम
नहीं
किया
हम
ने
जाने
का
ग़म
नहीं
किया
हम
ने
हाँ
बिछड़ने
से
दुख
हुआ
लेकिन
तेरा
मातम
नहीं
किया
हम
ने
बाद
तेरे
बहुत
मिले
लेकिन
सब
को
महरम
नहीं
किया
हमने
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Amanpreet singh
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