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Maviya abdul kalam khan
tanhaa hi lad raha hooñ main haalaat se yahaañ
tanhaa hi lad raha hooñ main haalaat se yahaañ | तन्हा ही लड़ रहा हूँ मैं हालात से यहाँ
- Maviya abdul kalam khan
तन्हा
ही
लड़
रहा
हूँ
मैं
हालात
से
यहाँ
कहने
को
मेरे
साथ
में
सारा
जहान
है
- Maviya abdul kalam khan
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तुम
आसमान
पे
जाना
तो
चाँद
से
कहना
जहाँ
पे
हम
हैं
वहाँ
चांदनी
बहुत
कम
है
Shakeel Azmi
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इस
दौर
के
मर्दों
की
जो
की
शक्ल-शुमारी
साबित
हुआ
दुनिया
में
ख़्वातीन
बहुत
हैं
Sarfaraz Shahid
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लगा
जब
कि
दुनिया
की
पहली
ज़रूरत
मोहब्बत
है
तब
उसने
माना
यक़ीं
हो
गया
जब
मोहब्बत
ज़रूरत
है
तब
उसने
माना
वगरना
तो
ये
लोग
उसे
ख़ुद-कुशी
के
लिए
कह
चुके
थे
उसे
आइने
ने
बताया
कि
वो
ख़ूब-सूरत
है
तब
उसने
माना
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Vikram Gaur Vairagi
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इतने
दुख
से
भरी
है
ये
दुनिया
आँख
खुलते
ही
आँख
भर
आए
shampa andaliib
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तुम
हुस्न
की
ख़ुद
इक
दुनिया
हो
शायद
ये
तुम्हें
मालूम
नहीं
महफ़िल
में
तुम्हारे
आने
से
हर
चीज़
पे
नूर
आ
जाता
है
Sahir Ludhianvi
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जिसकी
ख़ातिर
हम
भुला
बैठे
हैं
दुनिया
दोस्तों
से
ही
उन्हें
फ़ुर्सत
नहीं
है
Shashank Shekhar Pathak
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हुआ
है
तुझ
से
बिछड़ने
के
बाद
ये
मालूम
कि
तू
नहीं
था
तेरे
साथ
एक
दुनिया
थी
Ahmad Faraz
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हो
गए
राम
जो
तुम
ग़ैर
से
ए
जान-ए-जहाँ
जल
रही
है
दिल-ए-पुर-नूर
की
लंका
देखो
Kalb-E-Hussain Nadir
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हम
क्या
करें
अगर
न
तिरी
आरज़ू
करें
दुनिया
में
और
भी
कोई
तेरे
सिवा
है
क्या
Hasrat Mohani
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दुनिया
की
फ़िक्र
छोड़,
न
यूँँ
अब
उदास
बैठ
ये
वक़्त
रब
की
देन
है,
अम्मी
के
पास
बैठ
Salman Zafar
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रंजिशों
से
जुदा
रास्ते
हो
गए
और
फिर
दरमियाँ
फ़ासले
हो
गए
हम
जहाँ
से
चले
आ
गए
फिर
वहीं
रक्स-ए
हालात
से
दाएरे
हो
गए
शीरीं
पैराए
में
जब
भी
की
गुफ्तगू
हम
तो
गिरवीदा
बस
आपके
हो
गए
गांव
जलता
रहा
वो
तमाशाई
थे
उनके
शहरों
में
भी
हादसे
हो
गए
अपने
हो
कर
भी
थे
जो
कभी
अजनबी
हाजतों
के
सबब
वास्ते
हो
गए
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Maviya abdul kalam khan
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औरों
को
अपने
ग़म
से
शनासा
न
किया
कर
इस
क़दर
ज़िन्दगी
का
तमाशा
न
किया
कर
Maviya abdul kalam khan
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गिरता
हूँ
तो
फौरन
मुझे
उढने
नहीं
देती
हालात
की
संगीनी
सँभलने
नहीं
देती
Maviya abdul kalam khan
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दु'आ
को
ख़ुदाया
मेरी
बा-असर
कर
मुझे
साजिशों
से
सदा
बा-ख़बर
कर
Maviya abdul kalam khan
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जिस
पे
लफ़्ज़ों
का
वार
होता
है
उसका
दिल
बेकरार
होता
है
माँ
का
साया
जहाँ
नहीं
होता
घर
वो
उजड़ा
दयार
होता
है
छीन
कर
हक
किसी
का
यूँँ
जीना
दिल
पे
अपने
तो
बार
होता
है
चोट
लगती
है
जब
भी
अपनों
से
ग़ैरों
पर
ऐतबार
होता
है
हम
जियें
कैसे
यूँँ
उसूलों
पर
हम
से
हरगिज़
न
यार
होता
है
कोई
हम
को
कलाम
बतलाऐ
जाने
कैसे
ये
प्यार
होता
है
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Maviya abdul kalam khan
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