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Amanpreet singh
nikal paaya nahin ye dar hamaara
nikal paaya nahin ye dar hamaara | निकल पाया नहीं ये डर हमारा
- Amanpreet singh
निकल
पाया
नहीं
ये
डर
हमारा
कभी
बिकने
लगेगा
घर
हमारा
तुम्हें
ये
सब
तो
अब
दिखता
नहीं
है
दिखेगा
फिर
किसे
ये
डर
हमारा
ज़मीं
पर
ज़ोर
से
फेंका
गया
था
तुम्हारे
साथ
था
बिस्तर
हमारा
हमें
अब
रास्तों
में
मिलता
है
जो
वही
तो
था
कभी
दिलबर
हमारा
तुम्हारे
बाद
दिल
टूटा
मिला
है
वो
सह
पाया
न
दिल
ठोकर
हमारा
वही
इक
शख़्स
तो
सब
कुछ
था
मेरा
वही
इक
शख़्स
था
ज़ेवर
हमारा
तेरे
दर
पर
किया
करते
थे
हम
तो
तेरा
वो
दर
ही
था
दफ़्तर
हमारा
- Amanpreet singh
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आज
भी
वो
वो
ही
है
और
अदा
भी
वो
ही
है
बे-वफ़ा
भी
वो
ही
है
और
ख़फ़ा
भी
वो
ही
है
Aatish Indori
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वो
आ
रहे
हैं,
वो
आते
हैं,
आ
रहे
होंगे
शब-ए-फ़िराक़
ये
कह
कर
गुज़ार
दी
हम
ने
Faiz Ahmad Faiz
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एक
अकेले
की
ख़ातिर
जब
दो
कप
कॉफी
में
चीनी
आज
मिलाते
हैं
तो
रो
देते
हैं
हम
Atul K Rai
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काट
पाऊँगा
मैं
कैसे
ज़िंदगी
तेरे
बग़ैर
तीन
दिन
का
हिज्र
मुझ
को
लग
रहा
है
तीन
साल
Afzal Ali Afzal
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लो
फिर
तिरे
लबों
पे
उसी
बे-वफ़ा
का
ज़िक्र
अहमद-'फ़राज़'
तुझ
से
कहा
ना
बहुत
हुआ
Ahmad Faraz
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वो
शादी
तो
करेगी
मगर
एक
शर्त
पर
हम
हिज्र
में
रहेंगे
अगर
नौकरी
नहीं
Harsh saxena
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खुला
फ़रेब-ए-मोहब्बत
दिखाई
देता
है
अजब
कमाल
है
उस
बे-वफ़ा
के
लहजे
में
Iftikhar Arif
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सँभलता
हूँ
तो
ये
लगता
है
जैसे
तुम्हारे
साथ
धोखा
कर
रहा
हूँ
Shariq Kaifi
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अभी
तो
जान
कहता
फिर
रहा
है
तू
तुझे
हम
हिज्र
वाले
साल
पूछेंगे
Parul Singh "Noor"
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या'नी
कि
इश्क़
अपना
मुकम्मल
नहीं
हुआ
गर
मैं
तुम्हारे
हिज्र
में
पागल
नहीं
हुआ
वो
शख़्स
सालों
बाद
भी
कितना
हसीन
है
वो
रंग
कैनवस
पे
कभी
डल
नहीं
हुआ
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Kushal Dauneria
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मुझे
जीत
कर
भी
हराया
गया
था
मुझे
फिर
नसीबों
ने
ही
मात
दी
है
Amanpreet singh
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करो
जब
बे-वफ़ाई
तो
न
उसपर
तुम
ज़रा
सा
मुस्कुरा
दो
और
काफ़ी
है
Amanpreet singh
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वो
मुझको
देखने
ऐसे
लगा
है
शिकारी
जाल
जैसे
ताकता
है
मैं
तेरी
बे-वफ़ाई
सह
रहा
जो
ये
मेरे
इश्क़
की
अब
इंतिहा
है
सभी
को
पार
जाने
की
पड़ी
है
नदी
में
बैठा
भी
इक
देवता
है
कहानीकार
ने
किरदार
मारा
कहानीकार
भी
तो
बे-वफ़ा
है
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Amanpreet singh
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तुम्हें
ही
प्रीत
था
करना
न
आया
ये
सभी
कहते
रहे
थे
कर
वफ़ा
लो
तुम
Amanpreet singh
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उसके
इज़हार
में
तो
देरी
है
जाने
को
आई
ट्रेन
मेरी
है
रुख़्सती
हो
चुकी
है
उसकी
पर
जान
अब
भी
मगर
वो
मेरी
है
होंठ
भी
चूमने
थे
उसके
तो
जिसकी
काग़ज़
में
यादें
ढ़ेरी
है
इश्क़
गर
बे-वफ़ाई
करता
है
फिर
ख़ुदाया
ये
चाल
तेरी
है
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Amanpreet singh
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