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Amanpreet singh
baat phir teri chali hai
baat phir teri chali hai | बात फिर तेरी चली है
- Amanpreet singh
बात
फिर
तेरी
चली
है
याद
फिर
आगे
खड़ी
है
यार
देखो
सोच
कर
तुम
आई
ये
कैसी
घड़ी
है
शा'इरी
बस
है
ज़रूरी
ज़िंदगी
कब
क़ीमती
है
हाॅं
वफ़ा
ने
मार
डाला
लाश
देखो
ये
पड़ी
है
पूछना
था
क्या
हुआ
था
बात
जो
इतनी
बढ़ी
है
देख
कर
हैरत
में
हूॅं
मैं
आँख
उसकी
भी
डरी
है
- Amanpreet singh
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गर
रो
रहा
हूँ
मैं
तो
कमज़ोर
मत
समझना
ये
रोना
है
बनाता
मज़बूत
यार
मुझको
NISHKARSH AGGARWAL
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कहाँ
की
दोस्ती
किन
दोस्तों
की
बात
करते
हो
मियाँ
दुश्मन
नहीं
मिलता
कोई
अब
तो
ठिकाने
का
Waseem Barelvi
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मकाँ
तो
है
नहीं
जो
खींच
दें
दीवार
इस
दिल
में
कोई
दूजा
नहीं
रह
पाएगा
अब
यार
इस
दिल
में
जहाँ
भर
में
लुटाते
फिर
रहे
है
कम
नहीं
होता
तुम्हारे
वास्ते
इतना
रखा
था
प्यार
इस
दिल
में
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Bhaskar Shukla
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किसी
ने
प्यार
जताया
जता
के
छोड़
दिया
हवा
में
मुझको
उठाया
उठा
के
छोड़
दिया
किसे
सिखा
रहे
हो
इश्क़
तुम
नए
लड़के
ये
राग
हमने
मियाँ
गा
बजा
के
छोड़
दिया
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Vishnu virat
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तू
उसके
दिल
में
जगह
चाहता
है
यार
जो
शख़्स
किसी
को
देता
नहीं
अपने
साथ
वाली
जगह
Umair Najmi
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पुराने
यार
भी
आपस
में
अब
नहीं
मिलते
न
जाने
कौन
कहाँ
दिल
लगा
के
बैठ
गया
Fazil Jamili
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रक़ीब
आकर
बताते
हैं
यहाँ
तिल
है
वहाँ
तिल
है
हमें
ये
जानकारी
थी
मियाँ
पहले
बहुत
पहले
Anand Raj Singh
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वहम
मुझको
ये
भाता
है
अभी
मेरी
दीवानी
है
मगर
मेरी
दीवानी
थी
मियाँ
पहले
बहुत
पहले
Anand Raj Singh
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लबों
के
पास
आकर
मुड़
गए
फिर
ग़ज़ब
का
दर्द
देते
हो
मियाँ
तुम
Ashish Awasthi
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अच्छी
बुरी
हर
इक
कमी
के
साथ
हैं
हम
यार
आँखों
की
नमी
के
साथ
हैं
दो
जिस्म
ब्याहे
जा
रहे
हैं
आज
भी
हम
सब
पराए
आदमी
के
साथ
हैं
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Neeraj Neer
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निकल
पाया
नहीं
ये
डर
हमारा
कभी
बिकने
लगेगा
घर
हमारा
तुम्हें
ये
सब
तो
अब
दिखता
नहीं
है
दिखेगा
फिर
किसे
ये
डर
हमारा
ज़मीं
पर
ज़ोर
से
फेंका
गया
था
तुम्हारे
साथ
था
बिस्तर
हमारा
हमें
अब
रास्तों
में
मिलता
है
जो
वही
तो
था
कभी
दिलबर
हमारा
तुम्हारे
बाद
दिल
टूटा
मिला
है
वो
सह
पाया
न
दिल
ठोकर
हमारा
वही
इक
शख़्स
तो
सब
कुछ
था
मेरा
वही
इक
शख़्स
था
ज़ेवर
हमारा
तेरे
दर
पर
किया
करते
थे
हम
तो
तेरा
वो
दर
ही
था
दफ़्तर
हमारा
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Amanpreet singh
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तेरे
बिन
दिन
गुज़ार
सकता
हूॅं
ज़िंदगी
तुझपे
वार
सकता
हूॅं
जीतने
के
लिए
यहाँ
पर
मैं
तीर
अपनों
के
मार
सकता
हूॅं
ख़ास
तेरे
हैं
इसलिए
चुप
हूॅं
वरना
सर
से
उतार
सकता
हूॅं
पेड़
पर
छुप
के
मुझको
कहते
हैं
कर
तो
मैं
भी
शिकार
सकता
हूॅं
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Amanpreet singh
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अभी
से
याद
कर
क्यूँ
रो
रहा
हूँ
मैं
अभी
उस
सेे
ही
तो
मिल
आ
रहे
थे
हम
Amanpreet singh
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उदास
बातें
उदास
रातें
उदास
ग़ज़लें
तमाम
चीज़ें
क़रीब
मेरे
तो
हिज्र
की
हैं
Amanpreet singh
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चलो
फिर
साथ
रहने
की
क़सम
खाएँ
चलो
फिर
एक
दूजे
का
दुखाएँ
दिल
Amanpreet singh
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