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Maviya abdul kalam khan
zameen chaand wa suraj sitaare KHuda ke
zameen chaand wa suraj sitaare KHuda ke | ज़मीं चाँद व सूरज सितारे ख़ुदा के
- Maviya abdul kalam khan
ज़मीं
चाँद
व
सूरज
सितारे
ख़ुदा
के
हसीं
ख़ूब-सूरत
नज़ारे
ख़ुदा
के
खिलाता
है
सब
को
ख़ुदा
ही
तो
देखो
जहाँ
में
सभी
को
सहारे
ख़ुदा
के
- Maviya abdul kalam khan
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किस
तरह
'अमानत'
न
रहूँ
ग़म
से
मैं
दिल-गीर
आँखों
में
फिरा
करती
है
उस्ताद
की
सूरत
Amanat Lakhnavi
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कल
चौदहवीं
की
रात
थी
शब
भर
रहा
चर्चा
तिरा
कुछ
ने
कहा
ये
चाँद
है
कुछ
ने
कहा
चेहरा
तिरा
Ibn E Insha
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मशवरा
हम
भी
तो
दे
सकते
थे
पर
तेरा
साथ
दे
रहे
थे
हम
Vishal Singh Tabish
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हम
ख़ुश
हैं
हमें
धूप
विरासत
में
मिली
है
अजदाद
कहीं
पेड़
भी
कुछ
बो
गए
होते
Shahryar
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तू
समझता
है
कि
रिश्तों
कि
दुहाई
देंगे
अरे
हम
तो
वो
हैं
तेरे
चेहरे
से
दिखाई
देंगे
Waseem Barelvi
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हम
तोहफ़े
में
घड़ियाँ
तो
दे
देते
हैं
एक
दूजे
को
वक़्त
नहीं
दे
पाते
हैं
आँखें
ब्लैक
एंड
व्हाइट
हैं
तो
फिर
इन
में
रंग
बिरंगे
ख़्वाब
कहाँ
से
आते
हैं?
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Fareeha Naqvi
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हुस्न
को
हुस्न
बनाने
में
मिरा
हाथ
भी
है
आप
मुझ
को
नज़र-अंदाज़
नहीं
कर
सकते
Rais Farog
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गाहे
गाहे
बस
अब
यही
हो
क्या
तुम
सेे
मिलकर
बहुत
ख़ुशी
हो
क्या
Jaun Elia
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ऐसी
हैं
क़ुर्बतें
के
मुझी
में
बसा
है
वो
ऐसे
हैं
फ़ासले
के
नहीं
राब्ता
नसीब
Afzal Ali Afzal
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मुमकिना
फ़ैसलों
में
एक
हिज्र
का
फ़ैसला
भी
था
हमने
तो
एक
बात
की
उसने
कमाल
कर
दिया
Parveen Shakir
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ग़ज़लें
तो
पढ़
रहे
थे
वो
'अहमद
फ़राज़'
की
महफ़िल
में
लोग
मुझको
बड़े
चोर
लगे
हैं
Maviya abdul kalam khan
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तन्हा
ही
लड़
रहा
हूँ
मैं
हालात
से
यहाँ
कहने
को
मेरे
साथ
में
सारा
जहान
है
Maviya abdul kalam khan
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जिस
पे
लफ़्ज़ों
का
वार
होता
है
उसका
दिल
बेकरार
होता
है
माँ
का
साया
जहाँ
नहीं
होता
घर
वो
उजड़ा
दयार
होता
है
छीन
कर
हक
किसी
का
यूँँ
जीना
दिल
पे
अपने
तो
बार
होता
है
चोट
लगती
है
जब
भी
अपनों
से
ग़ैरों
पर
ऐतबार
होता
है
हम
जियें
कैसे
यूँँ
उसूलों
पर
हम
से
हरगिज़
न
यार
होता
है
कोई
हम
को
कलाम
बतलाऐ
जाने
कैसे
ये
प्यार
होता
है
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Maviya abdul kalam khan
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गिरता
हूँ
तो
फौरन
मुझे
उढने
नहीं
देती
हालात
की
संगीनी
सँभलने
नहीं
देती
Maviya abdul kalam khan
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रंजिशों
से
जुदा
रास्ते
हो
गए
और
फिर
दरमियाँ
फ़ासले
हो
गए
हम
जहाँ
से
चले
आ
गए
फिर
वहीं
रक्स-ए
हालात
से
दाएरे
हो
गए
शीरीं
पैराए
में
जब
भी
की
गुफ्तगू
हम
तो
गिरवीदा
बस
आपके
हो
गए
गांव
जलता
रहा
वो
तमाशाई
थे
उनके
शहरों
में
भी
हादसे
हो
गए
अपने
हो
कर
भी
थे
जो
कभी
अजनबी
हाजतों
के
सबब
वास्ते
हो
गए
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Maviya abdul kalam khan
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