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Maviya abdul kalam khan
ghazlein to padh rahe thein vo ahmad faraaz ki
ghazlein to padh rahe thein vo ahmad faraaz ki | ग़ज़लें तो पढ़ रहे थे वो 'अहमद फ़राज़' की
- Maviya abdul kalam khan
ग़ज़लें
तो
पढ़
रहे
थे
वो
'अहमद
फ़राज़'
की
महफ़िल
में
लोग
मुझको
बड़े
चोर
लगे
हैं
- Maviya abdul kalam khan
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पहले-पहल
तो
लड़
लिए
अल्लाह
से
मगर
अब
पेश
आ
रहे
हैं
बड़ी
आजिज़ी
से
हम
Amaan Pathan
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जो
बुजुर्गों
की
दु'आओं
के
दीयों
से
रौशन
रोज़
उस
घर
में
दीवाली
का
जश्न
होता
है
Pratap Somvanshi
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ख़ुशी
से
काँप
रही
थीं
ये
उँगलियाँ
इतनी
डिलीट
हो
गया
इक
शख़्स
सेव
करने
में
Fahmi Badayuni
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ख़ुशी
में
भी
ख़ुशी
होती
नहीं
अब
तेरा
ग़म
ही
सतह
पर
तैरता
है
Umesh Maurya
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सियासत
के
चेहरे
पे
रौनक़
नहीं
ये
औरत
हमेशा
की
बीमार
है
Shakeel Jamali
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अगर
लगता
है
वो
क़ाबिल
नहीं
है
तो
रिश्ता
तोड़ना
मुश्किल
नहीं
है
रक़ीब
आया
है
मेरे
शे'र
सुनने
तो
अब
ये
जंग
है
महफ़िल
नहीं
है
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Tanoj Dadhich
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ये
किस
ने
फ़ोन
पे
दी
साल-ए-नौ
की
तहनियत
मुझ
को
तमन्ना
रक़्स
करती
है
तख़य्युल
गुनगुनाता
है
Ali Sardar Jafri
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तुम्हें
हम
भी
सताने
पर
उतर
आएँ
तो
क्या
होगा
तुम्हारा
दिल
दुखाने
पर
उतर
आएँ
तो
क्या
होगा
हमें
बदनाम
करते
फिर
रहे
हो
अपनी
महफ़िल
में
अगर
हम
सच
बताने
पर
उतर
आएँ
तो
क्या
होगा
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Santosh S Singh
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क़ुबूल
है
जिन्हें
ग़म
भी
तेरी
ख़ुशी
के
लिए
वो
जी
रहे
हैं
हक़ीक़त
में
ज़िन्दगी
के
लिए
Nasir Kazmi
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एक
महफ़िल
में
कई
महफ़िलें
होती
हैं
शरीक
जिस
को
भी
पास
से
देखोगे
अकेला
होगा
Nida Fazli
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गिरता
हूँ
तो
फौरन
मुझे
उढने
नहीं
देती
हालात
की
संगीनी
सँभलने
नहीं
देती
Maviya abdul kalam khan
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सुकूँ
प्यारे
उलफ़त
का
छाया
हुआ
है
अँधेरा
भी
घर
का
पराया
हुआ
है
तसव्वुर
का
तेरे
ये
अदना
है
जादू
दिया
जैसे
शब
में
जलाया
हुआ
है
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Maviya abdul kalam khan
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रुकने
का
मुझे
कोई
बहाना
नहीं
मिलता
ठहरूं
मैं
कहाँ
मुझको
ठिकाना
नहीं
मिलता
पिन्हाँ
है
कई
दर्द
कहानी
में
मेरे
जो
मुझ
जैसा
किसी
का
भी
फसाना
नहीं
मिलता
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Maviya abdul kalam khan
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औरों
को
अपने
ग़म
से
शनासा
न
किया
कर
इस
क़दर
ज़िन्दगी
का
तमाशा
न
किया
कर
Maviya abdul kalam khan
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ज़मीं
चाँद
व
सूरज
सितारे
ख़ुदा
के
हसीं
ख़ूब-सूरत
नज़ारे
ख़ुदा
के
खिलाता
है
सब
को
ख़ुदा
ही
तो
देखो
जहाँ
में
सभी
को
सहारे
ख़ुदा
के
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Maviya abdul kalam khan
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