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Amanpreet singh
hamaari aankh men paani nahin rehta
hamaari aankh men paani nahin rehta | हमारी आँख में पानी नहीं रहता
- Amanpreet singh
हमारी
आँख
में
पानी
नहीं
रहता
हमारे
दिल
में
अब
जानी
नहीं
रहता
मोहब्बत
हो
गई
थी
और
ये
मुझको
पता
था
प्यार
जिस्मानी
नहीं
रहता
- Amanpreet singh
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पुरानी
कश्ती
को
पार
लेकर
फ़क़त
हमारा
हुनर
गया
है
नए
खेवइये
कहीं
न
समझें
नदी
का
पानी
उतर
गया
है
Uday Pratap Singh
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तू
अपने
सारे
दुख
जाकर
बताता
है
जिन्हें,
इक
दिन
बढ़ाएँगे
वही
ग़म-ख़्वार
तेरी
आँख
का
पानी
Siddharth Saaz
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रोते
बच्चे
पूछ
रहे
हैं
मम्मी
से
कितना
पानी
और
मिलाया
जाएगा
Divy Kamaldhwaj
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मिट्टी
और
पानी
भी
हमें
नाप
कर
मिलते
हैं
तुम
गमले
में
पालने
को
आसान
समझते
हो
Vishal Bagh
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अगर
साए
से
जल
जाने
का
इतना
ख़ौफ़
था
तो
फिर
सहर
होते
ही
सूरज
की
निगहबानी
में
आ
जाते
Azm Shakri
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अगर
फ़ुर्सत
मिले
पानी
की
तहरीरों
को
पढ़
लेना
हर
इक
दरिया
हज़ारों
साल
का
अफ़्साना
लिखता
है
Bashir Badr
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उस
ने
फेंका
मुझ
पे
पत्थर
और
मैं
पानी
की
तरह
और
ऊँचा
और
ऊँचा
और
ऊँचा
हो
गया
Kunwar Bechain
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तेरे
चुप
रहने
से
हर
पौधा
सूख
गया
है
तुझको
मालूम
नहीं
पौधों
का
पानी
है
तू
Kabir Altamash
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ऐसा
बदला
हूँ
तिरे
शहर
का
पानी
पी
कर
झूट
बोलूँ
तो
नदामत
नहीं
होती
मुझ
को
Shahid Zaki
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तुमने
कैसे
उसके
जिस्म
की
ख़ुशबू
से
इनकार
किया
उस
पर
पानी
फेंक
के
देखो
कच्ची
मिट्टी
जैसा
है
Tehzeeb Hafi
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मेरा
ये
डर
कहीं
जाता
नहीं
है
क्यूँ
तू
मुझको
छोड़
कर
जाने
लगा
है
क्या?
Amanpreet singh
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मोहब्बत
की
ज़मीं
पे
फूल
रख
कर
चला
मैं
ज़िंदगी
की
धूल
रख
कर
लगा
है
बे-वफ़ाई
करने
वो
अब
मुझे
इस
इश्क़
में
मशग़ूल
रख
कर
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Amanpreet singh
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बात
फिर
तेरी
चली
है
याद
फिर
आगे
खड़ी
है
यार
देखो
सोच
कर
तुम
आई
ये
कैसी
घड़ी
है
शा'इरी
बस
है
ज़रूरी
ज़िंदगी
कब
क़ीमती
है
हाॅं
वफ़ा
ने
मार
डाला
लाश
देखो
ये
पड़ी
है
पूछना
था
क्या
हुआ
था
बात
जो
इतनी
बढ़ी
है
देख
कर
हैरत
में
हूॅं
मैं
आँख
उसकी
भी
डरी
है
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Amanpreet singh
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अभी
तक
उस
सफ़र
की
याद
आती
है
हर
इक
दीवार-ओ-दर
की
याद
आती
है
मैं
वो
भटका
परिंदा
हूॅं
जिसे
अब
भी
बुज़ुर्गों
के
शजर
की
याद
आती
है
मेरे
हिस्से
से
गर
वो
जा
चुका
है
तो
अभी
क्यूँँ
उस
नज़र
की
याद
आती
है
मैं
जब
दादास
पूछूँ
उनके
ज़ख़्मों
की
उन्हें
लाहौर
घर
की
याद
आती
है
यूँँॅं
बैठा
सोचता
हूॅं
काश
इस
लम्हे
उधर
होता
जिधर
की
याद
आती
है
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Amanpreet singh
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होंठ
उसके
दिखे
थे
मुझे
एक
दिन
ज़िंदगी
तब
से
लब
लग
रही
है
मुझे
Amanpreet singh
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