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Amanpreet singh
uske izhaar men to deri hai
uske izhaar men to deri hai | उसके इज़हार में तो देरी है
- Amanpreet singh
उसके
इज़हार
में
तो
देरी
है
जाने
को
आई
ट्रेन
मेरी
है
रुख़्सती
हो
चुकी
है
उसकी
पर
जान
अब
भी
मगर
वो
मेरी
है
होंठ
भी
चूमने
थे
उसके
तो
जिसकी
काग़ज़
में
यादें
ढ़ेरी
है
इश्क़
गर
बे-वफ़ाई
करता
है
फिर
ख़ुदाया
ये
चाल
तेरी
है
- Amanpreet singh
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मैं
होश-मंद
हूँ
ख़ुद
भी
सो
मेरी
ग़ज़लों
में
न
रक़्स
करता
है
'आशिक़
न
बाल
खींचता
है
Charagh Sharma
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तुम्हें
हुस्न
पर
दस्तरस
है
मोहब्बत
वोहब्बत
बड़ा
जानते
हो
तो
फिर
ये
बताओ
कि
तुम
उस
की
आँखों
के
बारे
में
क्या
जानते
हो
ये
जुग़राफ़िया
फ़ल्सफ़ा
साईकॉलोजी
साइंस
रियाज़ी
वग़ैरा
ये
सब
जानना
भी
अहम
है
मगर
उस
के
घर
का
पता
जानते
हो
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Tehzeeb Hafi
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चढ़ते
हुवे
ए
शम्स
दिखा
ताव
भी
मगर
ये
जान
ले
कि
शाम
ढले
डूब
जाएगा
Afzal Ali Afzal
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वरना
तो
बेवफ़ाई
किसे
कब
मुआ'फ़
है
तू
मेरी
जान
है
सो
तुझे
सब
मुआ'फ़
है
क्यूँ
पूछती
हो
मैंने
तुम्हें
माफ़
कर
दिया
ख़ामोश
हो
गया
हूँ
मैं
मतलब
मुआ'फ़
है
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Vikram Gaur Vairagi
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सुनो
हर-वक़्त
इतना
याद
भी
मत
कीजिए
हमको
कहीं
ऐसा
न
हो
की
हिचकियों
में
जाँ
निकल
जाए
Sandeep dabral 'sendy'
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ये
जो
है
फूल
हथेली
पे
इसे
फूल
न
जान
मेरा
दिल
जिस्म
से
बाहर
भी
तो
हो
सकता
है
Abbas Tabish
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मजबूरी
में
रक़ीब
ही
बनना
पड़ा
मुझे
महबूब
रहके
मेरी
जो
इज़्ज़त
नहीं
हुई
Sabahat Urooj
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ज़ब्त
का
ऐसे
इम्तिहान
न
ले
ऐ
मेरी
जान
मेरी
जान
न
ले
Khalid Sajjad
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क़ल्ब-ए-हज़ी
मता-ए-जाँ
यूँँ
शाद
कीजिए
कसरत
के
साथ
आप
हमें
याद
कीजिए
दौलत
में
चाहते
हो
इज़ाफा
अगर
शजर
तो
बेकसों
यतीमों
की
इमदाद
कीजिए
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Shajar Abbas
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इतनी
मिलती
है
मिरी
ग़ज़लों
से
सूरत
तेरी
लोग
तुझ
को
मिरा
महबूब
समझते
होंगे
Bashir Badr
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छोड़
कर
जाने
लगा
था
प्यार
समझाने
लगा
था
उन
के
दिल
को
ये
लगा
है
इश्क़
अब
खाने
लगा
था
आज
फिर
ये
बात
आई
कौन
ही
जाने
लगा
था
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Amanpreet singh
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देख
ले
वो
कभी
भी
कहानी
मिरी
आइना
आइने
से
छुपाता
नहीं
Amanpreet singh
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उसे
मुझ
सेे
शिकायत
एक
ये
भी
थी
मुझे
उस
सेे
मोहब्बत
ही
हुई
थी
क्यूँ
Amanpreet singh
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कि
ग़ुर्बत
ने
तमाचा
मारा
मुँह
पर
फिर
मोहब्बत
करने
वाला
था
मैं
पागल
सा
Amanpreet singh
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मोहब्बत
जो
समझ
आने
लगी
है
उदासी
नाचने
गाने
लगी
है
उसे
बस
देख
कर
ख़ुश
होता
हूॅं
सो
वो
अब
तस्वीर
से
जाने
लगी
है
हुआ
है
सामना
ऐसा
किसी
से
दग़ाबाज़ी
भी
शरमाने
लगी
है
मेरे
होते
हुए
ऐसी
नहीं
थी
जो
अब
के
जाम
छलकाने
लगी
है
तो
खेला
इश्क़
में
जाता
है
ऐसे
मुझे
भी
अक़्ल
सी
आने
लगी
है
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Amanpreet singh
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