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Amanpreet singh
vo mujhko dekhne aise laga hai
vo mujhko dekhne aise laga hai | वो मुझको देखने ऐसे लगा है
- Amanpreet singh
वो
मुझको
देखने
ऐसे
लगा
है
शिकारी
जाल
जैसे
ताकता
है
मैं
तेरी
बे-वफ़ाई
सह
रहा
जो
ये
मेरे
इश्क़
की
अब
इंतिहा
है
सभी
को
पार
जाने
की
पड़ी
है
नदी
में
बैठा
भी
इक
देवता
है
कहानीकार
ने
किरदार
मारा
कहानीकार
भी
तो
बे-वफ़ा
है
- Amanpreet singh
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मिल
जाऊँगा
दरिया
में
तो
हो
जाऊँगा
दरिया
सिर्फ़
इसलिए
क़तरा
हूँ
कि
मैं
दरिया
से
जुदा
हूँ
Nazeer Banarasi
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कभी
दरिया
में
जिनकी
कश्तियाँ
थी
वही
अब
साहिलों
पे
रो
रहे
हैं
Siddharth Saaz
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दरिया
की
वुसअतों
से
उसे
नापते
नहीं
तन्हाई
कितनी
गहरी
है
इक
जाम
भर
के
देख
Adil Mansuri
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`तू
मेरे
पास
आ
कर
बैठ
मुझ
सेे
बात
कर
ऐ
दोस्त
ये
मुमकिन
है
कोई
दरिया
ख़राबों
से
निकल
आए
Siddharth Saaz
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तुमको
हम
ही
झूठ
लगेंगे
लेकिन
दरिया
झूठा
है
पहले
हमको
चाँद
मिला
था
फिर
दरिया
को
चाँद
मिला
Abhishar Geeta Shukla
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मैं
एक
ठहरा
हुआ
पुल,
तू
बहता
दरिया
है
तुझे
मिलूँगा
तो
फिर
टूट
कर
मिलूँगा
मैं
Subhan Asad
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बीच
भँवर
से
कश्ती
कैसे
बच
निकली
बहुत
दिनों
तक
दरिया
भी
हैरान
रहा
Madan Mohan Danish
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बहुत
ग़ुरूर
है
दरिया
को
अपने
होने
पर
जो
मेरी
प्यास
से
उलझे
तो
धज्जियाँ
उड़
जाएँ
Rahat Indori
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कोई
समुंदर,
कोई
नदी
होती
कोई
दरिया
होता
हम
जितने
प्यासे
थे
हमारा
एक
गिलास
से
क्या
होता
ताने
देने
से
और
हम
पे
शक
करने
से
बेहतर
था
गले
लगा
के
तुमने
हिजरत
का
दुख
बाट
लिया
होता
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Tehzeeb Hafi
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ये
इश्क़
नहीं
आसाँ
इतना
ही
समझ
लीजे
इक
आग
का
दरिया
है
और
डूब
के
जाना
है
Jigar Moradabadi
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कोई
तो
बात
थी
वरना
बिछड़ते
तो
नहीं
दोनों
ज़रा
सी
बात
होती
तो
सुलझ
ही
जाती
बातों
से
Amanpreet singh
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कब
तलक
वो
याद
आएगी
मुझे
भी
कब
तलक
बस
शा'इरी
से
काम
होगा
Amanpreet singh
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रख
ली
तुम
सेे
भी
दोस्ती
मैंने
और
फिर
कर
ली
शा'इरी
मैंने
उसकी
बातें
करो
सभी
मुझ
सेे
देखनी
फिर
है
बे-ख़ुदी
मैंने
वो
मोहब्बत
से
बाज़
आए
तो
उसको
करना
है
अजनबी
मैंने
उसकी
बातें
बता
दी
है
तुमको
तुम
सेे
भी
कर
ली
दुश्मनी
मैंने
आपसे
बात
कर
के
लगता
है
आपकी
जी
है
ज़िंदगी
मैंने
वो
अँधेरे
से
डरती
रहती
थी
घर
जला
कर
दी
रौशनी
मैंने
जब
तेरे
साथ
दिल
नहीं
लगता
फिर
तो
करनी
है
ख़ुद-कुशी
मैंने
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Amanpreet singh
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अभी
से
याद
कर
क्यूँ
रो
रहा
हूँ
मैं
अभी
उस
सेे
ही
तो
मिल
आ
रहे
थे
हम
Amanpreet singh
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वो
बदन
कभी
मेरा
तो
हुआ
नहीं
लेकिन
उस
बदन
कि
ख़ुशबू
से
राबता
रहा
काफ़ी
Amanpreet singh
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