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Neeraj Nainkwal
haan tum hansaati ho tab bhi rulaati ho
haan tum hansaati ho tab bhi rulaati ho | हाँ तुम हँसाती हो तब भी रुलाती हो
- Neeraj Nainkwal
हाँ
तुम
हँसाती
हो
तब
भी
रुलाती
हो
फिर
क्यूँँ
आती
हो
जब
उदासी
लाती
हो
रोज़ाना
ख़्वाबों
में
मिलते
हैं
हम-तुम
सच
तो
ये
है
यादों
में
याद
आती
हो
- Neeraj Nainkwal
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ख़मोश
झील
के
पानी
में
वो
उदासी
थी
कि
दिल
भी
डूब
गया
रात
माहताब
के
साथ
Rehman Faris
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मैं
जंगलों
की
तरफ़
चल
पड़ा
हूँ
छोड़
के
घर
ये
क्या
कि
घर
की
उदासी
भी
साथ
हो
गई
है
Tehzeeb Hafi
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कोई
इतना
प्यारा
कैसे
हो
सकता
है
फिर
सारे
का
सारा
कैसे
हो
सकता
है
तुझ
सेे
जब
मिलकर
भी
उदासी
कम
नहीं
होती
तेरे
बग़ैर
गुज़ारा
कैसे
हो
सकता
है
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Jawwad Sheikh
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मेरी
बरसों
की
उदासी
का
सिला
कुछ
तो
मिले
उस
से
कह
दो
वो
मेरा
क़र्ज़
चुकाने
आए
Khalil Ur Rehman Qamar
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ख़ाली
पड़ा
है
और
उदासी
भरा
है
दिल
सो
लोग
इस
मकान
से
आगे
निकल
गए
Ankit Maurya
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मुझ
ऐसा
शख़्स
अगर
क़हक़हों
से
भर
जाए
ये
साँस
लेती
उदासी
तो
घुट
के
मर
जाए
वो
मेरे
बाद
तरस
जाएगा
मोहब्बत
को
उसे
ये
कहना
अगर
हो
सके
तो
मर
जाए
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Rakib Mukhtar
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मज़ा
चहिए
जो
आख़िर
तक
उदासी
से
मोहब्बत
कर
ख़ुशी
का
क्या
है
कब
तब्दील
है
से
थी
में
हो
जाए
Atul K Rai
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ख़ुदा
को
मान
कि
तुझ
लब
के
चूमने
के
सिवा
कोई
इलाज
नहीं
आज
की
उदासी
का
Zafar Iqbal
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शबो
रोज़
की
चाकरी
ज़िन्दगी
की
मुयस्सर
हुईं
रोटियाँ
दो
घड़ी
की
नहीं
काम
आएँ
जो
इक
दिन
मशीनें
ज़रूरत
बने
आदमी
आदमी
की
कि
कल
शाम
फ़ुरसत
में
आई
उदासी
बता
दी
मुझे
क़ीमतें
हर
ख़ुशी
की
किया
क्या
अमन
जी
ने
बाइस
बरस
में
कभी
जी
लिया
तो
कभी
ख़ुद-कुशी
की
ग़मों
को
ठिकाने
लगाते
लगाते
घड़ी
आ
गई
आदमी
के
ग़मी
की
ये
सारी
तपस्या
का
कारण
यही
है
मिसालें
बनें
तो
बनें
सादगी
की
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Aman G Mishra
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गर
कोई
मुझ
सेे
आकर
कहता,
यार
उदासी
है
मैं
उसको
गले
लगाकर
कहता,
यार
उदासी
है
होता
दरवेश
अगर
मैं
तो
फिर
सारी
दो-पहरी
गलियों
में
सदा
लगाकर
कहता,
यार
उदासी
है
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Siddharth Saaz
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तीरगी
जैसे
निकलती
है
दिए
की
रौशनी
से
एक
दिन
मैं
भी
चला
जाऊँगा
तेरी
ज़िंदगी
से
Neeraj Nainkwal
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उसने
पूछा
ही
नहीं
तब
घर
में
आने
के
लिए
मैं
गया
था
पास
जिसके
दिल
लगाने
के
लिए
Neeraj Nainkwal
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इक
मुहब्बत
से
भरी
उस
ज़िंदगी
के
ख़्वाब
हैं
पेड़
दरिया
और
पंछी
तेरे
मेरे
ख़्वाब
हैं
Neeraj Nainkwal
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आख़िरी
बेंच
पर
यूँँ
बुलाकर
मुझे
आई
लव
यूँ
कहा
मुस्कुराकर
मुझे
Neeraj Nainkwal
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रोज़
हिना
के
हाथों
से
तुम
लाओगी
इक
गिलास
जिस
में
दूध-मिसरी
होनी
है
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Neeraj Nainkwal
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