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Maviya abdul kalam khan
auron ko apne gham se shanaasa na kiya kar
auron ko apne gham se shanaasa na kiya kar | औरों को अपने ग़म से शनासा न किया कर
- Maviya abdul kalam khan
औरों
को
अपने
ग़म
से
शनासा
न
किया
कर
इस
क़दर
ज़िन्दगी
का
तमाशा
न
किया
कर
- Maviya abdul kalam khan
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जो
गुज़ारी
न
जा
सकी
हम
से
हम
ने
वो
ज़िन्दगी
गुज़ारी
है
Jaun Elia
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तेरे
बग़ैर
भी
तो
ग़नीमत
है
ज़िंदगी
ख़ुद
को
गँवा
के
कौन
तेरी
जुस्तुजू
करे
Ahmad Faraz
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आधी
आधी
रात
तक
सड़कों
के
चक्कर
काटिए
शा'इरी
भी
इक
सज़ा
है
ज़िंदगी
भर
काटिए
कोई
तो
हो
जिस
से
उस
ज़ालिम
की
बातें
कीजिए
चौदहवीं
का
चाँद
हो
तो
रात
छत
पर
काटिए
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Nisar Nasik
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हाल
मत
पूछो
हमारी
ज़िंदगी
का
एक
चलती-फिरती
सी
दीवार
है
बस
Rachit Sonkar
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जब
से
हुआ
है
कंधे
से
बस्ते
का
बोझ
कम
बढ़ते
ही
जा
रहे
हैं
मेरी
ज़िंदगी
में
ग़म
Ankit Maurya
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तुम
भी
साबित
हुए
कमज़ोर
मुनव्वर
राना
ज़िन्दगी
माँगी
भी
तुमने
तो
दवा
से
माँगी
Munawwar Rana
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हम
हैं
ना!
ये
जो
मुझ
सेे
कहते
हैं
ख़ुद
किसी
और
के
भरोसे
हैं
ज़िंदगी
के
लिए
बताओ
कुछ
ख़ुद-कुशी
के
तो
सौ
तरीक़े
हैं
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Vikram Gaur Vairagi
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तल्ख़ियाँ
इस
में
बहुत
कुछ
हैं
मज़ा
कुछ
भी
नहीं
ज़िंदगी
दर्द-ए-मोहब्बत
के
सिवा
कुछ
भी
नहीं
Kaleem Aajiz
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अब
ज़िन्दगी
से
कोई
मिरा
वास्ता
नहीं
पर
ख़ुद-कुशी
भी
कोई
सही
रास्ता
नहीं
Rahul
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हम
भी
क्या
ज़िंदगी
गुज़ार
गए
दिल
की
बाज़ी
लगा
के
हार
गए
Dagh Dehlvi
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रहकर
के
भीड़
में
भी
जो
तन्हा
हुआ
हूँ
मैं
कैसे
बताऊँ
यार
के
टूटा
हुआ
हूँ
मैं
मुझको
कहाँ
कहाँ
से
समेटोगे
तुम
भला
अपनों
के
दरमियान
जो
बिखरा
हुआ
हूँ
मैं
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Maviya abdul kalam khan
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तन्हा
ही
लड़
रहा
हूँ
मैं
हालात
से
यहाँ
कहने
को
मेरे
साथ
में
सारा
जहान
है
Maviya abdul kalam khan
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दु'आ
को
ख़ुदाया
मेरी
बा-असर
कर
मुझे
साजिशों
से
सदा
बा-ख़बर
कर
Maviya abdul kalam khan
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सुकूँ
प्यारे
उलफ़त
का
छाया
हुआ
है
अँधेरा
भी
घर
का
पराया
हुआ
है
तसव्वुर
का
तेरे
ये
अदना
है
जादू
दिया
जैसे
शब
में
जलाया
हुआ
है
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Maviya abdul kalam khan
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रुकने
का
मुझे
कोई
बहाना
नहीं
मिलता
ठहरूं
मैं
कहाँ
मुझको
ठिकाना
नहीं
मिलता
पिन्हाँ
है
कई
दर्द
कहानी
में
मेरे
जो
मुझ
जैसा
किसी
का
भी
फसाना
नहीं
मिलता
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Maviya abdul kalam khan
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