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Amanpreet singh
tumhein ye sab samajhne men abhii thoda samay to hai
tumhein ye sab samajhne men abhii thoda samay to hai | तुम्हें ये सब समझने में अभी थोड़ा समय तो है
- Amanpreet singh
तुम्हें
ये
सब
समझने
में
अभी
थोड़ा
समय
तो
है
किसी
ने
ज़िंदगी
कैसे
दुखी
हो
कर
निकाली
थी
- Amanpreet singh
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दुनिया
ने
तेरी
याद
से
बेगाना
कर
दिया
तुझ
से
भी
दिल-फ़रेब
हैं
ग़म
रोज़गार
के
Faiz Ahmad Faiz
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मुझे
ये
डर
है
तेरी
आरज़ू
न
मिट
जाए
बहुत
दिनों
से
तबीअत
मिरी
उदास
नहीं
Nasir Kazmi
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हर
दुख
का
है
इलाज,
उसे
देखते
रहो
सबकुछ
भुला
के
आज
उसे
देखते
रहो
देखा
उसे
तो
दिल
ने
ये
बे-साख़्ता
कहा
छोड़ो
ये
काम
काज
उसे
देखते
रहो
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Aslam Rashid
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दूजों
का
दुख
समझने
को
बे
हद
ज़रूरी
है
थोड़ी
सही
प
दिल
में
अज़ीयत
बनी
रहे
Afzal Ali Afzal
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दुख
तो
बहुत
मिले
हैं
मोहब्बत
नहीं
मिली
यानी
कि
जिस्म
मिल
गया
औरत
नहीं
मिली
मुझको
पिता
की
आँख
के
आँसू
तो
मिल
गए
मुझको
पिता
से
ज़ब्त
की
आदत
नहीं
मिली
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Abhishar Geeta Shukla
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उदासी
का
सबब
उस
सेे
जो
हम
तब
पूछ
लेते
वजह
फिर
पूछनी
पड़ती
न
शायद
ख़ुद-कुशी
की
Dipendra Singh 'Raaz'
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वक़्त
अच्छा
भी
आएगा
'नासिर'
ग़म
न
कर
ज़िंदगी
पड़ी
है
अभी
Nasir Kazmi
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जब
भी
आता
है
दिसम्बर
ग़म
के
टाँके
खुलते
हैं
याद
है
यूँँ
तेरा
जाना
और
कहना
ख़ुश
रहो
Neeraj Neer
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आज
तो
बे-सबब
उदास
है
जी
इश्क़
होता
तो
कोई
बात
भी
थी
Nasir Kazmi
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उसी
मक़ाम
पे
कल
मुझ
को
देख
कर
तन्हा
बहुत
उदास
हुए
फूल
बेचने
वाले
Jamal Ehsani
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इश्क़
की
बात
याद
आती
है
ज़िंदगी
कैसे
बीत
जाती
है
उस
गली
से
गुज़र
के
देखा
है
नज़रें
वो
आज
भी
झुकाती
है
क्या
अजब
खेल
है
मोहब्बत
भी
बे-वफ़ाओं
से
दिल
लगाती
है
पेड़
दरिया
में
सूख
जाते
हैं
सहरा
में
प्यास
बुझती
जाती
है
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Amanpreet singh
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तुझे
तेरी
मोहब्बत
की
क़सम
है
अब
मिटाना
है
गुमाँ
सब
इश्क़
को
लेकर
Amanpreet singh
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यार
मुझ
में
ही
कमी
थी
ज़िंदगी
तो
क़ीमती
थी
फूल
सब
थे
ग़ुस्से
के
वो
तितली
मुझपे
बावली
थी
उसने
दिल
को
ऐसे
बाँधा
राग
जैसे
भैरवी
थी
जब
लगूॅं
सबके
गले
मैं
आँखों
से
वो
डाॅंटती
थी
खिड़कियाँ
वो
खोल
देती
तब
यही
बस
आशिक़ी
थी
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Amanpreet singh
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मुझे
जीत
कर
भी
हराया
गया
था
मुझे
फिर
नसीबों
ने
ही
मात
दी
है
Amanpreet singh
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निकल
पाया
नहीं
ये
डर
हमारा
कभी
बिकने
लगेगा
घर
हमारा
तुम्हें
ये
सब
तो
अब
दिखता
नहीं
है
दिखेगा
फिर
किसे
ये
डर
हमारा
ज़मीं
पर
ज़ोर
से
फेंका
गया
था
तुम्हारे
साथ
था
बिस्तर
हमारा
हमें
अब
रास्तों
में
मिलता
है
जो
वही
तो
था
कभी
दिलबर
हमारा
तुम्हारे
बाद
दिल
टूटा
मिला
है
वो
सह
पाया
न
दिल
ठोकर
हमारा
वही
इक
शख़्स
तो
सब
कुछ
था
मेरा
वही
इक
शख़्स
था
ज़ेवर
हमारा
तेरे
दर
पर
किया
करते
थे
हम
तो
तेरा
वो
दर
ही
था
दफ़्तर
हमारा
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Amanpreet singh
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