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Amanpreet singh
rakh li tumse bhi dosti maine
rakh li tumse bhi dosti maine | रख ली तुम सेे भी दोस्ती मैंने
- Amanpreet singh
रख
ली
तुम
सेे
भी
दोस्ती
मैंने
और
फिर
कर
ली
शा'इरी
मैंने
उसकी
बातें
करो
सभी
मुझ
सेे
देखनी
फिर
है
बे-ख़ुदी
मैंने
वो
मोहब्बत
से
बाज़
आए
तो
उसको
करना
है
अजनबी
मैंने
उसकी
बातें
बता
दी
है
तुमको
तुम
सेे
भी
कर
ली
दुश्मनी
मैंने
आपसे
बात
कर
के
लगता
है
आपकी
जी
है
ज़िंदगी
मैंने
वो
अँधेरे
से
डरती
रहती
थी
घर
जला
कर
दी
रौशनी
मैंने
जब
तेरे
साथ
दिल
नहीं
लगता
फिर
तो
करनी
है
ख़ुद-कुशी
मैंने
- Amanpreet singh
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मिरी
रौशनी
तिरे
ख़द्द-ओ-ख़ाल
से
मुख़्तलिफ़
तो
नहीं
मगर
तू
क़रीब
आ
तुझे
देख
लूँ
तू
वही
है
या
कोई
और
है
Saleem Kausar
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गले
में
उस
के
ख़ुदा
की
अजीब
बरकत
है
वो
बोलता
है
तो
इक
रौशनी
सी
होती
है
Bashir Badr
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आएगा
वो
दिन
हमारी
ज़िंदगी
में
भी
ज़रूर
जो
अँधेरों
को
मिटा
कर
रौशनी
दे
जाएगा
Anwar Taban
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जहाँ
रहेगा
वहीं
रौशनी
लुटाएगा
किसी
चराग़
का
अपना
मकाँ
नहीं
होता
Waseem Barelvi
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ये
इश्क़-विश्क़
का
क़िस्सा
तमाम
हो
जाए
सफ़ेद
दाढ़ी
हवस
की
गुलाम
हो
जाए
जवान
लड़कियों
बूढ़ों
से
तुम
रहो
हुश्यार
न
जाने
कौन
कहाँ
आसाराम
हो
जाए
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Paplu Lucknawi
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इन्हीं
ग़म
की
घटाओं
से
ख़ुशी
का
चाँद
निकलेगा
अँधेरी
रात
के
पर्दे
में
दिन
की
रौशनी
भी
है
Akhtar Shirani
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घर
के
बुज़ुर्ग
लोगों
की
आँखें
क्या
बुझ
गईं
अब
रोशनी
के
नाम
पर
कुछ
भी
नहीं
रहा
आए
थे
मीर
ख़्वाब
में
कल
डांट
कर
गए
क्या
शा'इरी
के
नाम
पर
कुछ
भी
नहीं
रहा
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Aalok Shrivastav
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अब
तो
ख़ुद
अपने
ख़ून
ने
भी
साफ़
कह
दिया
मैं
आपका
रहूॅंगा
मगर
उम्र
भर
नहीं
Aalok Shrivastav
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खिड़कियों
से
झाँकती
है
रौशनी
बत्तियाँ
जलती
हैं
घर
घर
रात
में
Mohammad Alvi
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आप
क्या
आए
कि
रुख़्सत
सब
अंधेरे
हो
गए
इस
क़दर
घर
में
कभी
भी
रौशनी
देखी
न
थी
Hakeem Nasir
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अभी
तक
उस
सफ़र
की
याद
आती
है
हर
इक
दीवार-ओ-दर
की
याद
आती
है
मैं
वो
भटका
परिंदा
हूॅं
जिसे
अब
भी
बुज़ुर्गों
के
शजर
की
याद
आती
है
मेरे
हिस्से
से
गर
वो
जा
चुका
है
तो
अभी
क्यूँँ
उस
नज़र
की
याद
आती
है
मैं
जब
दादास
पूछूँ
उनके
ज़ख़्मों
की
उन्हें
लाहौर
घर
की
याद
आती
है
यूँँॅं
बैठा
सोचता
हूॅं
काश
इस
लम्हे
उधर
होता
जिधर
की
याद
आती
है
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Amanpreet singh
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तुम्हें
ही
प्रीत
था
करना
न
आया
ये
सभी
कहते
रहे
थे
कर
वफ़ा
लो
तुम
Amanpreet singh
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मुझे
जीत
कर
भी
हराया
गया
था
मुझे
फिर
नसीबों
ने
ही
मात
दी
है
Amanpreet singh
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पूछ
लेते
हाल
दिल
का
क्या
हुआ
पामाल
दिल
का
ख़त
नहीं
भेजे
गए
पर
भेजा
था
इर्साल
दिल
का
क्या
गया
तू
दूर
मुझ
सेे
देख
ख़ुद
तू
हाल
दिल
का
मुस्कुरा
कर
रो
पड़े
हम
हाल
है
बेहाल
दिल
का
मैं
नहीं
गाता
के
अब
तो
मर
गया
क़व्वाल
दिल
का
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Amanpreet singh
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आँख
को
नम
नहीं
किया
हम
ने
जाने
का
ग़म
नहीं
किया
हम
ने
हाँ
बिछड़ने
से
दुख
हुआ
लेकिन
तेरा
मातम
नहीं
किया
हम
ने
बाद
तेरे
बहुत
मिले
लेकिन
सब
को
महरम
नहीं
किया
हमने
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Amanpreet singh
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