jis pe lafzon ka vaar hota hai | जिस पे लफ़्ज़ों का वार होता है

  - Maviya abdul kalam khan
जिसपेलफ़्ज़ोंकावारहोताहै
उसकादिलबेकरारहोताहै
माँकासायाजहाँनहींहोता
घरवोउजड़ादयारहोताहै
छीनकरहककिसीकायूँँजीना
दिलपेअपनेतोबारहोताहै
चोटलगतीहैजबभीअपनोंसे
ग़ैरोंपरऐतबारहोताहै
हमजियेंकैसेयूँँउसूलोंपर
हमसेहरगिज़यारहोताहै
कोईहमकोकलामबतलाऐ
जानेकैसेयेप्यारहोताहै
  - Maviya abdul kalam khan
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